मध्यकालीन भारत 6
### **मध्यकालीन भारत**
#### **27. भारत पर अरबों का आक्रमण**
* **मुहम्मद बिन कासिम के नेतृत्व में अरबों ने भारत पर पहला सफल आक्रमण किया।** अरबों ने सिंध पर 712 ई. में विजय पायी थी।
* **अरब आक्रमण के समय सिंध पर दाहिर का शासन था।**
* **भारत पर अरबवासियों के आक्रमण का मुख्य उद्देश्य धन-दौलत
लूटना तथा इस्लाम धर्म का प्रचार-प्रसार करना था।**
### 28. महमूद गज़नवी
* **932 ई.** में **अलप्तगीन** नामक एक तुर्क सरदार गज़नी साम्राज्य की स्थापना की, जिसकी राजधानी गज़नी थी।
* अलप्तगीन की मृत्यु के पश्चात् कुछ समय तक गज़नी में **पिरीतीगीन** ने शासन किया। इसी के शासनकाल (972–977 ई.) में सर्वप्रथम भारत पर आक्रमण किया गया।
* प्रथम तुर्क आक्रमण के समय पंजाब में शाही वंश का शासक **जयपाल** शासन कर रहा था।
* अलप्तगीन का गुलाम तथा दामाद **सुबुक्तगीन** 977 ई. में गज़नी की गद्दी पर बैठा। महमूद गज़नवी सुबुक्तगीन का पुत्र था, जिसका जन्म 1 नवम्बर, 971 ई. में हुआ था।
* अपने पिता के काल में महमूद गज़नवी खुरासान का शासक था।
* महमूद गज़नवी **27 वर्ष** की अवस्था में **998 ई.** में गद्दी पर बैठा।
* बगदाद का खलीफा अल-आदिर बिल्लाह ने महमूद गज़नवी के पद को मान्यता प्रदान करते हुए उसे **'यमीन-उद्-दौला'** तथा **'यमीन-उल-मिल्लाह'** की उपाधि दी।
* महमूद गज़नवी ने भारत पर **17 बार** आक्रमण किया। महमूद के भारतीय आक्रमण का वास्तविक उद्देश्य धन की प्राप्ति था।
* महमूद गज़नवी एक मूर्तिभंजक आक्रमणकारी था।
* महमूद गज़नवी ने भारत पर प्रथम आक्रमण **1000 ई.** में किया तथा पेशावर के कुछ भागों पर अधिकार करके वह अपने देश लौट गया।
* महमूद गज़नवी ने **1001 ई.** में शाही राजा जयपाल के विरुद्ध आक्रमण किया था। इसमें जयपाल की पराजय हुई थी।
* महमूद गज़नवी का **1008 ई.** में नगरकोट के विरुद्ध हमले को मूर्तिवाद के विरुद्ध महत्वपूर्ण जीत बतायी जाती है।
* महमूद गज़नवी ने थानेसर के चक्रस्वामिन की कांस्य निर्मित आदमकद प्रतिमा को गज़नी भेजकर रंगभूमि में रखवाया।
* महमूद गज़नवी का सबसे चर्चित आक्रमण **1025 ई.** में सोभनाथ मंदिर (*सौराष्ट्र*) पर हुआ। इस मंदिर की लूट में उसे करीब 20 लाख दीनार की संपत्ति हाथ लगी। सोमनाथ की रक्षा में सहायता करने के कारण अनहिलवाडा के शासक पर महमूद ने आक्रमण किया।
* सोमनाथ मंदिर लूट कर ले जाने के क्रम में महमूद पर जाटों ने आक्रमण किया था और कुछ सम्पत्ति लूट ली थी।
> **नोट:** *सोमनाथ भारत के बारह आदि ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है। यह गुजरात में अरब सागर के तट पर है। 13 नवंबर, 1947 को सरदार वल्लभभाई पटेल के द्वारा इसका पुनर्निर्माण शुरू करवाया गया। 11 मई, 1951 के दिन राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद के द्वारा मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की गई।*
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* महमूद गज़नवी का अन्तिम भारतीय आक्रमण **1027 ई.** में जाटों के विरुद्ध था। महमूद गज़नवी की मृत्यु 1030 ई. में हो गयी।
* **'सुल्तान'** की उपाधि धारण करने वाला प्रथम शासक महमूद गज़नवी था। महमूद के सेना में सेवंदराय एवं तिलक जैसे हिन्दू उच्च पदों पर आसीन थे। अलबरूनी, फिरदौसी, उत्बी तथा फारूखी महमूद गज़नवी के दरबार में रहते थे।
### 29. मुहम्मद गोरी
* गौर महमूद गज़नवी के अधीन एक छोटा-सा राज्य था। 1173 ई. में **शाहाबुद्दीन मुहम्मद गोरी** गौर का शासक बना। इसने भारत पर पहला आक्रमण **1175 ई.** में मुल्तान के विरुद्ध किया था।
* मुहम्मद गोरी का दूसरा आक्रमण **1178 ई.** में पाटन (*गुजरात*) पर हुआ। यहाँ का शासक भीम-II ने गोरी को बुरी तरह परास्त किया।
* मुहम्मद गोरी भारत के विजित प्रदेशों पर शासन का भार अपने गुलाम सेनापतियों को सौंपते हुए गज़नी लौट गया।
* मुहम्मद गोरी की हत्या 15 मार्च, 1206 ई. को कर दी गई।
#### मुहम्मद गोरी द्वारा लड़ा गया प्रमुख युद्ध
| युद्ध | वर्ष | पक्ष | परिणाम |
| **तराइन का प्रथम युद्ध** | 1191 | गोरी व पृथ्वीराज चौहान | चौहान विजयी |
| **तराइन का द्वितीय युद्ध** | 1192 | गोरी व पृथ्वीराज चौहान | गोरी विजयी |
| **चन्दावर का युद्ध** | 1194 | गोरी एवं जयचन्द | गोरी विजयी |
> **नोट:** *तराइन के प्रथम युद्ध में पृथ्वीराज चौहान का सेनापति स्कन्द था।*
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### 30. सल्तनत काल
#### गुलाम वंश
* गुलाम वंश की स्थापना 1206 में **कुतुबुद्दीन ऐबक** ने किया था। वह गोरी का गुलाम था।
> **नोट:** *गुलामों को फारसी में **बंदगाँ** कहा जाता है तथा इन्हें सैनिक सेवा के लिए खरीदा जाता था।*
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* कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपना राज्याभिषेक 24 जून, 1206 को किया था। कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपनी राजधानी **लाहौर** में बनायी थी।
* कुतुबमीनार की नींव कुतुबुद्दीन ऐबक ने डाली थी।
* दिल्ली का *कुवत-उल-इस्लाम मस्जिद* एवं अजमेर का *ढाई दिन का झोपड़ा* नामक मस्जिद का निर्माण ऐबक ने करवाया था। कुतुबुद्दीन ऐबक को **लाख बख्श** (लाखों का दान देनेवाला) भी कहा जाता था।
##### मंगोल (पार्श्व नोट)
मंगोल चीन के उत्तर में गोबी के रेगिस्तान के निवासी थे। वह एक घूमने-फिरने वाली अर्द्धसभ्य जाति थी तथा उनका मुख्य पेशा घोड़ों और अन्य पशुओं का पालन करना था। वे बहुत गन्दे रहते थे तथा सभी प्रकार का मांस खाते थे। उनमें स्त्री-विषयक नैतिकता का सर्वथा अभाव था यद्यपि माँ का सम्मान करते थे। वे विभिन्न कबीलों में बँटे थे, उन्हीं कबीलों में से एक में 1163 ई. में तेमूचिन उर्फ **चंगेज खाँ** का जन्म हुआ जिसे महान (*Chengiz the great*) और शापित (*The Accursed*) दोनों पुकारा गया। इसका पिता येसुगाई बहादुर था।
> **नोट:** *कुतुबुद्दीन के समय में कुतुबमीनार की केवल पहली मंजिल बन सकी। इल्तुतमिश ने इसे 225 फीट ऊँची चार मंजिल का बना दिया। फिरोज तुगलक के समय बिजली गिरने के कारण इसकी चौथी मंजिल नष्ट हो गयी जिसके कारण फिरोज ने इसमें दो छोटी मंजिलें बनवा दी जिससे इसमें पाँच मंजिल हो गयी और ऊँचाई 9 फीट बढ़कर 234 फीट हो गई।*
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* प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को ध्वस्त करने वाला ऐबक का सहायक सेनानायक **बख्तियार खिलजी** था।
* ऐबक की मृत्यु 1210 ई. में चौगान खेलते समय घोड़े से गिरकर हो गयी। इसे **लाहौर** में दफनाया गया।
* ऐबक का उत्तराधिकारी **आरामशाह** हुआ, जिसने आठ महीनों तक शासन किया।
* आरामशाह की हत्या करके **इल्तुतमिश 1211 ई.** में दिल्ली की गद्दी पर बैठा।
* इल्तुतमिश तुर्किस्तान का **इल्बरी तुर्क** था, जो ऐबक का गुलाम एवं दामाद था। ऐबक की मृत्यु के समय वह **बदायूँ** का गवर्नर था।
* इल्तुतमिश लाहौर से राजधानी को स्थानान्तरित करके दिल्ली लाया। इसने हीज-ए-सुल्तानी का निर्माण देहली-ए-कुहना के निकट करवाया था।
##### इल्तुतमिश के महत्वपूर्ण कार्य
1. कुतुबमीनार के निर्माण को पूर्ण करवाया।
2. सबसे पहले शुद्ध अरबी सिक्के जारी किए। (*चाँदी का टंका एवं ताँबा का जीतल*)
3. इक्ता प्रणाली चलाई।
4. चालीस गुलाम सरदारों का संगठन बनाया, जो **तुर्कान-ए-चहलगानी** के नाम
से जाना गया।
5. सर्वप्रथम दिल्ली के अमीरों का दमन किया।
* इल्तुतमिश पहला शासक था, जिसने 1229 ई. में बगदाद के खलीफा से सुल्तान पद की वैधानिक स्वीकृति प्राप्त की।
* इल्तुतमिश की मृत्यु अप्रैल, 1236 ई. में हो गयी।
* चंगेज खाँ से बचने के लिए ख्वारिज्म के सम्राट जलालुद्दीन को इल्तुतमिश ने अपने यहाँ शरण नहीं दी थी।
* इल्तुतमिश के बाद उसका पुत्र रुकनुद्दीन फिरोज गद्दी पर बैठा, वह एक अयोग्य शासक था। इसके अल्पकालीन शासन पर उसकी माँ शाह तुरकान छाई रही।
* शाह तुरकान के अवांछित प्रभाव से परेशान होकर तुर्की अमीरों ने रुकनुद्दीन को हटाकर रज़िया को सिंहासन पर आसीन किया। इस प्रकार रज़िया बेगम प्रथम मुस्लिम महिला थी, जिसने शासन की बागडोर संभाली।
* रज़िया ने पर्दाप्रथा का त्यागकर व पुरुषों की तरह चोगा (काबा) एवं कुलाह (टोपी) पहनकर राजदरबार में खुले मुँह से जाने लगी।
* रज़िया ने मलिक जमालुद्दीन याकूत को अमीर-ए-आखूर (घोड़े का सरदार) नियुक्त किया।
* गैर तुर्कों को सामंत बनाने के रज़िया के प्रयासों से तुर्की अमीर विरुद्ध हो गए और उसे बंदी बनाकर दिल्ली की गद्दी पर मुइज़ुद्दीन बहरामशाह को बैठा दिया।
* रज़िया की शादी अल्तूनिया के साथ हुई। इससे शादी करने के बाद रज़िया ने पुनः गद्दी प्राप्त करने का प्रयास किया, लेकिन वह असफल रही। रज़िया की हत्या 13 अक्टूबर, 1240 ई. को डाकुओं के द्वारा कैथल के पास कर दी गई।
* बहराम शाह को बंदी बनाकर उसकी हत्या मई, 1242 ई. में कर दी गई। उसके बाद दिल्ली का सुल्तान अलाउद्दीन मसूद शाह बना।
* बलबन ने षड्यंत्र के द्वारा 1246 ई. में अलाउद्दीन मसूद शाह को सुल्तान के पद से हटाकर नासिरुद्दीन महमूद को सुल्तान बना दिया।
* नासिरुद्दीन महमूद ऐसा सुल्तान था जो टोपी सीकर अपना जीवन-निर्वाह करता था।
* बलबन ने अपनी पुत्री का विवाह नासिरुद्दीन महमूद के साथ किया था।
* बलबन का वास्तविक नाम बहाउद्दीन था। वह इल्तुतमिश का गुलाम था। तुर्कान-ए-चहलगानी का विनाश बलबन ने किया था।
* बलबन 1266 ई. में गियासुद्दीन बलबन के नाम से दिल्ली की गद्दी पर बैठा। वह मंगोलों के आक्रमण से दिल्ली की रक्षा करने में सफल रहा। सीरी नामक नया नगर बलबन ने बसाया था।
* राजदरबार में सिजदा एवं पैबोस प्रथा की शुरुआत बलबन ने की थी।
* बलबन ने फारसी रीति-रिवाज पर आधारित नवरोज (फारसी साल का पहला दिन) उत्सव को प्रारंभ करवाया।
* अपने विरोधियों के प्रति बलबन ने कठोर 'लौह एवं रक्त' की नीति का पालन किया।
* नासिरुद्दीन महमूद ने बलबन को उलूग खाँ की उपाधि प्रदान की।
* बलबन आखेट अभियान के बहाने अपनी सेना को लंबी दूरी तक कवायद कराकर दुरुस्त रखता था।
