विश्व इतिहास 12
### विश्व इतिहास
#### 1. पुनर्जागरण
* **पुनर्जागरण का प्रारंभ इटली के फ्लोरेंस नगर से माना जाता है।**
* **इटली के महान कवि दांते (1260-1321 ई.) को पुनर्जागरण का अग्रदूत माना जाता है।** इनका जन्म फ्लोरेंस नगर में हुआ था।
* **दांते ने प्राचीन लैटिन भाषा को छोड़कर तत्कालीन इटली की बोल-चाल की भाषा 'टस्कन' में 'डिवाइन कॉमेडी' नामक काव्य लिखा।** इसमें दांते ने स्वर्ग और नरक की एक काल्पनिक यात्रा का वर्णन किया है।
* **दांते के बाद पुनर्जागरण की भावना को प्रश्रय देनेवाला दूसरा व्यक्ति पेट्रार्क (1304-1367 ई.) था।**
* **पेट्रार्क (इटली) को मानववाद का संस्थापक माना जाता है।**
* **इतालियन गद्य का जनक कहानीकार बोकेशियो (1313-1375 ई.) को माना जाता है।** इसकी प्रसिद्ध पुस्तक *डेकामेरॉन* है।
* **आधुनिक विश्व का प्रथम राजनीतिक चिंतक फ्लोरेंस निवासी मैकियावेली (1469-1567 ई.) को माना जाता है।** इसकी प्रसिद्ध पुस्तक है : *द प्रिंस*, जो राज्य का एक नवीन चित्र प्रस्तुत करती है।
* **आधुनिक राजनीतिक दर्शन का जनक मैकियावेली को कहा जाता है।**
* **पुनर्जागरण की भावना की पूर्ण अभिव्यक्ति इटली के तीन कलाकारों की कृतियों में मिलती है।** ये कलाकार थे— **लियोनार्डो द विंची, माइकल एंजेलो और राफेल।**
* **लियोनार्डो द विंची एक बहुमुखी प्रतिभासम्पन्न व्यक्ति था।** वह चित्रकार, मूर्तिकार, इंजीनियर, वैज्ञानिक, दार्शनिक, कवि व गायक था। वह *द लास्ट सफर* और *मोनालिसा* नामक अमर चित्रों के रचयिता होने के कारण प्रसिद्ध हैं।
* **माइकल एंजेलो भी एक अद्भुत मूर्तिकार एवं चित्रकार था।**
* ***द लास्ट जजमेंट* एवं *द फॉल ऑफ मैन* माइकल एंजेलो की कृतियाँ हैं।**
* **सिस्तान के गिरजाघर की छत में माइकल एंजेलो के द्वारा ही चित्र बनाये गये हैं।**
* **राफेल भी इटली का एक चित्रकार था, इसकी सर्वश्रेष्ठ कृति जीसस क्राइस्ट की माता 'मेडोन' का चित्र है।**
* **पुनर्जागरण काल में चित्रकला का जनक जिओटो को माना जाता है।**
* **पुनर्जागरण काल का सर्वश्रेष्ठ निबंधकार इंग्लैंड का फ्रांसिस बेकन था।**
* **हॉलैंड के इरासमस ने अपनी पुस्तक *द प्रेज ऑफ फॉली* में व्यंग्यात्मक ढंग से पादरियों के अनैतिक जीवन एवं ईसाई धर्म की कुरीतियों पर प्रहार किया है।**
* **इंग्लैंड के लेखक थॉमस मूर ने अपनी पुस्तक *यूटोपिया* में आदर्श समाज का चित्र प्रस्तुत किया है।**
* **मार्टिन लूथर ने जर्मन भाषा में बाइबिल का अनुवाद प्रस्तुत किया है।**
* ***'रोमियो एण्ड जूलियट'* शेक्सपीयर (इंग्लैंड) की अमर कृति है।**
* **इंग्लैंड के रोजर बेकन को आधुनिक प्रयोगात्मक विज्ञान का जन्मदाता माना जाता है।**
* **पृथ्वी सौरमंडल का केंद्र है : इसका खंडन सर्वप्रथम पोलैंड निवासी कॉपरनिकस ने किया।**
* **गैलीलियो (1564-1642 ई.) ने भी कॉपरनिकस के सिद्धान्त का समर्थन किया।**
* **जर्मनी के प्रसिद्ध वैज्ञानिक केपला या केपलर (1571-1630 ई.) ने गणित की सहायता से यह बतलाया कि ग्रह सूर्य के चारों ओर किस प्रकार घूमते हैं।**
* **न्यूटन (1642-1726 ई.) ने गु
रुत्वाकर्षण के नियम का पता लगाया।**
* **धर्म-सुधार आन्दोलन की शुरुआत 16वीं सदी में हुई।**
* **धर्म-सुधार आन्दोलन का प्रवर्तक मार्टिन लूथर था, जो जर्मनी का
रहनेवाला था।** इसने बाइबिल का अनुवाद जर्मन भाषा में किया।
महत्वपूर्ण तथ्य
धर्म-सुधार आन्दोलन की शुरुआत इंग्लैंड में हुई।
जॉन विकलिफ को धर्म-सुधार आन्दोलन का प्रातःकालीन तारा कहा जाता है। इसके अनुयायी लोलार्ड्स कहलाते थे।
अमेरिका की खोज क्रिस्टोफर कोलंबस ने की थी।
अमेरिगो वेस्पुसी (इटली) के नाम पर अमेरिका का नाम अमेरिका पड़ा।
प्रशान्त महासागर का नामकरण स्पेन निवासी मैगलन ने किया।
समुद्री मार्ग से सम्पूर्ण विश्व का चक्कर लगाने वाला प्रथम व्यक्ति मैगलन था।
संसार में सर्वप्रथम लिखित संविधान संयुक्त राज्य अमेरिका में 1789 ई. में लागू हुआ, जिसमें महिलाओं को सम्पत्ति का अधिकार मिला तथा उत्तराधिकार कानून को न्यायसंगत बनाया गया।
माँटेस्क्यू के शक्ति पृथक्करण सिद्धान्त को मान्यता मिली।
1781 ई. में उपनिवेशी सेना के सम्मुख आत्मसमर्पण करने वाला ब्रिटेन का सेनापति लॉर्ड कार्नवालिस था।
अमेरिका विश्व का पहला देश था, जिसने मनुष्यों की समानता तथा उसके मौलिक अधिकारों की घोषणा की।
अमेरिका में दासों के आयात को 1808 ई. में अवैध घोषित किया गया।
अब्राहम लिंकन अमेरिका के राष्ट्रपति 1860 ई. में हुए।
2. अमेरिका का स्वतंत्रता-संग्राम
अमेरिका में ब्रिटिश औपनिवेशिक साम्राज्य की नींव जेम्स प्रथम के शासनकाल में डाली गयी। अमेरिकी स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान इंग्लैंड का शासक जॉर्ज तृतीय था।
रेड इंडियन अमेरिका के मूल निवासी थे।
अमेरिका को पूर्ण स्वतंत्रता 4 जुलाई, 1776 ई. को मिली। अमेरिका स्वतंत्रता की घोषणा प्राकृतिक अधिकार (Natural Rights) के सिद्धान्तों पर आधारित थी।
अमेरिका का स्वतंत्रता-युद्ध 1783 ई. में पेरिस की संधि के तहत समाप्त हुआ। इस संधि के अनुसार ब्रिटेन ने उत्तरी अमेरिका के 13 अंग्रेजी उपनिवेशों की स्वतंत्रता स्वीकार कर ली।
अमेरिका के स्वतंत्रता संग्राम में लाफायते के नेतृत्व में फ्रांसीसी सेना ने इंग्लैंड के विरुद्ध भाग लिया था।
सप्तवर्षीय युद्ध में इंग्लैंड की काफी आर्थिक क्षति हुई थी। इसकी क्षतिपूर्ति हेतु तत्कालीन प्रधानमंत्री ग्रेनविले ने 1765 ई. में स्टाम्प एक्ट पारित किया।
1767 में ब्रिटिश संसद ने कागज, शीशा, चाय एवं रंग जैसी उपभोक्ता वस्तुओं पर भी कर लगाया।
उपनिवेशवासियों ने इन करों का व्यापक विरोध किया तथा सैमुअल एडम्स ने “प्रतिनिधित्व नहीं तो कर नहीं” का नारा दिया।
नोट: सप्तवर्षीय युद्ध इंग्लैंड व फ्रांस में 1756 से 1763 के बीच हुआ था।
स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान उपनिवेशवासियों ने “स्वाधीनता के पुत्र” एवं “स्वाधीनता की पुत्रियाँ” नामक संस्थाएँ बनाई, जो ब्रिटिश सरकार की कार्रवाइयों का विरोध करती थीं।
1776 में टॉमस पेन की लघु पुस्तिका कॉमनसेंस (Common Sense) प्रकाशित हुई।
अमेरिकी स्वतंत्रता-संग्राम का नायक जॉर्ज वाशिंगटन था, जो बाद में अमेरिका का प्रथम राष्ट्रपति बना।
अमेरिकी स्वतंत्रता-संग्राम का तात्कालिक कारण ‘बोस्टन की चाय पार्टी’ थी, जो 16 दिसम्बर, 1773 ई. को हुई थी। इस घटना का नायक सैमुअल एडम्स था।