* बलबन के दरबार में फारसी के प्रसिद्ध कवि अमीर खुसरो एवं अमीर हसन रहते थे।
* गुलाम वंश का अंतिम शासक शम्भूद्दीन कैमुर्स था।
### खिलजी वंश : 1290 से 1320 ई.
* गुलाम वंश के शासन को समाप्त कर 13 जून, 1290 ई. को जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने खिलजी वंश की स्थापना की।
* इसने किलोखरी को अपनी राजधानी बनाया।
* जलालुद्दीन की हत्या 1296 ई. में उसके भतीजा व दामाद अलाउद्दीन खिलजी ने कड़ामानिकपुर (प्रयाग) में कर दी।
* 22 अक्टू., 1296 में अलाउद्दीन दिल्ली का सुल्तान बना।
* अलाउद्दीन के बचपन का नाम अली तथा गुरशास्प था।
* अलाउद्दीन खिलजी ने सेना को नकद वेतन देने एवं स्थायी सेना की नींव रखी। दिल्ली के शासकों में अलाउद्दीन खिलजी के पास सबसे विशाल स्थायी सेना थी।
* घोड़ा दागने एवं सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा की शुरुआत अलाउद्दीन खिलजी ने की।
* अलाउद्दीन ने भूराजस्व की दर को बढ़ाकर उपज का 1/2 भाग कर दिया।
* इसने खम्स (लूट का धन) में सुल्तान का हिस्सा 1/4 भाग के स्थान पर 3/4 भाग कर दिया।
* इसने व्यापारियों में बेईमानी रोकने के लिए कम तौलने वाले व्यक्ति के शरीर से मांस काट लेने का आदेश दिया। इसने अपने शासनकाल में 'मूल्य नियंत्रण प्रणाली' को दृढ़ता से लागू किया।
* दक्षिण भारत की विजय के लिए अलाउद्दीन ने मलिक काफूर को भेजा।
* जमयत खाना मस्जिद, अलाई दरवाजा, सीरी का किला व हजार खम्भा महल का निर्माण अलाउद्दीन ने करवाया था।
* अलाई दरवाजा को इस्लामी वास्तुकला का रत्न कहा जाता है।
* दैवी अधिकार के सिद्धान्त को अलाउद्दीन ने चलाया था।
* सिकन्दर-ए-सानी की उपाधि से स्वयं को अलाउद्दीन खिलजी ने विभूषित किया।
* अलाउद्दीन ने मलिक याकूब को दीवान-ए-रियासत नियुक्त किया था।
* अलाउद्दीन द्वारा नियुक्त परवाना-नवीस नामक अधिकारी वस्तुओं की परमिट जारी करता था।
* शहना-ए-मंडी—यहाँ खाद्यान्नों को बिक्री हेतु लाया जाता था। सराए-ए-अदल—यहाँ वस्त्र, शक्कर, जड़ी-बूटी, मेवा, दीपक का तेल एवं अन्य निर्मित वस्तुएँ बिकने के लिए आती थीं।
* अलाउद्दीन खिलजी की आर्थिक नीति की व्यापक जानकारी जियाउद्दीन बरनी की कृति तारीखे फिरोजशाही से मिलती है।
* खजाइनुल-फतूह—अमीर खुसरो, रिहला—इब्न बतूता एवं फुतूहस्सलातीन—इसामी की कृति है।
* मूल्य-नियंत्रण को सफल बनाने में मुहतसिव (सेंसर) एवं नाजिर (नाप-तौल अधिकारी) की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
* राजस्व सुधारों के अन्तर्गत अलाउद्दीन ने सर्वप्रथम मिल्क, इनाम एवं वक्फ के अन्तर्गत दी गयी भूमि को वापस लेकर उसे खालसा भूमि में बदल दिया।
#### पार्श्व बॉक्स (अमीर खुसरो एवं बाजार-नियंत्रण पद)
##### अमीर खुसरो
अमीर खुसरो का मूल नाम मोहम्मद हसन था। उनका जन्म पटियाली (पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बदायूँ के पास) में 1252 ई. में हुआ था। खुसरो प्रसिद्ध सूफी संत शेख निजामुद्दीन औलिया के शिष्य थे। वह बलबन से लेकर मोहम्मद तुगलक तक दिल्ली सुल्तानों के दरबार में रहे। इन्हें **तूतिए हिन्द** (भारत का तोता) के नाम से भी जाना जाता है। सितार एवं तबले के आविष्कार का श्रेय अमीर खुसरो को ही दिया जाता है। इन्होंने ही भारतीय संगीत में कव्वाली गायन को प्रचलित किया। साथ ही इन्हें कई प्रकार के आधुनिक रागों जैसे तिलक साजगिरि, सरपर्दा आदि को प्रचलित करने का श्रेय प्राप्त है। इन्हें हिन्दी खड़ी बोली का जनक भी कहा जाता है। इनकी रचना है—दीवान (फारसी में कविताओं का संग्रह), नूह सिपेहर एवं मसनवी देवल रानी खिज्र खाँ (दुखद प्रेम-कथा)।
*(स्त्रोत: NCERT वर्ग-XI)*
##### बाज़ार-नियंत्रण करने के लिए अलाउद्दीन खिलजी द्वारा बनाये जाने वाले नवीन पद (क्रमानुसार)
* **दीवान-ए-रियासत:** यह व्यापारियों पर नियंत्रण रखता था। यह बाजार-नियंत्रण की पूरी व्यवस्था का संचालन करता था।
* **शहना-ए-मंडी:** प्रत्येक बाजार में बाजार का अधीक्षक।
* **बरीद:** बाजार के अन्दर घूमकर बाजार का निरीक्षण करता था।
* **मुनहियान व गुप्तचर:** गुप्त सूचना प्राप्त करता था।
* अलाउद्दीन खिलजी के द्वारा लगाये जाने वाले दो नवीन कर थे—1. **चराई कर:** दुधारू पशुओं पर लगाया जाता था, 2. **गढ़ी कर:** घरों एवं झोपड़ी पर लगाया जाता था।
* अलाउद्दीन खिलजी के शासन काल में 1297 से 1306 ई. तक मंगोलों के छह आक्रमण हुए। प्रथम आक्रमण 1297 ई. में कादर खाँ के नेतृत्व में, दूसरा आक्रमण 1298 ई. में सल्दी के नेतृत्व में, तीसरा आक्रमण 1299 ई. में कुतलुग ख्वाजा के नेतृत्व में, चौथा आक्रमण 1303 ई. में तारगी के नेतृत्व में, पाँचवाँ आक्रमण 1305 ई. में अलीवेग और तार्ताक के नेतृत्व में एवं छठा आक्रमण 1306 ई. में कवक एवं इकबालमन्द के नेतृत्व में हुआ।
* अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु 5 जनवरी, 1316 ई. को हो गयी।
* कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी 1316 ई. को दिल्ली के सिंहासन पर बैठा। इसे नग्न स्त्री-पुरुष की संगत पसंद थी।
* मुबारक खिलजी कभी-कभी राजदरबार में स्त्रियों का वस्त्र पहनकर आ जाता था। बरनी के अनुसार मुबारक कभी-कभी नग्न होकर दरबारियों के बीच दौड़ लगाया करता था।
* मुबारक खाँ ने खलीफा की उपाधि धारण की थी।
* मुबारक के वज़ीर खुशरों खाँ ने 15 अप्रैल, 1320 ई. को इसकी हत्या कर दी और स्वयं दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।
* खुशरों खाँ ने पैगम्बर के सेनापति की उपाधि धारण की।
### तुगलक वंश : 1320–1398 ई.
* 5 सितम्बर, 1320 को खुशरों खाँ को पराजित करके गाज़ी मलिक या तुगलक गाज़ी ग्यासुद्दीन तुगलक के नाम से 8 सितम्बर, 1320 को दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।
* ग्यासुद्दीन ने अलाउद्दीन के समय में लिए गए अमीरों की भूमि को पुनः लौटा दिया।
* इसने सिंचाई के लिए कुएँ एवं नहरों का निर्माण करवाया। संभवतः नहरों का निर्माण करने वाला ग्यासुद्दीन प्रथम शासक था।
* ग्यासुद्दीन तुगलक ने दिल्ली के समीप स्थित पहाड़ियों पर **तुगलकाबाद** नाम का एक नया नगर स्थापित किया। रोमन शैली में निर्मित इस नगर में एक दुर्ग का निर्माण भी हुआ। इस दुर्ग को **छप्पनकोट** के नाम से भी जाना जाता है।
* ग्यासुद्दीन तुगलक की मृत्यु 1325 ई. में बंगाल के अभियान से लौटते समय जूना खाँ द्वारा निर्मित लकड़ी के महल में दबकर हो गयी।
* ग्यासुद्दीन के बाद उलूग खाँ या जूना खाँ **मुहम्मद बिन तुगलक** के नाम से 1325 में दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।
* मध्यकालीन सभी सुल्तानों में मुहम्मद तुगलक सर्वाधिक शिक्षित, विद्वान एवं योग्य व्यक्ति था।
* मुहम्मद बिन तुगलक को अपनी सनक भरी योजनाओं, क्रूर कृत्यों एवं दूसरे के सुख-दुख के प्रति उपेक्षा भाव रखने के कारण **स्वप्नशील, पागल एवं रक्तपिपासु** कहा गया।
* मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि के विकास के लिए **'अमीर-ए-कोही'** नामक एक नवीन विभाग की स्थापना की।
* मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से देवगिरि में स्थानान्तरित की और इसका नाम **दौलताबाद** रखा।
* मुहम्मद बिन तुगलक अपने प्रत्येक मलिक के सम्मान में दो पोशाक दिया करता था—एक जाड़े में और दूसरा गर्मी में।
* कहा जाता है कि डाक प्रबन्धों के द्वारा मुहम्मद बिन तुगलक के लिए ताजे फल (खुरासन से) एवं पीने के लिए गंगाजल मँगवाया जाता था।
#### पार्श्व बॉक्स (मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा क्रियान्वित योजनाएँ)
##### मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा क्रियान्वित क्रमशः चार योजनाएँ:
1. **दोआब क्षेत्र में कर-वृद्धि** (1326–1327 ई.)
2. **राजधानी-परिवर्तन** (1326–27 ई.)
3. **सांकेतिक मुद्रा का प्रचलन** (1329–30 ई.)
4. **खुरासन एवं कराचिल का अभियान**
* सांकेतिक मुद्रा के अन्तर्गत मुहम्मद बिन तुगलक ने काँसा (*फिरिश्ता के अनुसार*), ताँबा (*बरनी के अनुसार*) धातुओं के सिक्के चलवाए, जिनका मूल्य चाँदी के रुपए टंका के बराबर होता था। एडवर्ड थॉमस ने मुहम्मद बिन तुगलक को **'प्रिंस ऑफ मनीअर्स'** की संज्ञा दी।
> **नोट:** *सांकेतिक मुद्रा का प्रयोग चीन के कुबलई खाँ एवं ईरान के गजन खाँ नामक एक मंगोल शासक ने भी किया था।*
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* अफ्रीकी (*मोरक्को*) यात्री **इब्न बतूता** लगभग 1333 ई. में भारत आया। सुल्तान ने इसे दिल्ली का काज़ी नियुक्त किया। 1342 ई. में सुल्तान ने इसे अपने राजदूत के रूप में चीन भेजा।
* इब्नबतूता की पुस्तक **रेहला** में मुहम्मद तुगलक के समय की घटनाओं का वर्णन है। इसने अपनी पुस्तक में विदेशी व्यापारियों के आवागमन, डाक चौकियों की स्थापना यानी डाक व्यवस्था एवं गुप्तचर व्यवस्था के बारे में लिखा है। इसके अनुसार भारतीय डाक व्यवस्था दो प्रकार के थे—(i) अश्व डाक व्यवस्था जिसे **उलुक** कहा जाता था। (ii) पैदल डाक व्यवस्था जिसे **दावा** कहा जाता था। इसने नगाड़ों की भारी ध्वनि के बीच एक स्त्री को सती होने के दृश्य का वर्णन किया है। इसके कथनानुसार सती होने के लिए सुल्तान से अनुमति लेनी पड़ती थी।
* मुहम्मद तुगलक के समय **ज़िया नख्शबी** पहला व्यक्ति था जिसने संस्कृत कथाओं की एक श्रृंखला का फारसी में अनुवाद किया था। इस पुस्तक का नाम **तूती नामा** था जिसमें एक तोता एक ऐसी विरहिणी नायिका को कहानी सुनाता है, जिसका पति यात्रा पर गया है।
* मुहम्मद तुगलक ने **जिन प्रभु सूरी** नामक जैन साधु को अपने दरबार में बुलाकर सम्मान प्रदान किया था।
* मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु 20 मार्च, 1351 ई. को सिन्ध जाते समय थट्टा के निकट गोडाल में हो गयी।
* मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में दक्षिण में **हरिहर एवं बुक्का** नामक दो भाइयों ने 1336 में स्वतंत्र राज्य **विजयनगर** की स्थापना की।
* महाराष्ट्र में **अलाउद्दीन बहमन शाह** ने 1347 ई. में स्वतंत्र **बहमनी राज्य** की स्थापना की।
* मुहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु पर इतिहासकार बदायूँनी लिखता है, *"अंततः लोगों को उससे मुक्ति मिली और उसे लोगों से"।*
* मुहम्मद बिन तुगलक **शेख अलाउद्दीन** का शिष्य था। वह सल्तनत का पहला शासक था, जो अजमेर में शेख मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह और बहराइच में सालार मसूद गाजी के मकबरे में गया।
* मुहम्मद बिन तुगलक ने बदायूँ में मीरन मुलहीम, दिल्ली में शेख निजामुद्दीन औलिया, मुल्तान में शेख रुकनुद्दीन, अजुधन में शेख मुल्तान आदि संतों की कब्र पर मकबरे बनवाए।
* **फिरोज तुगलक** का राज्याभिषेक थट्टा के नजदीक 20 मार्च, 1351 को हुआ, पुनः फिरोज का राज्याभिषेक दिल्ली में अगस्त, 1351 को हुआ। खलीफा द्वारा इसे **कासिम अमीर उल मोमीन** की उपाधि दी गई।
* राजस्व व्यवस्था के अन्तर्गत फिरोज ने अपने शासनकाल में 24 कष्टदायक करों को समाप्त कर केवल चार कर—**खराज (लगान), खुम्स (युद्ध में लूट का माल), जजिया एवं जकात** को वसूल करने का आदेश दिया।
* फिरोज तुगलक **ब्राह्मणों पर जज़िया लागू करने वाला पहला मुसलमान शासक** था। फिरोज तुगलक ने एक नया कर **सिंचाई-कर** भी लगाया, जो उपज का 1/10 भाग था।
* फिरोज तुगलक ने 5 बड़ी नहरों का निर्माण करवाया।
* फिरोज तुगलक ने 300 नये नगरों की स्थापना की। इनमें **हिसार, फिरोजाबाद (दिल्ली), फतेहाबाद, जौनपुर, फिरोजपुर** प्रमुख हैं।
* इसके शासनकाल में खिज़ाबाद (*टोपरा गाँव*) एवं मेरठ से अशोक के दो स्तम्भों को लाकर दिल्ली में स्थापित किया गया। टोपरा स्थित अशाके स्तंभ के परिवहन का चित्रित वर्णन
सीरत-ए-फिरोजशाही (*लेखक अज्ञात*) में मिलता है।
* सुल्तान फिरोज तुगलक ने अनाथ मुस्लिम महिलाओं, विधवाओं एवं लड़कियों की सहायता के लिए एक नए विभाग **दीवान-ए-खैरात** की स्थापना की।
* सल्तनतकालीन सुल्तानों के शासनकाल में सबसे अधिक दासों की संख्या (करीब 1,80,000) फिरोज तुगलक के समय थी।
* दासों की देखभाल के लिए फिरोज ने एक नए विभाग **दीवान-ए-बंदगान** की स्थापना की। इसने सैन्य पदों को वंशानुगत बना दिया।
* इसने अपनी आत्मकथा **फतुहात-ए-फिरोजशाही** की रचना की।
* इसने जियाउद्दीन बरनी एवं शम्स-ए-सिराज अफीफ को अपना संरक्षण प्रदान किया।
* फिरोज तुगलक के नगरकोट (*वर्तमान में कांगड़ा*) अभियान (1361) के दौरान ज्वालामुखी मंदिर के पुस्तकालय से संस्कृत के 1300 ग्रंथ प्राप्त हुए। उनमें से कुछ को (*लगभग 300 का*) फारसी भाषा में अनुवाद अजीजुद्दीन किरमानी नामक फारसी के विद्वान ने किया। संस्कृत से फारसी भाषा में अनुदित सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ **दलायल-ए-फिरोजशाही** थी जो दर्शन और नक्षत्र-विज्ञान से संबंधित ग्रंथ था।
* इसने चाँदी एवं ताँबे के मिश्रण से निर्मित सिक्के भारी संख्या में जारी करवाए, जिसे **अद्धा एवं बिख** कहा जाता था।
* फिरोज तुगलक की मृत्यु सितम्बर, 1388 ई. में हो गयी।
* फिरोज काल में निर्मित खान-ए-जहाँ तेलंगानी के मकबरा की तुलना जेरूसलम में निर्मित उमर के मस्जिद से की जाती है।
* सुल्तान फिरोज तुगलक ने दिल्ली में कोटला फिरोजशाह दुर्ग का निर्माण करवाया।
* तुगलक वंश का अंतिम शासक **नासिरुद्दीन महमूद तुगलक** था। इसका शासन दिल्ली से पालम तक ही रह गया था।
* तैमूरलंग ने सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद तुगलक के समय 1398 ई. में दिल्ली पर आक्रमण किया।
* नासिरुद्दीन के समय में ही मलिकुश्शर्क (*पूर्वाधिपति*) की उपाधि धारण कर एक हिजड़ा मलिक सरवर ने जौनपुर में एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना की।
### सैय्यद वंश : 1414 से 1451 ई.
* सैय्यद वंश का संस्थापक **खिज्र खाँ** था। इसने सुल्तान की उपाधि न धारण कर अपने को **रैयत-ए-आला** की उपाधि से ही खुश रखा।
* खिज्र खाँ तैमूरलंग का सेनापति था। भारत से लौटते समय तैमूरलंग ने खिज्र खाँ को मुल्तान, लाहौर एवं दीपालपुर का शासक नियुक्त किया।
* खिज्र खाँ नियमित रूप से तैमूर के पुत्र शाहरुख को कर भेजता था।
* खिज्र खाँ की मृत्यु 20 मई, 1421 ई. में हो गयी।
* खिज्र खाँ के पुत्र मुबारक खाँ ने शाह की उपाधि धारण की थी।
* याहिया बिन अहमद सरहिन्दी को मुबारक शाह का संरक्षण प्राप्त था। इसकी पुस्तक **तारीख-ए-मुलारक शाही** में सैय्यद वंश के विषय में जानकारी मिलती है।
* यमुना के किनारे मुबारकाबाद की स्थापना मुबारक शाह ने की थी।
* सैय्यद वंश का अंतिम सुल्तान अलाउद्दीन आलम शाह था।
* सैय्यद वंश का शासन करीब 37 वर्षों तक रहा।
### लोदी वंश : 1451 से 1526 ई.
* लोदी वंश का संस्थापक **बहलोल लोदी** था। वह 19 अप्रैल, 1451 को 'बहलोल शाहगाजी' की उपाधि से दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।
* दिल्ली पर प्रथम अफगान राज्य की स्थापना का श्रेय बहलोल लोदी को दिया जाता है।
* बहलोल लोदी ने **बहलोल सिक्के** का प्रचलन करवाया।
* वह अपने सरदारों को **'मकसद-ए-अली'** कहकर पुकारता था।
* वह अपने सरदारों के खड़े रहने पर स्वयं भी खड़ा रहता था।
* बहलोल लोदी का पुत्र निजाम खाँ 17 जुलाई, 1489 ई. में 'सुल्तान सिकन्दर शाह' की उपाधि से दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।
* **1504 ई.** में सिकन्दर लोदी ने **आगरा नगर** की स्थापना की।
* भूमि के लिए मापन के प्रामाणिक पैमाना **गजे सिकन्दरी** का प्रचलन सिकन्दर लोदी ने किया।
* **'गुलरुखी'** शीर्षक से फारसी कविताएँ लिखने वाला सुल्तान सिकन्दर लोदी था।
* सिकन्दर लोदी ने आगरा को अपनी नई राजधानी बनाया। इसके आदेश पर संस्कृत के एक आयुर्वेद ग्रंथ का फारसी में **फरहंगे सिकन्दरी** के नाम से अनुवाद हुआ। इसने नगरकोट के ज्वालामूखी मंदिर की मूर्ति को तोड़कर उसके टुकड़ों को कसाइयों को मांस तौलने के लिए दे दिया था। इसने मुसलमानों को ताजिया निकालने एवं मुसलमान स्त्रियों को पीरों तथा संतों के मजार पर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया।
* गले की बीमारी के कारण सिकन्दर लोदी की मृत्यु 21 नवम्बर, 1517 ई. को हो गयी। इसी दिन इसका पुत्र इब्राहिम 'इब्राहिम शाह' की उपाधि से आगरा के सिंहासन पर बैठा।
* संभवतः दिल्ली के सुल्तानों में सिकन्दर लोदी प्रथम सुल्तान था जो हिंदुओं के त्योहारों मुख्यतया होली में भाग लेता था।
> **नोट:** *दिल्ली की मोठ मस्जिद सिकन्दर लोदी के प्रधानमंत्री (वज़ीर) मियाँ भोइया ने 1505 में बनवाई थी।*
>
* **21 अप्रैल, 1526 ई.** को पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी बाबर से हार गया। इस युद्ध में वह मारा गया।
* बाबर को भारत पर आक्रमण के लिए निमंत्रण पंजाब के शासक दौलत खाँ लोदी एवं इब्राहिम लोदी के चाचा आलम खाँ ने दिया था।
### सल्तनतकालीन शासन-व्यवस्था
* केंद्रीय प्रशासन का मुखिया—सुल्तान।
* बलबन एवं अलाउद्दीन के समय अमीर प्रभावहीन हो गए।
* अमीरों का महत्व चरमोत्कर्ष पर था—लोदी वंश के शासनकाल में।
* सल्तनतकाल में मंत्रिपरिषद को **मजलिस-ए-खलवत** कहा गया।
* मजलिस-ए-खास में मजलिस-ए-खलवत की बैठक होती थी।
* **बार-ए-खास:** इसमें सुल्तान सभी दरबारियों, खानों, अमीरों, मालिकों और अन्य रईसों को बुलाता था।
* **बार-ए-आजम:** सुल्तान राजकीय कार्यों का अधिकांश भाग पूरा करता था।
* सल्तनत काल में दीवाने रियासत धार्मिक मामलों, पवित्र स्थानों तथा योग्य विद्वानों और धर्मपरायण लोगों को वजीफा देता था। इसका अध्यक्ष प्रमुख सदर होता था जो साधारणतः प्रधान काजी होता था। यह न्याय विभाग का भी अध्यक्ष होता था।
* दीवाने इंशा नामक विभाग राज्य के पत्राचार से संबंध रखता था।
#### मंत्री एवं उससे संबंधित विभाग
| मंत्री | विभाग |
|---|---|
| **वजीर (प्रधानमंत्री)** | राजस्व विभाग का प्रमुख। |
| **मुशरिफ-ए-मुमालिक (महालेखाकार)** | प्रांतों एवं अन्य विभागों से प्राप्त आय एवं व्यय का लेखा-जोखा। |
| **मजमुआदार** | उधार दिए गए धन का हिसाब रखना। |
| **खज़ीन** | कोषाध्यक्ष। |
| **आरिज-ए-मुमालिक** | दीवान-ए-अर्ज अथवा सैन्य विभाग का प्रमुख। |
| **सद्र-उस-सुदूर** | धर्म विभाग एवं दान विभाग का प्रमुख। |
| **काजी-उल-कजात** | सुल्तान के बाद न्याय का सर्वोच्च अधिकारी। |
| **बरीद-ए-मुमालिक** | गुप्तचर विभाग का प्रमुख अधिकारी। |
| **वकील-ए-दर** | सुल्तान की व्यक्तिगत सेवाओं की देखभाल। |
| **दीवान-ए-खैरात** | दान विभाग। |
| **दीवान-
ए-बंदगान** | दास विभाग। |
| **दीवान-ए-इस्तिहाक** | पेंशन विभाग। |
#### विभाग एवं उनके संस्थापक सुल्तान
| विभाग | बनाने वाला सुल्तान |
|---|---|
| **दीवान-ए-मुस्तखराज (वित्त विभाग)** | अलाउद्दीन खिलजी |
| **दीवान-ए-कोही (कृषि विभाग)** | मुहम्मद बिन तुगलक |
| **दीवान-ए-अर्ज (सैन्य विभाग)** | बलबन |
| **दीवान-ए-बंदगान** | फिरोजशाह तुगलक |
| **दीवान-ए-खैरात** | फिरोजशाह तुगलक |
| * **दीवान-ए-इस्तिहाक** | फिरोजशाह तुगलक |
* साम्राज्य के विभिन्न भागों में चल रही गतिविधियों की पूर्ण जानकारी के लिए दूतों की नियुक्ति की जाती थी; ये दूत **बरीद** कहलाते थे। शासक के सबसे ज्यादा विश्वासपात्र लोग ही मुख्य बरीद के पद पर नियुक्त किए जाते थे।
* लोक-निर्माण विभाग की स्थापना फिरोज तुगलक ने की थी। यह विभाग नहरों तथा सार्वजनिक भवनों का निर्माण करता था।
* सल्तनत अनेक प्रांतों में बँटा हुआ था, जिसे **इक्ता** या सूबा कहा जाता था। यहाँ का शासन नायब या वली या मुक्ति द्वारा होता था।
* इक्ताओं को **शिकों (जिलों)** में विभाजित किया गया था। जहाँ का प्रमुख अधिकारी शिकदार होता था जो एक सैनिक अधिकारी था।
#### राजस्व (कर) व्यवस्था
* **उश्र:** मुसलमानों से लिया जाने वाला भूमि कर।
* **खराज:** गैर-मुसलमानों से लिया जाने वाला भूमि कर।
* **ज़कात:** मुसलमानों पर धार्मिक कर (संपत्ति का 40वाँ हिस्सा)।
* **जज़िया:** गैर-मुसलमानों पर धार्मिक कर।
> **नोट:** *खम्स: यह लूटे हुए धन, खानों अथवा भूमि में गड़े हुए खजानों से प्राप्त संपत्ति का 1/5 भाग था जिसपर सुल्तान का अधिकार था तथा शेष 4/5 भाग पर उसके सैनिकों अथवा खजाने को प्राप्त करने वाले व्यक्ति का अधिकार होता था, परन्तु फिरोज तुगलक को छोड़कर अन्य सभी शासकों ने 4/5 हिस्सा स्वयं अपने लिये रखा। सुल्तान सिकन्दर लोदी ने गड़े हुए खजानों में से कोई हिस्सा नहीं लिया।*
>
* शिकों को परगनों में विभाजित किया गया था। आमिल परगने का मुख्य अधिकारी था और मुशरिफ लगान को निश्चित करने वाला अधिकारी।
* एक शहर या 100 गाँवों के शासन की देख-रेख **अमीर-ए-सदा** नामक अधिकारी करता था।
* प्रशासन की सबसे छोटी इकाई **ग्राम** होता था। ग्राम में सबसे अधिक प्रभावशाली लोग **खुत** (छोटे ज़मींदार) और **मुकद्दम** (मुखिया) होते थे। ग्राम का एक पटवारी होता था।
* सुल्तान की स्थायी सेना को **खासखेल** नाम दिया गया था।
* मंगोल सेना के वर्गीकरण की दशमलव प्रणाली को सल्तनतकालीन सैन्य व्यवस्था का आधार बनाया गया था।
* दस अश्वारोही = 1 सर-ए-खेल
* दस सर-ए-खेल = 1 सिपहसालार
* दस सिपहसालार = 1 अमीर
* दस अमीर = 1 मलिक
* दस मलिक = 1 खान
* सल्तनत काल में बारूद की सहायता से गोला फेंकने वाली मशीन को **'मंगलिक'** तथा **'अराद'** कहा जाता था।
* अलाउद्दीन खिलजी ने इक्ता प्रथा को समाप्त किया था।
* इक्ता प्रथा की दोबारा शुरुआत फिरोज तुगलक ने की थी।
* सल्तनत काल में अच्छी नस्ल के घोड़े तुर्की, अरब एवं रूस से मँगाए जाते थे। हाथी मुख्यतः बंगाल से मँगाए जाते थे।
* सल्तनतकालीन कानून **शरीयत, कुरान एवं हदीस** पर आधारित था।
#### पार्श्व तालिका (स्थान प्रसिद्धि के कारण)
| स्थान | प्रसिद्धि के कारण |
|---|---|
| **सरसुती** | अच्छी किस्म के चावल के लिए। |
| **अनहिलवाडा** | व्यापारियों का तीर्थ-स्थल के रूप में। |
| **सतगाँव** | रेशमी रजाइयों के लिए। |
| **आगरा** | नील उत्पादन के लिए। |
| **बनास** | सोने-चाँदी व जड़ी काम के लिए। |
* मुस्लिम कानून के चार महत्वपूर्ण स्रोत थे—कुरान, हदीस, इजमा व कयास।
* सुल्तान सप्ताह में दो बार दरबार में न्याय करने के लिए उपस्थित होता था।
* सल्तनतकाल में लगान निर्धारित करने की मिश्रित प्रणाली को **मुक्ताई** कहा गया है।
* भूमि की नाप-जोख करने के बाद क्षेत्रफल के आधार पर लगान का निर्धारण **मसाहत** कहलाता था। इसकी शुरुआत अलाउद्दीन ने की।
* पूर्णतः केन्द्र के नियंत्रण में रहने वाली भूमि **खालसा भूमि** कहलाती थी।
* अलाउद्दीन ने दान दी गई अधिकांश भूमि को छीनकर खालसा भूमि में परिवर्तित कर दिया।
* सल्तनतकालीन मुद्रा व्यवस्था चाँदी के टंके और ताँबे के दिरहम पर आधारित थी।
* **देवल** सल्तनत काल में अन्तरराष्ट्रीय बन्दरगाह के रूप में प्रसिद्ध था।
### 31. विजयनगर साम्राज्य
* विजयनगर साम्राज्य की स्थापना **1336 ई.** में **हरिहर एवं बुक्का** नामक दो भाइयों ने की थी, जो पाँच भाइयों के परिवार के अंग थे। विजयनगर का शाब्दिक अर्थ है—**जीत का शहर**।
* हरिहर एवं बुक्का ने विजयनगर की स्थापना **विद्यारण्य संत** से आशीर्वाद प्राप्त कर की थी।
* हरिहर एवं बुक्का ने अपने पिता **संगम** के नाम पर **संगम राजवंश** की स्थापना की।
* विजयनगर साम्राज्य की राजधानी **हम्पी** थी। विजयनगर साम्राज्य के खण्डहर तुंगभद्रा नदी पर स्थित हैं।
* विजयनगर साम्राज्य की राजभाषा **तेलगु** थी।
> **नोट:** *हम्पी के भग्नावशेषों को कर्नल कॉलिन मेकेंजी (ईस्ट इंडिया कंपनी के ब्रिटिश अधिकारी) द्वारा प्रकाश में लाया गया।*
>
* हरिहर एवं बुक्का पहले वारंगल के काकतीय शासक प्रताप रुद्रदेव के सामंत थे। विजयनगर साम्राज्य पर क्रमशः निम्न वंशों ने शासन किया—**संगम, सलुव, तुलुव एवं अरावीडू वंश**।
* बुक्का-I ने **वेदमार्ग प्रतिष्ठापक** की उपाधि धारण की।
* हरिहर-II ने संगम शासकों में सबसे पहले **महाराजाधिराज** की उपाधि धारण की थी।
* इटली का यात्री **निकोलो काण्टी** विजयनगर की यात्रा पर देवराय प्रथम के शासन काल में आया। इसने दासप्रथा के बारे में विस्तृत वर्णन किया है।
* देवराय प्रथम ने तुंगभद्रा नदी पर एक बाँध बनवाया ताकि जल की कमी दूर करने के लिए नगर में नहरें ला सकें। सिंचाई के लिए उसने हरिद्रा नदी पर भी बाँध बनवाया।
#### संगम वंश के प्रमुख शासक
| शासक | शासन काल |
|---|---|
| **हरिहर** | 1336–1356 ई. |
| **बुक्का-I** | 1356–1377 ई. |
| **हरिहर-II** | 1377–1404 ई. |
| **देवराय-I** | 1406–1422 ई. |
| **देवराय-II** | 1422–1446 ई. |
| **मल्लिकार्जुन** | 1446–1465 ई. |
| **विरूपक्ष-II** | 1465–1485 ई. |
#### अष्टदिग्गज में शामिल कवि
| क्र. | कवि | रचना |
|---|---|---|
| 1. | **अल्लसनि पेद्दन** | मनुचरितम एवं हरिकथासार |
| 2. | **नंदी तिम्प** | पारिजतातहरण |
| 3. | **भट्टूमूर्ति** | नरसभूपालियम् और हरिचन्द्रन लोपाख्यानम |
| 4. | **धूर्जति** | कलहस्तिमहात्म्य |
| 5. | **मल्लन** | राजशेखरचरित |
| 6. | **अच्च्युतराज रामचंद्र** | सकलकथासारसंग्रह एवं रामाभ्युदयम |
| 7. | **पिंगाली सूरत** | राघवपाण्डवीय |
| 8. | **तेनाली रामकृष्ण** | पाण्डुरंग माहात्म्य |
#### तेलगू के पाँच महाकाव्य
| क्र. | महाकाव्य | रचनाकार |
|---|---|---|
| 1. | **आमुक्तमाल्यद** | कृष्णदेव राय |
| 2. | **मनुचरितम्** | अल्लसनि पेद्दन |
| 3. | **वसुचरित** | भट्टूमूर्ति |
| 4. | **राघवपाण्डवीयम्** | पिंगालि सूरत |
| 5. | **पांडुरंग माहात्म्य** | तेनाली रामकृष्ण |
* संगम वंश का सबसे प्रतापी राजा **देवराय द्वितीय** था। इसे **इमाडिदेवराय** भी कहा जाता था।
* फारसी राजदूत **अब्दुल रज्जाक** देवराय-II के शासनकाल में विजयनगर आया था। इसके अनुसार विजयनगर में पुलिसवालों का वेतन वेश्यालय की आय से दी जाती थी।
* तेलुगू कवि श्रीनाथ कुछ दिनों तक देवराय-II के दरबार में रहे।
* फिरिश्ता के अनुसार देवराय-II ने अपनी सेना में दो हजार मुसलमानों को भर्ती किया था एवं उन्हें जागीरें दी थीं।
* एक अभिलेख में देवराय-II को **जगवेटकर (हाथियों का शिकारी)** कहा गया है। देवराय-II ने संस्कृत ग्रंथ *महानाटक सुधानिधि* एवं *ब्रह्मसूत्र* पर भाष्य लिखा।
* मल्लिकार्जुन को **प्रौढ़ देवराय** भी कहा जाता था।
* सालुव नरसिंह ने विजयनगर में दूसरे राजवंश **सालुव वंश (1485–1506 ई.)** की स्थापना की।
* **तुलुव वंश (1505–1565 ई.)** की स्थापना वीर नरसिंह ने की थी।
* तुलुव वंश का महान शासक **कृष्णदेव राय** था। वह **8 अगस्त, 1509 ई.** को शासक बना। सालुव तिम्मा कृष्णदेवराय का योग्य मंत्री एवं सेनापति था। बाबर ने अपनी आत्मकथा *बाबरनामा* में कृष्णदेव राय को भारत का सर्वाधिक शक्तिशाली शासक बताया।
* कृष्णदेव राय के शासनकाल में पुर्तगाली यात्री **डोमिंगोस पायस** विजयनगर आया था। कृष्णदेव राय ने पुर्तगालियों को भटकल में किला बनाने की अनुमति दी थी।
* कृष्णदेव राय के दरबार में तेलुगू साहित्य के आठ सर्वश्रेष्ठ कवि रहते थे, जिन्हें **अष्ट दिग्गज** कहा जाता था। अष्टदिग्गज तेलुगू कवियों में अल्लसनि पेद्दन सर्वप्रमुख था जो संस्कृत एवं तेलुगू दोनों भाषाओं का विद्वान था। इसे तेलुगू कविता का पितामह व आन्ध्र कविता का पितामह की उपाधि प्राप्त थी। उसके शासनकाल को तेलुगू साहित्य का 'क्लासिक युग' कहा गया है।
* कृष्णदेव राय ने तेलुगू में **अमुक्तमाल्यद्** एवं संस्कृत में **जाम्बवती कल्याणम्** और **उषा परिणय** की रचना की।
* विजयनगर साम्राज्य में नंदिनागरी लिपि का प्रयोग होता था।
* नागलपुर नामक नये नगर, हजारा राम एवं विट्ठलस्वामी मंदिर का निर्माण कृष्णदेव राय ने करवाया था। इसके अतिरिक्त कृष्णदेवराय ने चिदम्बरम मंदिर, थिरुवरुर में पार्वती का मंदिर एवं काँचीपुरम में वरदराज एवं एकम्बरनाथ मंदिर का निर्माण करवाया। कृष्णदेव राय की मृत्यु 1529 ई. में हो गयी। कृष्णदेव राय ने **आन्ध्रभोज, अभिनव भोज, आन्ध्र पितामह** आदि उपाधि धारण की थी।
* तुलुव वंश का अन्तिम शासक **सदाशिव** था।
* **राक्षसी-तंगड़ी या तालिकोटा या बन्नीहट्टी का युद्ध 23 जनवरी, 1565 ई.** में हुआ। इसी युद्ध के कारण विजयनगर का पतन हुआ।
* विजयनगर के विरुद्ध बने दक्षिण राज्यों के संघ में शामिल था—**बीजापुर, अहमदनगर, गोलकुण्डा एवं बीदर**। इस संयुक्त मोर्चे का नेतृत्व अली आदिलशाह कर रहा था।
* तालिकोटा के युद्ध में विजयनगर का नेतृत्व **राम राय** कर रहा था।
* विजयनगर के राजाओं और बहमनी के सुल्तानों के हित तीन अलग-अलग क्षेत्रों में आपस में टकराते थे: तुंगभद्रा के दोआब में, कृष्णा-गोदावरी के कछार में और मराठवाड़ा प्रदेश में।
* तालिकोटा युद्ध के बाद सदाशिव ने तिरुमल के सहयोग से पेनुकोंडा को राजधानी बनाकर शासन करना प्रारंभ किया।
* विजयनगर के चौथे राजवंश **अरावीड़ू वंश (1570–1672 ई.)** की स्थापना तिरुमल ने सदाशिव को अपदस्थ कर पेनुकोंडा में किया। अरावीड़ू वंश का अंतिम शासक **रंग-III** था।
* अरावीड़ू शासक वेंकट-II के शासनकाल में ही वोडैयार ने 1612 ई. में मैसूर राज्य की स्थापना की थी।
### प्रशासनिक एवं सामाजिक व्यवस्था
* विजयनगर साम्राज्य की प्रशासनिक इकाई का क्रम (घटते हुए) इस प्रकार था—**प्रांत (मंडल) → कोट्टम या वलनाडू (जिला) → नाडु → मेलाग्राम (50 ग्राम का समूह) → ऊर (ग्राम)**।
* विजयनगर-कालीन सेनानायकों को **नायाक** कहा जाता था। वे नायाक वस्तुतः भू-सामंत थे, जिन्हें राजा वेतन के बदले अथवा उनकी अधीनस्थ सेना के रख-रखाव के लिए विशेष भू-खंड देता था जो **अमरम्** कहलाता था।
* **आयंगर व्यवस्था:** प्रशासन को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए प्रत्येक ग्राम को एक स्वतंत्र इकाई के रूप में संगठित किया गया था। इन ग्रामीण इकाइयों पर शासन हेतु बारह प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति की जाती थी, जिनको सामूहिक रूप से आयंगर कहा जाता था। ये अवैतनिक होते थे। इनकी सेवाओं के बदले सरकार इन्हें पूर्णतः लगानमुक्त व करमुक्त भूमि प्रदान करती थी। इनका पद आनुवंशिक होता था। वह इस पद को बेच या गिरवी रख सकता था। ग्राम-स्तर की कोई भी संपत्ति इन अधिकारियों की इजाजत के बगैर न तो बेची जा सकती थी और न ही दान में दी जा सकती थी।
#### विजयनगर आने वाले प्रमुख विदेशी यात्री
| यात्री | देश | काल | शासक |
|---|---|---|---|
| **निकॉलो कोंटी** | इटली | 1420 ई. | देवराय-I |
| **अब्दुर्रज्जाक** | फारस | 1442 ई. | देवराय-II |
| **नूनिज** | पुर्तगाल | 1535 ई. | अच्युत राय |
| **डोमिंग पायस** | पुर्तगाल | 1515 ई. | कृष्णदेव राय |
| **बारबोसा** | पुर्तगाल | 1515–16 ई. | कृष्णदेव राय |
* कर्णिक नामक आयंगर के पास जमीन के क्रय-विक्रय से संबंधित समस्त दस्तावेज होते थे।
* विजयनगर साम्राज्य की आय का सबसे बड़ा स्रोत लगान था। भू-राजस्व की दर उपज का 1/6वाँ भाग था।
* विवाह कर, वर एवं वधू दोनों से लिया जाता था। विधवा से विवाह करने वाले इस कर से मुक्त थे।
* **उंबलि:** ग्राम में विशेष सेवाओं के बदले दी जाने वाली लगानमुक्त भूमि की भू-धारण पद्धति थी।
* **रत्त कोडगे:** युद्ध में शौर्य का प्रदर्शन करनेवाले मृत लोगों के परिवार को दी गई भूमि को कहा जाता था।
* **कुट्टगि:** ब्राह्मण, मंदिर या बड़े भूस्वामी, जो स्वयं कृषि नहीं करते थे, किसानों को पट्टे पर भूमि दे देते थे, ऐसी भूमि को कुट्टगि कहा जाता था।
* वे कृषक मजदूर जो भूमि के क्रय-विक्रय के साथ ही हस्तांतरित हो जाते थे, **कुदि** कहलाते थे।
* युद्ध में वीरता दिखाने वाले पुरुषों के लिए **गंडपेेंद्र** नामक पैर में धारण करने वाले कड़े को सम्मान का प्रतीक माना जाता था।
* कृष्णदेव राय के दरबार में महिला अंगरक्षिकाओं का वर्णन मिलता है।
* विजयनगर का सैन्य विभाग **कदाचार** कहलाता था तथा इस विभाग का उच्च अधिकारी दण्डनायक या सेनापति होता था। टकसाल विभाग को **जोरीखाना** कहा जाता था।
* चेट्टियों की तरह व्यापार में निपुण दस्तकार वर्ग के लोगों को **वीर पंजाल** कहा जाता था।
* उत्तर भारत से दक्षिण भारत में आकर बसे लोगों को **बड़वा** कहा जाता था।
* विजयनगर में दास-प्रथा प्रचलित थी। मनुष्यों के क्रय-विक्रय को **बेस-वग** कहा जाता था। पर्दा प्रथा का प्रचलन नहीं था, परंतु सती प्रथा (ऐच्छिक) विद्यमान थी। बाल-विवाह सामान्य प्रथा थी।
* मंदिरों में रहनेवाली स्त्रियों को **देवदासी** कहा जाता था। इनको
आजीविका के लिए भूमि या नियमित वेतन दिया जाता था।
* विजयनगर के मंदिर स्थापत्य की एक प्रमुख विशेषता **कल्याण मंडप** एवं हजार स्तंभों वाले गोपुरम का निर्माण था। कल्याण मंडप में देवता का विवाह समारोह मनाया जाता था। मंदिर के साथ देवता की पत्नी हेतु अम्मान मंदिर का भी निर्माण होता था।
* तिरुपति मंदिर में कृष्णदेवराय एवं उसकी पत्नियों तिरूमल एवं चिंता देवी तथा वेंकट प्रथम आदि की मूर्तियाँ हैं।
* **महानवमी** का त्योहार विजयनगर का प्रमुख राज्योत्सव था। यह उत्सव देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए था।
* विजयनगर काल की कन्नड़ कृतियों में भीमक द्वारा रचित **वासवपुराण** अत्यंत प्रसिद्ध लिंगायत धर्मग्रंथ है।
* **मदुरा विजयम्**, बुक्का प्रथम के पुत्र कुमार कंपन की पत्नी गंगादेवी की रचना है।
* कृष्णदेव राय और रामराय एक अच्छे संगीतज्ञ थे। लक्ष्मी नारायण कृष्णदेव राय का दरबारी संगीतकार था। उसने *संगीत सूर्योदय* नामक पुस्तक की रचना की।
* संत विधरण्य ने संगीत ग्रंथ *संगीतसार* की रचना की।
* **वीणा** विजयनगर साम्राज्य का सर्वाधिक प्रसिद्ध और लोकप्रिय संगीतवाद्य था।
* विजयनगर की चित्रकला, **लेपाक्षी कला** के नाम से जानी जाती है। इस चित्रकला के विषय रामायण एवं महाभारत से लिए गए हैं। विजयनगर में नृत्य और संगीत को मिलाकर एक शैली विकसित हुई जो **यक्षगान** शैली के नाम से जानी जाती है।
* विजयनगर का सर्वाधिक प्रसिद्ध सिक्का स्वर्ण का **वाराह** था। इसका वजन 52 ग्रेन था जिसे विदेशी यात्रियों ने हूण, परदौस या पगोड़ा के रूप में उल्लेखित किया है। सोने के छोटे सिक्कों को **प्रताप** तथा **फणम्** कहा जाता था। प्रताप 26 ग्रेन का तथा फणम् 5.5 ग्रेन का होता था। चाँदी के छोटे सिक्कों को **तार** कहा जाता था। विजयनगर के पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में **क्रूजेडो** (*पुर्तगाली*), **दीनार** (*फारसी*), **फ्लोरीन** और **डुकेट** (*इटली*) मुद्राएँ प्रचलित थीं।
### 32. बहमनी राज्य
* मोहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में **1347 ई.** में हसनगंगू ने बहमनी राज्य की स्थापना की। वह **अलाउद्दीन हसन बहमन शाह** के नाम से सिंहासन पर बैठा और **गुलबर्गा** को अपनी राजधानी बनाया। इसकी राजभाषा **मराठी** थी।
* इसने अपने साम्राज्य को चार प्रांतों में—गुलबर्गा, दौलताबाद, बरार एवं बीदर में बाँटा।
* इसकी मृत्यु 11 फरवरी, 1358 ई. को हो गयी।
* अलाउद्दीन हसन के पश्चात उसका पुत्र **मुहम्मदशाह प्रथम** सुल्तान बना। इसके काल में ही सबसे पहले बारूद का प्रयोग (*बुक्का के विरुद्ध*) हुआ।
* भीमा नदी के तट पर **फिरोजाबाद** की स्थापना ताज-उद्दीन-फिरोज ने की थी। फिरोज खगोलिकी को प्रोत्साहन देता था और उसने दौलताबाद के पास एक वेधशाला बनवाई थी। फिरिश्ता के अनुसार फिरोज फारसी, अरबी और तुर्की के अतिरिक्त तेलुगू, कन्नड़ और मराठी भाषा का भी ज्ञाता था।
* फिरोजशाह बहमनी का सबसे बड़ा कार्य प्रशासन में बड़े स्तर पर हिन्दुओं को सम्मिलित करना था। चौल और दभोल इसके समय के प्रमुख बन्दरगाह थे।
#### पार्श्व तालिका 1: बहमनी वंश के प्रमुख शासक
| शासक | शासन काल |
|---|---|
| **मुहम्मद शाह-I** | 1358–1375 ई. |
| **अलाउद्दीन मुजाहिद शाह** | 1375–1378 ई. |
| **दाऊद-I** | 1378 ई. |
| **मुहम्मद शाह-II** | 1378–1397 ई. |
| **ताज-उद्दीन-फिरोज** | 1397–1422 ई. |
| **शिहाबुद्दीन अहमद-I** | 1422–1436 ई. |
| **अलाउद्दीन अहमद-II** | 1436–1458 ई. |
| **शम्सुद्दीन मुहम्मद-III** | 1463–1482 ई. |
#### पार्श्व तालिका 2: प्रांतपति (तरफदार) के विशेष विरुद्ध
| प्रांत (तरफ) | विशेष विरुद्ध |
|---|---|
| **दौलताबाद** | मसनद-ए-आली |
| **बरार** | मजलिस-ए-आली |
| **बीदर** | अजाम-ए-हुमायूँ |
| **गुलबर्गा** | मालिक नायब |
* शिहाबुद्दीन अहमद प्रथम ने अपनी राजधानी गुलबर्गा से हटाकर **बीदर** में स्थापित की। इसने बीदर का नया नाम **मुहम्मदावाद** रखा।
* मुहम्मद-III के शासनकाल में 'ख्वाजा जहाँ' की उपाधि से **महमुद गवाँ** (*ईरानी*) को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। मुहम्मद III के आदेश पर 1482 में 70 वर्ष की अवस्था में महमुद गवाँ को फाँसी दे दी गई।
* महमूद गवाँ ने बीदर में एक महाविद्यालय (*मदरसा*) की स्थापना कराई। इसका भवन तीनमंजिला था। इसमें एक हजार अध्यापक और विद्यार्थी रह सकते थे। उन्हें भोजन और कपड़ा भी राज्य की ओर से मुफ्त दिया जाता था। *रियाजुल इन्शा* नाम से महमूद गवाँ के पत्रों का संग्रह किया गया।
* **1470 ई.** में रूसी यात्री **निकितन** बहमनी साम्राज्य (*बीदर*) की यात्रा पर आया। इस समय बहमनी राज्य पर मुहम्मद-III का शासन था।
* बीजापुर गुलबर्गा तरफ (*सबसे महत्वपूर्ण*) में शामिल था।
* कलीमुल्लाह बहमनी वंश का अंतिम शासक था। इसकी मृत्यु के समय बहमनी राज्य पाँच स्वतंत्र राज्यों में बँट गया।
#### स्वतंत्र राज्यों से संबंधित विवरण
| क्र. | राज्य | वंश | संस्थापक | स्थापना वर्ष |
|---|---|---|---|---|
| 1. | **बीजापुर** | आदिलशाही | युसुफ आदिल शाह | 1489 ई. |
| 2. | **अहमदनगर** | निजामशाही | मलिक अहमद | 1490 ई. |
| 3. | **बरार** | इमादशाही | फतेहउल्लाह इमादशाह | 1490 ई. |
| 4. | **गोलकुण्डा** | कुतुबशाही | कुलीकुतुबशाह | 1512 ई. |
| 5. | **बीदर** | बरीदशाही | अमीर अली बरीद | 1526 ई. |
* मुहम्मद-I के मंत्री सैफुद्दीन गोरी ने केंद्रीय शासन का कार्य कई विभागों में बाँटा और आठ मंत्रियों को नियुक्त किया, जो इस प्रकार थे—
#### मंत्री एवं विभाग
| मंत्री | विभाग |
|---|---|
| **वकील-ए-सल्तनत** | दिल्ली के मलिक नायब के समान। |
| **वकील-ए-कुल** | मंत्रियों के कार्यों का निरीक्षण (*वकील को छोड़कर*)। |
| **अमीर-ए-जुमला** | अर्थ विभाग का अध्यक्ष। |
| **वज़ीर-ए-अशरफ** | विदेश नीति एवं दरबार संबंधी कार्यों का निष्पादन। |
| **नाजिर** | वह अर्थ विभाग से संबंधित था। |
| **पेशवा** | वकील-ए-सल्तनत का सहायक था। |
| **कोतवाल** | नगर का मुख्य पुलिस अधिकारी था। |
| **सद्रे-ए-जहाँ** | न्याय विभाग, धर्म तथा दान विभाग का अध्यक्ष। |
* सुल्तान के महल तथा दरबार की सुरक्षा के लिए विशेष अंगरक्षक सैनिक दल था, जिसे **साख-ए-खेल** कहा जाता था। यह चार भागों में नौबत में विभाजित थे, जिसके मुख्य अधिकारी **सर-ए-नौबत** होता था।
* बीजापुर के शासक अली आदिलशाह को सूफी कहते थे। अकबर से पहले उसने अपने दरबार में कैथोलिक मिशनरियों को बुलाया था। उसने अपने पुस्तकालय का अध्यक्ष प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान वामन पंडित को बनाया था। उसके उत्तराधिकारियों ने संस्कृत एवं मराठी भाषा को प्रश्रय देना जारी रखा।
* इब्राहिम आदिलशाह द्वितीय को **अबला बाबा** या **गरीबों का दोस्त** कहा जाता था। उसने *किताब-ए-नौरस* नाम की एक पुस्तक की रचना की जिसमें गीतों को विभिन्न रागों में बाँधकर प्रस्तुत किया गया था। उसने **नौरसपुर** नाम से एक नई राजधानी बनाई। अपने व्यापक दृष्टिकोण के कारण वह **जगद् गुरु** कहलाता था। उसने विठोबा की उपासना के केन्द्र पंढरपुर को भी अनुदान दिए।
* मुहम्मद कुली कुतुबशाह ने **1591-92 ई.** में हैदराबाद के बीच में **चार मीनार** बनवाई। इसमें चारों दिशाओं में चार ऊँचे मेहराव हैं जो चौमंजिली है और जिनमें से प्रत्येक की ऊँचाई 48 मी. है। हैदराबाद शहर को कुली कुतुब शाह ने ही बसाया था।
* इब्राहिम रौज़ा व गोल गुंबज बीजापुरी इमारतों में
सबसे प्रसिद्ध हैं।
* इब्राहिम रौज़ा इब्राहिम आदिल शाह का मकबरा है।
* **1680 में बनाए गए गोल गुंबज** का गुंबद इतना विशाल है जितना विशाल एकल गुंबद कभी नहीं बनाया गया। इसके सभी अनुपात संगतिपूर्ण हैं। चारों कोनों पर बनी ऊँची और गोलाकार मीनारें इसकी छवि को एक संतुलन प्रदान करती हैं। कहा जाता है—मुख्य कक्ष के एक ओर से फुसफुसाहट की आवाज जाए तो उसे दूसरे छोर पर भी सुना जा सकता है।
### 33. स्वतंत्र प्रान्तीय राज्य
#### जौनपुर
* जौनपुर की स्थापना **फिरोजशाह तुगलक** ने अपने भाई जूना खाँ या **मुहम्मद बिन तुगलक** की स्मृति में की थी। जौनपुर में स्वतंत्र शर्की राजवंश की स्थापना **मलिक सरवर (ख्वाजा जहान)** ने की थी।
* ख्वाजा जहान को **मलिक-उस-शर्क (पूर्व का स्वामी)** की उपाधि 1394 ई. में फिरोजशाह तुगलक के पुत्र सुल्तान महमूद ने दी थी।
* जौनपुर के अन्य प्रमुख शासक थे: मुबारकशाह (1399-1402 ई.), शम्सुद्दीन इब्राहिमशाह (1402-1436 ई.), महमूद शाह (1436-51 ई.) एवं अंतिम शासक हुसैनशाह (1458-1500 ई.)।
* लगभग **75 वर्ष** तक स्वतंत्र रहने के बाद जौनपुर पर **बहलोल लोदी** ने कब्जा कर लिया।
* शर्की शासन के अन्तर्गत, विशेषकर इब्राहिमशाह के समय में जौनपुर में साहित्य एवं स्थापत्यकला के क्षेत्र में हुए विकास के कारण जौनपुर को **भारत के सिराज** के नाम से जाना गया।
* **अटालादेवी की मस्जिद** का निर्माण 1408 ई. में शर्की सुल्तान इब्राहिम शाह द्वारा किया गया था।
* अटाला देवी मस्जिद का निर्माण कन्नौज के राजा विजयचन्द्र द्वारा निर्मित अटाला देवी के मंदिर को तोड़कर किया गया था।
* **जामा मस्जिद** का निर्माण 1470 ई. में हुसैनशाह शर्की के द्वारा किया गया था। पीर बोधन नामक सूफी संत इस काल का एक महान संगीतकार था।
* **झँझरी मस्जिद** 1430 ई. में इब्राहिम शर्की के द्वारा व **लाल दरवाजा मस्जिद** का निर्माण मुहम्मदशाह के द्वारा 1450 ई. में किया गया था।
#### कश्मीर
* **सुहादेव** नामक एक हिन्दू ने 1301 ई. में कश्मीर में हिन्दू राज्य की स्थापना की थी।
* 1339-40 ई. में कश्मीर में **शाहमीर** के द्वारा प्रथम मुस्लिम वंश की स्थापना की गयी। कश्मीर का प्रथम मुस्लिम शासक शाहमीर था, जो **शम्सुद्दीन शाह मीर** के नाम से गद्दी पर बैठा।
* इसने अपनी राजधानी **इन्द्रकोट** में स्थापित की।
* अलाउद्दीन ने राजधानी इन्द्रकोट से हटाकर अलाउद्दीनपुर (श्रीनगर) में स्थापित की।
* हिन्दू मंदिरों एवं मूर्तियों को तोड़ने के कारण सुल्तान सिकन्दर शाह (1389–1413) को **बुतशिकन** कहा गया।
* 1420 ई. में **जैन-उल-आबदीन** सिंहासन पर बैठा। इसकी धार्मिक सहिष्णुता के कारण इसे **'कश्मीर का अकबर'** कहा गया। इसने जजिया हटा दिया, गो वध निषिद्ध कर दिया तथा सती प्रथा पर से प्रतिबंध हटा दिया। जैन-उल-आबदीन के प्रशासन में अनेक हिन्दुओं को ऊँचे पद प्राप्त थे। श्रीय भट्ट उसका न्याय मंत्री और दरबारी चिकित्सक था। वूलर झील स्थित **जैना लंका** इसके काल की अभियान्त्रिकी उन्नति का उत्कृष्ट नमूना है।
* जैन-उल-आबदीन **फारसी, संस्कृत, कश्मीरी, तिब्बती** आदि भाषाओं का ज्ञाता था। इसने **महाभारत एवं राजतरंगिणी** को फारसी में अनुवाद करवाया।
#### बंगाल
* इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने बंगाल को दिल्ली सल्तनत में मिलाया।
* गयासुद्दीन तुगलक ने बंगाल को तीन भागों में विभाजित किया—**लखनौती (उ. बंगाल), सोनार गाँव (पू. बंगाल) एवं सतगाँव (द. बंगाल)**।
* 1345 ई. में हाजी इलियास बंगाल के विभाजन को समाप्त कर **शम्सुद्दीन इलियास शाह** के नाम से बंगाल का शासक बना।
* पांडुआ में **अदीना मस्जिद** का निर्माण 1364 ई. में सुल्तान सिकन्दर शाह ने करवाया था।
* बंगाल का शासक गयासुद्दीन आजमशाह (1389–1409 ई.) अपनी न्यायप्रियता के लिए प्रसिद्ध था।
* **अलाउद्दीन हुसैन शाह (1493–1518 ई.)** ने राजधानी को पांडुआ से गौड़ स्थानान्तरित किया।
* महाप्रभु चैतन्य अलाउद्दीन के समकालीन थे। अलाउद्दीन ने सत्यपीर नामक आंदोलन की शुरुआत की।
* मालाधर वसु ने अलाउद्दीन के शासनकाल में ही **श्रीकृष्ण विजय** की रचना कर **गुणराजखान** की उपाधि धारण की। इनके बेटे को **सत्यराजखान** की उपाधि दी गई।
* नासिरुद्दीन नुसरात शाह ने गौड़ में **बड़ासोना** एवं **कदम रसूल** मस्जिद का निर्माण करवाया।
#### मालवा
* **दिलावर खाँ** ने 1401 ई. में मालवा को स्वतंत्र घोषित किया।
* दिलावर का पुत्र अल्प खाँ, **हुशंगशाह** की उपाधि धारण कर 1405 ई. में मालवा का शासक बना। इसने अपनी राजधानी को धारा से **मांडू** स्थानान्तरित किया।
* मालवा में खिलजी वंश की स्थापना **महमूद शाह** ने की।
* गुजरात के शासक बहादुरशाह ने महमूद शाह II को युद्ध में परास्त कर उसकी हत्या कर दी और मालवा को गुजरात में मिला लिया।
* मांडू के किले, **हिंडोला भवन** या **दरबार हॉल** का निर्माण हुशंगशाह ने करवाया था। इस किले में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है—**दिल्ली दरवाजा**।
* बाजबहादुर एवं रूपमती का महल का निर्माण **सुल्तान नासिरुद्दीन शाह** द्वारा करवाया गया था। **जहाजमहल** का निर्माण गयासुद्दीन खिलजी ने मांडू में करवाया था। **कुश्कमहल** को महमूद खिलजी ने फतेहाबाद नामक स्थान पर बनवाया था।
#### गुजरात
* गुजरात के शासक राजाकर्ण को पराजित कर अलाउद्दीन ने 1297 ई. में इसे दिल्ली-सल्तनत में मिला लिया था।
* 1391 ई. में मुहम्मदशाह तुगलक द्वारा नियुक्त गुजरात का सूबेदार ज़फर खाँ ने **'सुल्तान मुजफ्फरशाह'** की उपाधि ग्रहण कर 1407 ई. में गुजरात का स्वतंत्र सुल्तान बना।
* गुजरात के प्रमुख शासक थे: **अहमदशाह (1411–52 ई.), महमूदशाह बेगड़ा (1458–1511 ई.) और बहादुर शाह (1526–1537 ई.)**।
* अहमदशाह ने असावल के निकट साबरमती नदी के किनारे **अहमदाबाद** नामक नगर बसाया और पाटन से राजधानी हटाकर अहमदाबाद को राजधानी बनाया।
* गुजरात का सबसे प्रसिद्ध शासक **महमूद बेगड़ा** था।
* महमूद बेगड़ा ने गिरनार के निकट **मुस्तफाबाद** नामक नगर और चंपानेर के निकट **मुहम्मदाबाद** नगर बसाया। महमूद बेगड़ा सुल्तान सिकन्दर लोदी का समकालीन तथा उसका मित्र था। इसके शासन काल में पहली बार दिल्ली के शासक (सिकन्दर लोदी) ने गुजरात के शासक (बेगड़ा) को उपहार भेजे।
* बारबोसा ने महमूद बेगड़ा को **विष पुरुष** कहा है।
* बार्थोमा ने बेगड़ा के विषय में लिखा है कि उसकी मूँछ इतनी लं
बी थी कि वह उन्हें अपने सिर के पीछे बांधता था।
* **उदयराज** बेगड़ा का दरबारी कवि था जिसने सुल्तान की प्रशंसा में **महमूद चरित** नामक पुस्तक लिखी।
* एक ब्राह्मण **मलिक गोपी** बेगड़ा का मुख्यमंत्री था।
* हुमायूँ से हार के बाद बहादुरशाह ने **दीव** को पुर्तगालियों को सौंप दिया।
* बहादुर शाह संगीत प्रेमी था, उसने संगीतज्ञ **मंझू कलावंत** को संरक्षण प्रदान किया।
> **नोट:** *1611 में सिकंदर बिन मुहम्मद मंझू द्वारा लिखी मिरात-ए-सिकंदरी, गुजरात के इतिहास को ज़फर खान (मुजफ्फर शाह I) द्वारा मुस्लिम विजय से मुजफ्फरशाह III (1591) की मृत्यु और गुजरात में बाद की घटनाओं तक वर्णन देता है। यह पुस्तक गुजरात के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन का लेखा-जोखा है।*
>
### मेवाड़
* अलाउद्दीन खिलजी ने **1303 ई.** में मेवाड़ के गुहिलौत राजवंश के **रत्नसिंह** को पराजित कर मेवाड़ को दिल्ली सल्तनत में मिला लिया।
* गुहिलौत वंश की एक शाखा सिसोदिया वंश के **हम्मीरदेव** ने मुहम्मद तुगलक को हराकर पूरे मेवाड़ को स्वतंत्र करा लिया।
* **राणा कुम्भा** ने **1448 ई.** में चित्तौड़ में एक **विजय-स्तंभ** की स्थापना की।
* **खानवा का युद्ध 1527 ई.** में **राणा सांगा एवं बाबर** के बीच हुआ, जिसमें **बाबर विजयी** हुआ।
* **1576 ई.** में **हल्दीघाटी का युद्ध राणा प्रताप एवं अकबर** के बीच हुआ, जिसमें **अकबर विजयी** हुआ।
* मेवाड़ की राजधानी **चित्तौड़गढ़** थी। जहाँगीर ने मेवाड़ को मुगल साम्राज्य में मिला लिया।
### खानदेश
* तुगलक वंश के पतन के समय फिरोजशाह तुगलक के सूबेदार **मलिक अहमद राजा फारुकी** ने नर्मदा एवं ताप्ती नदियों के बीच **1382 ई.** में खानदेश की स्थापना की।
* खानदेश की राजधानी **बुरहानपुर** थी। इसका सैनिक मुख्यालय **असीरगढ़** था। **1601 में अकबर** ने खानदेश को मुगल साम्राज्य में मिला लिया।
### 34. सूफी आन्दोलन
* **अबू हाशिम** ने सबसे पहले 'सूफी' शब्द का प्रयोग किया था।
* जो लोग सूफी संतों से शिष्यता ग्रहण करते थे, उन्हें **मूरीद** कहा जाता था। सूफी जिन आश्रमों में निवास करते थे, उन्हें **खानकाह या मठ** कहा जाता था।
* सूफियों के धर्मसंघ **बा-शारा** (*इस्लामी सिद्धान्त के समर्थक*) और **बे-शारा** (*इस्लामी सिद्धान्त से बँधे नहीं*) में विभाजित थे।
* भारत में **चिश्ती एवं सुहरावर्दी** सिलसिले की जड़ें काफी गहरी थीं।
* **ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती** ने भारत में चिश्ती सिलसिला की शुरुआत की। चिश्ती सिलसिला का मुख्य केन्द्र **अजमेर** था।
* चिश्ती सिलसिला के कुछ अन्य महत्वपूर्ण संत थे—**निजामुद्दीन औलिया, बाबा फरीद, बख्तियार काकी एवं शेख बुरहानुद्दीन गरीब**। बाबा फरीद बख्तियार काकी के शिष्य थे।
* बाबा फरीद की रचनाएँ **गुरुग्रंथ साहिब** में शामिल हैं।
* बाबा फरीद के दो महत्वपूर्ण शिष्य थे—**निजामुद्दीन औलिया एवं अलाउद्दीन साबिर**।
* **हज़रत निजामुद्दीन औलिया** ने अपने जीवनकाल में दिल्ली के **सात सुल्तानों का शासन** देखा था। इनके प्रमुख शिष्य थे—**शेख सलीम चिश्ती, अमीर खुसरो, अमीर हसन देहलवी**।
* **शेख बुरहानुद्दीन गरीब** ने **1340 ई.** में दक्षिण भारत के क्षेत्रों में चिश्ती सम्प्रदाय की शुरुआत की और **दौलताबाद** को मुख्य केन्द्र बनाया।
* सूफियों के सुहरावर्दी धर्मसंघ या सिलसिला की स्थापना **शेख शिहाबुद्दीन उमर सुहरावर्दी** ने की, किन्तु **1262 ई.** में इसके सुदृढ़ संचालन का श्रेय **शेख बदरुद्दीन जकारिया** को है। इन्होंने सिंध एवं मुल्तान को मुख्य केन्द्र बनाया। सुहरावर्दी धर्मसंघ के अन्य प्रमुख संत थे—**जलालुद्दीन तबरीजी, सैयद सुर्ख जोश, बुरहान आदि**। सुहरावर्दी सिलसिला ने राज्य के संरक्षण को स्वीकार किया था।
* **शेख अब्दुल्ला सत्तारी** ने **सत्तारी सिलसिले** की स्थापना की थी। इसका मुख्य केन्द्र **बिहार** था।
* **कादरी धर्मसंघ या सिलसिला** की स्थापना **सैयद अब्दुल कादिर अल गिलानी** ने बगदाद में की थी। भारत में इस सिलसिला के प्रवर्तक **मोहम्मद गौस** थे। इस सिलसिले के अनुयायी गाने-बजाने के विरोधी थे। ये लोग शिया मत के विरुद्ध थे।
* **राजकुमार दारा** (शाहजहाँ का ज्येष्ठ पुत्र) कादरी सिलसिला के **मुल्लाशाह** का शिष्य था।
* **नकशबंदी धर्मसंघ या सिलसिला** की स्थापना **ख्वाजा उबेदुल्ला** ने की थी। भारत में इस सिलसिला की स्थापना **ख्वाजा बाकी बिल्लाह** ने की थी। भारत में इसके व्यापक प्रचार का श्रेय बाकी बिल्लाह के शिष्य अकबर के समकालीन **'शेख अहमद सरहिंदी'** को था।
* **फिरदौसी**, सुहरावर्दी सिलसिला की ही एक शाखा थी, जिसका कार्य-क्षेत्र **बिहार** था। इस सिलसिले को **शेख शरीफुद्दीन याह्या** ने लोकप्रिय बनाया। याह्या ख्वाजा निजामुद्दीन के शिष्य थे।
### 35. भक्ति आन्दोलन
* **छठी शताब्दी** में भक्ति आन्दोलन की शुरुआत **तमिल क्षेत्र** से हुई जो कर्नाटक और महाराष्ट्र में फैल गई।
* भक्ति आन्दोलन का विकास **बारह अलवार वैष्णव संतों** और **तिरसठ नयनार शैव संतों** ने किया। शैव नयनार और वैष्णव अलवार जैनियों और बौद्धों के अपरिग्रह को अस्वीकार कर ईश्वर के प्रति व्यक्तिगत भक्ति को ही मुक्ति का मार्ग बताते थे।
> **नोट:** *अलवार शब्द का अर्थ है अन्तर्ज्ञान रखने वाला वह व्यक्ति जो ईश्वरीय चिंतन में पूर्णतया विलीन हो गया हो।*
>
* अलवारों में एकमात्र महिला साध्वी **अंडाल** का नाम मिलता है, जिसके भक्ति गीतों में कृष्ण कथाएँ अधिक मिलती हैं।
* शैव संत **अप्पार** ने पल्लव राजा **महेंद्रवर्मन** को शैवधर्म स्वीकार कराया।
* भक्ति कवि-संतों को संत कहा जाता था और उनके दो समूह थे।
* **प्रथम समूह:** वैष्णव संत थे जो महाराष्ट्र में लोकप्रिय हुए। वे भगवान विठोबा के भक्त थे। विठोबा पंथ के संत और उनके अनुयायी **वरकरी** या तीर्थयात्री-पंथ कहलाते थे, क्योंकि हर वर्ष पंढरपुर की तीर्थयात्रा पर जाते थे।
* **दूसरा समूह:** पंजाब एवं राजस्थान के हिन्दी भाषी क्षेत्रों में सक्रिय था और इसकी **निर्गुण भक्ति** (हर विशेषता से परे भगवान की भक्ति) में आस्था थी।
* भक्ति आन्दोलन को दक्षिण भारत से उत्तर भारत में **रामानन्द** के द्वारा लाया गया।
* बंगाल में कृष्ण भक्ति की प्रारंभिक प्रतिपादकों में **विद्यापति ठाकुर और चंडीदास** थे।
* रामानंद की शिक्षा से दो सम्प्रदायों का प्रादुर्भाव हुआ, **सगुण** जो पुनर्जन्म में विश्वास रखता है और **निर्गुण** जो भगवान के निराकार रूप को पूजता है।
* **सगुण संप्रदाय** के सबसे प्रसिद्ध व्याख्याताओं में थे—**तुलसीदास और नाभादास** जैसे रामभक्त और **निम्बार्क, वल्लभाचार्य, चैतन्य, सूरदास और मीराबाई** जैसे कृष्णभक्त।
* **निर्गुण सम्प्रदाय** के सबसे प्रसिद्ध प्रतिनिधि थे **कबीर**, जिन्हें भावी उत्तर भारतीय पंथों का आध्यात्मिक गुरु माना गया है।
* शंकराचार्य के अद्वैतदर्शन के विरोध में दक्षिण में वैष्ण
व संतों द्वारा **चार मतों की स्थापना** की गयी थी।
#### दक्षिण में वैष्णव संतों द्वारा स्थापित चार मत
| सम्प्रदाय | आचार्य | मत |
|---|---|---|
| **श्री सम्प्रदाय** | रामानुजाचार्य | विशिष्टाद्वैतवाद |
| **ब्रह्म सम्प्रदाय** | मध्वाचार्य | द्वैतवाद |
| **रुद्र सम्प्रदाय** | विष्णुस्वामी | शुद्धाद्वैतवाद |
| **सनकादि सम्प्रदाय** | निम्बार्काचार्य | द्वैताद्वैतवाद |
### भक्ति आन्दोलन के सन्त
* **शंकराचार्य:** इनका जन्म 708 ई. में केरल के कलाडि नामक गाँव में हुआ। इनके पिता का नाम शिवगुरु एवं माता का नाम आर्याम्बा था। संन्यास की दीक्षा उन्होंने गोविंद योगी से ली। उन्होंने भारत के चार कोनों में पीठों की स्थापना की। [दक्षिण में श्रृंगेरी (*चिक्कमंगलुरु, कर्नाटक*), में शारदा पीठ; पूर्व में पूरी (*ओडिशा*), में गोवर्धन पीठ; उत्तर में, बद्रीनाथ (*चमोली, उत्तराखंड*), में ज्योतिष पीठ तथा पश्चिम में द्वारका (*जामनगर, गुजरात*), में शारदा पीठ/कालिका पीठ] चारों पीठों में सबसे पहले श्रृंगेरी पीठ की स्थापना हुई थी। शंकराचार्य की मृत्यु 820 ई. में हो गयी। शंकराचार्य ने बादरायण के ब्रह्मसूत्र के आधार पर अपने सिद्धांत का प्रतिपादन किया और अपने दर्शन, जो जीव-ब्रह्म की एकता के सिद्धांत पर आधारित हैं, को **अद्वैतवाद (एकत्ववाद)** का नाम दिया। यह वेदांत की सबसे पुरानी विचारधारा है। इस विचारधारा का मुख्य सिद्धांत **जीवनमुक्ति** है, अर्थात यह ऐसा विचार है कि इस जीवन में ही मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है। यह भारत के अन्य दर्शनों के विपरीत है। अन्य दर्शनों का मुख्य सिद्धांत विदेहमुक्त अर्थात मृत्यु उपरांत मोक्ष है। अद्वैत का लक्ष्य आत्मज्ञान प्राप्त करना और आत्मा एवं ब्रह्म की पहचान की पूर्ण समझ प्राप्त करना है। आत्मा और ब्रह्म के सही ज्ञान से सभी दोहरी प्रवृत्तियाँ समाप्त हो जाती हैं और अंततः मोक्ष प्राप्त होता है। यद्यपि शंकराचार्य शैव धर्म के अनुयायी थे तथापि उन्होंने पंचायतन पूजा का निरूपण किया जिसमें शिव, विष्णु, शक्ति, सूर्य एवं गणेश की पूजा का विधान था।
* **रामानुजाचार्य:** (11वीं शताब्दी) इन्होंने राम को अपना आराध्य माना। इनका जन्म 1017 ई. में मद्रास के निकट पेरूंबूर नामक स्थान पर हुआ था। 1137 ई. में इनकी मृत्यु हो गयी। रामानुज ने वेदांत में प्रशिक्षण अपने गुरु, कांचीपुरम के यादव प्रकाश से प्राप्त किया था। इनके अनुसार मोक्ष प्राप्ति का सर्वोत्तम साधन विष्णु के प्रति अनन्य भक्ति भाव रखना है। भगवान विष्णु की कृपा दृष्टि से भक्त उनके साथ एकाकार होने का परमानंद प्राप्त कर सकता है। रामानुज ने **विशिष्टाद्वैतवाद** के सिद्धांत का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार आत्मा परमात्मा से जुड़ने के बाद भी अपनी अलग सत्ता बनाए रखती है। इनके सिद्धांत ने भक्ति की नयी धारा को बहुत प्रेरित किया, जो परवर्ती काल में उत्तरी भारत में विकसित हुई। रामानुजाचार्य के अनुसार आत्मा व परमात्मा का संबंध चिंगारी व अग्नि के संबंध जैसा है। रामानुज के अनुयायियों को **वैष्णव** कहा जाता है।
#### शंकराचार्य व रामानुजाचार्य का दृष्टिकोण तुलनात्मक तालिका
| शंकराचार्य का दृष्टिकोण | रामानुज का दृष्टिकोण |
|---|---|
| इनके अनुसार **ब्रह्म निर्गुण** है। | इनके अनुसार **ब्रह्म के कुछ गुण भी होते हैं**। |
| इनके अनुसार **ज्ञान ही मुक्ति का मुख्य साधन** है। | इनके अनुसार **श्रद्धा तथा समर्पण का अभ्यास मुक्ति प्राप्ति का साधन** है। |
* **रामानंद (1368-1468):** रामानंद का जन्म प्रयाग में हुआ था। इनकी शिक्षा प्रयाग तथा वाराणसी में हुई। इन्होंने अपना सम्प्रदाय सभी जातियों के लिए खोल दिया। रामानुज की भाँति इन्होंने भी भक्ति को मोक्ष का एकमात्र साधन स्वीकार किया। इन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम राम एवं सीता की आराधना को समाज के समक्ष रखा। रामानंद के 12 शिष्यों में दो स्त्रियाँ **पद्मावती एवं सुरसरी** थीं। इनके प्रमुख शिष्य थे—**रैदास (चमार), कबीर (जुलाहा), धन्ना (जाट), सेना (नाई), पीपा (राजपूत), साधना (कसाई)**।
* **कबीर:** कबीर का जन्म 1440 ई. (*विवादास्पद*) में वाराणसी में एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से (*लोक श्रुतियों अनुसार*) हुआ था। लोक-लज्जा के भय से उसने नवजात शिशु को वाराणसी में लहरतारा के पास एक तालाब के समीप छोड़ दिया। जुलाहा नीरु तथा उसकी पत्नी नीमा इस नवजात शिशु को अपने घर ले आये। इस बालक का नाम कबीर रखा गया। कबीर की शादी लोई से हुई, उनके दो बच्चे हुए और उनकी जिंदगी आम गृहस्थ जैसी ही थी। इन्होंने राम, रहीम, हजरत, अल्लाह आदि को एक ही ईश्वर के अनेक रूप माने। इन्होंने जाति-प्रथा, धार्मिक कर्मकांड, वाह्य आडम्बर, मूर्तिपूजा, जप-तप, अवतारवाद आदि का घोर विरोध करते हुए एकेश्वरवाद में आस्था व्यक्त की एवं निराकार ब्रह्म की उपासना को महत्व दिया। निर्गुण भक्ति धारा से जुड़े कबीर ऐसे प्रथम भक्त थे, जिन्होंने संत होने के बाद भी पूर्णतः गृहस्थ जीवन का निर्वाह किया। इनके अनुयायी **'कबीरपंथी'** कहलाए। कबीर के उपदेश शब्द सिखों के आदिग्रंथ में संगृहीत हैं। कबीर की वाणी का संग्रह **'बीजक'** (*शिष्य धर्मदास द्वारा संकलित*) नाम से प्रसिद्ध है। बीजक में तीन भाग हैं—**रमैनी, सबद और साखी**। उनकी भाषा को **सधुक्कड़ी** कहा गया है। इसमें ब्रजभाषा, अवधी एवं राजस्थानी भाषा के शब्द पाये जाते हैं। कबीरदास की मृत्यु 1510 ई. में मगहर में हुई।
> **नोट:** *कबीर सुल्तान सिकंदर लोदी के समकालीन थे।*
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* **गुरु नानक:** गुरु नानक का जन्म 1469 ई. अविभाजित पंजाब के रावी नदी के तट पर स्थित तलवंडी नामक ग्राम में हुआ था, जो अब ननकाना साहिब के नाम से विख्यात है। उनकी माता का नाम तृप्ता देवी तथा पिता का नाम मेहता कालूराम था जो पटवारी थे। बटाला के मूलराज खत्री की बेटी, सुलक्षणी से उनका विवाह हुआ, जिससे उन्हें दो पुत्र और दो पुत्रियाँ हुई। उन्होंने देश का पाँच बार चक्कर लगाया, जिसे उदासीस कहा जाता है। उन्होंने कीर्तनों के माध्यम से उपदेश दिए। वे काव्य रचना करते थे और रवाब के संगीत के साथ गाया करते थे। सारंगी उनका स्वामी भक्त शिष्य भाई मर्दाना बजाया करता था। अपने जीवन के अंतिम क्षणों में उन्होंने रावी नदी के किनारे करतारपुर में अपना डेहरा (मठ) स्थापित किया। अपने जीवन काल में ही उन्होंने आध्यात्मिक आधार पर अपने पुत्रों की जगह, अपने शिष्य भाई लहना (अंगद) को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया। इनकी मृत्यु 1539 ई. में करतारपुर में हुई। नानक ने सिख धर्म की स्थापना की। नानक सूफी संत बाबा फरीद से प्रभावित थे।
* **चैतन्य स्वामी:** चैतन्य का जन्म 1486 ई. में नवदीप (*Navadvipa, बंगाल*) के मायापुर गाँव में हुआ था। इनके पिता का नाम जगन्नाथ मिश्र एवं माता का नाम शची देवी था। पाठशाला में चैतन्य को निमाई पंडित या गौरांग कहा जाता था। चैतन्य का वास्तविक नाम विश्वम्भर था। इन्होंने गोसाई संघ की स्थापना की और साथ ही संकीर्तन प्रथा (*गायन की कीर्तन शैली*) को जन्म दिया। 1510 ई. में केशव भारती नामक संन्यासी ने चैतन्य को संन्यास की दीक्षा दी। संन्यासी बनने के बाद बंगाल छोड़कर पूरी (*ओडिशा*) चले गये, जहाँ उन्होंने दो दशक तक भगवान जगन्नाथ की उपासना की। इसकी मृत्यु 1533 ई. में हो गयी। इनके दार्शनिक सिद्धांत को **अचिंत्य भेदाभेद वाद** के नाम से जाना जाता है। इस विचारधारा के बारे में माना जाता है कि यह मध्वाचार्य के कठोर द्वैत सिद्धांत और रामानुज के विशिष्ट अद्वैत का एकीकरण है। इस विचारधारा के अनुसार, सर्वोच्च भगवान और व्यक्तिगत आत्मा एक ही समय में, एक ओर भिन्न-भिन्न भी है। इस्काॅन (ISKCON) इसी दर्शन का अनुसरण करता है।
> **नोट:** *अचिंत्य भेदाभेदवाद विचारधारा के अनुयायी गौड़ीय वैष्णव हैं।*
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* **श्री वल्लभाचार्य:** श्री वल्लभाचार्य का जन्म 1479 ई. में चम्पारण्य (*वाराणसी*) में हुआ था। इनके पिता का नाम लक्ष्मण भट्ट तथा माता का नाम यल्ल मगारु था। इनका विवाह महालक्ष्मी के साथ हुआ। इनके दो पुत्र थे—गोपीनाथ (*जन्म 1511 ई.*) तथा विट्ठलनाथ (*जन्म 1516 ई.*)। इन्होंने गंगा-यमुना संगम के समीप अरेल नामक स्थान पर अपना निवास-स्थान बनाया। वल्लभाचार्य ने भक्तिसाधना पर विशेष जोर दिया। इन्होंने भक्ति को मोक्ष का साधन बताया। इनके अनुसार, आत्मा और परमात्मा भिन्न-भि
विचारधारा के अनुयायी **पुष्टिमार्ग** संप्रदाय से संबंधित हैं। इस मत के अनुयायियों की प्रार्थना में नाथद्वारा (राजस्थान) स्थित श्री नाथ जी मंदिर और आठ कवियों की रचनाएँ (**अष्टछाप**) मुख्य हैं। सूरदास वल्लभाचार्य के शिष्य थे।
> **नोट:** *विट्ठलनाथ को अकबर ने गोकुल और जैतपुरा की जागीर प्रदान की थी।*
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* **गोस्वामी तुलसीदास:** इनका जन्म उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले में राजापुर गाँव में 1532 ई. में हुआ था। इनके पिता का नाम आत्माराम दुबे एवं माता का नाम हुलसी था। इन्होंने *रामचरितमानस* की रचना की। इनकी मृत्यु 1623 ई. में हुई थी। तुलसीदास मुगल शासक अकबर एवं मेवाड़ के शासक राणाप्रताप के समकालीन थे।
* **धन्ना:** धन्ना का जन्म 1415 ई. में एक जाट परिवार में हुआ था। राजपुताना से बनारस आकर ये रामानंद के शिष्य बन गए। कहा जाता है कि इन्होंने भगवान की मूर्ति को हठात् भोजन कराया था।
* **मीराबाई:** मीराबाई का जन्म 1498 ई. में मेड़ता जिले के चौकारी (Chaukari) ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम रत्न सिंह राठौर था। इनका विवाह 1516 ई. में राणा सांगा के बड़े पुत्र और युवराज भोजराज से हुआ था। अपने पति के मृत्यु के उपरांत ये पूर्णतः धर्मपरायण जीवन व्यतीत करने लगीं। इन्होंने कृष्ण की उपासना प्रेमी एवं पति के रूप में की। इनके भक्ति गीत मुख्यतः ब्रजभाषा और आंशिक रूप से राजस्थानी में लिखे गये हैं तथा इनकी कुछ कविताएँ राजस्थानी में भी हैं। इनकी मृत्यु 1546 ई. में द्वारका में हो गयी। संत रविदास जी (रैदास) को मीराबाई का गुरु माना जाता था।
* **रैदास:** ये जाति से चमार थे और बनारस के रहने वाले थे। ये रामानंद के बारह शिष्यों में एक थे। इनके पिता का नाम रघु तथा माता का नाम घुरविनिया था। ये जूता बनाकर जीविकोपार्जन करते थे। इन्होंने **रायदासी सम्प्रदाय** की स्थापना की।
* **दादू दयाल:** ये कबीर के अनुयायी थे। इनका जन्म 1544 ई. में अहमदाबाद में हुआ था। इनका संबंध दुनिया जाति से था। साँभर में आकर इन्होंने **ब्रह्म सम्प्रदाय** की स्थापना की। अकबर ने धार्मिक चर्चा के लिए इन्हें एक बार फतेहपुर सीकरी बुलाया था। इन्होंने **'निपक्ष'** नामक आन्दोलन की शुरुआत की। इनकी मृत्यु 1603 ई. में हो गयी। सुन्दरदास (Sundaradasa) (1596-1689 ई.) दादू के शिष्य थे।
* **शंकरदेव (1449-1569 ई.):** इन्होंने भक्ति आन्दोलन का प्रचार प्रसार असम में किया। ये चैतन्य के समकालीन थे। इनका संदेश विष्णु या उनके अवतार कृष्ण के प्रति पूर्ण निष्काम भक्ति पर केन्द्रित था। ये अकेले कृष्ण मार्गी वैष्णव संत थे जो मूर्ति के रूप में कृष्ण की पूजा के विरोधी थे।
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