5 सितम्बर, 1774 को 13 उपनिवेशों के प्रतिनिधियों की फिलाडेल्फिया में प्रथम महाद्वीपीय कांग्रेस आयोजित की गई।
4 जुलाई, 1776 ई. में फिलाडेल्फिया में दूसरा महाद्वीपीय सम्मेलन हुआ, जिसमें टॉमस जेफर्सन द्वारा तैयार किया गया स्वतंत्रता का घोषणा-पत्र जारी किया गया।
प्रजातंत्र की स्थापना सर्वप्रथम अमेरिका में हुई। इसे आधुनिक गणतंत्र की जननी कहा जाता है।
धर्मनिरपेक्ष राज्य की स्थापना भी सर्वप्रथम अमेरिका में हुई।
1789 ई. में अमेरिका में संविधान लागू हुआ।
अमेरिका में गृह-युद्ध की शुरुआत 12 अप्रैल, 1861 को दक्षिणी व उत्तरी राज्यों के बीच हुई।
गृह-युद्ध की शुरुआत दक्षिणी कैरोलिना राज्य से हुई।
1 जनवरी, 1863 को अब्राहम लिंकन ने दास-प्रथा का उन्मूलन किया।
“प्रजातंत्र जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए शासन है”—प्रजातंत्र की यह परिभाषा अब्राहम लिंकन ने दी।
अमेरिकी गृह-युद्ध की समाप्ति 26 मई, 1865 ई. को हुई।
अमेरिका फिलोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना बेंजामिन फ्रैंकलिन ने की थी।
3. फ्रांस की राज्यक्रांति
फ्रांस की राज्यक्रांति 1789 ई. में लुई सोलहवें के शासनकाल में हुई। इस समय फ्रांस में सामन्ती व्यवस्था थी।
14 जुलाई, 1789 को क्रांतिकारियों ने बास्तील के कारागार के फाटक को तोड़कर कैदियों को मुक्त कर दिया।
तब से 14 जुलाई को फ्रांस में ‘राष्ट्रीय दिवस’/स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है।
समानता, स्वतंत्रता और बन्धुत्व का नारा फ्रांस की राज्यक्रांति की देन है।
राष्ट्रवाद की पहली स्पष्ट अभिव्यक्ति फ्रांसीसी क्रांति के साथ हुई।
राजा की निरंकुशता एवं स्वेच्छाचारिता पर अंकुश लगाने के लिए फ्रांस में नेशनल असेम्बली की स्थापना की गई।
वर्साय के शीशमहल का निर्माण लुई चौदहवें ने करवाया था।
वर्साय को फ्रांस की राजधानी लुई चौदहवें ने बनाया था।
लुई सोलहवाँ 1774 ई. में फ्रांस की गद्दी पर बैठा।
लुई सोलहवें की पत्नी मेरी एंत्वानेत ऑस्ट्रिया की राजकुमारी थी।
राष्ट्र की समाधि वर्साय का भड़कीला राजदरबार था।
लुई सोलहवें को देशद्रोह के अपराध में फाँसी दी गई।
टैले (Taille) एक प्रकार का भूमि-कर था और टीथे (Tithe) एक प्रकार का धार्मिक कर था, जिसे चर्च को देना पड़ता था।
फ्रांसीसी क्रांति में वाल्टेयर, माँटेस्क्यू एवं रूसो ने सर्वाधिक योगदान किया।
रूसो फ्रांस में प्रजातंत्रात्मक शासन-पद्धति का समर्थक था।
“सौ चूहों की अपेक्षा एक सिंह का शासन उत्तम है” — यह उक्ति वाल्टेयर की है।
‘कानून की आत्मा’ (The Spirit of Laws) की रचना माँटेस्क्यू ने की थी।
इसमें सरकार के तीन अंग—कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका—को अलग-अलग रखने के विषय में शक्ति पृथक्करण सिद्धान्त का पोषण किया गया।
फ्रांस की क्रांति का सबसे महत्वपूर्ण नारा ‘समानता’ था।
18वीं शताब्दी में फ्रांसीसी समाज तीन एस्टेट्स में बँटा हुआ था—
1. प्रथम एस्टेट—पादरी (Clergy)
2. द्वितीय एस्टेट—अभिजात वर्ग (Nobility)
3. तृतीय एस्टेट—इसमें देश की लगभग 90% जनता थी।
तृतीय एस्टेट में व्यापारी, डॉक्टर, वकील, जज, अध्यापक, शिक्षक, लेखक, शिल्पी, किसान एवं मजदूर शामिल थे।
नोट: फ्रांस की राज्यक्रांति के समय फ्रांस की मुद्रा लिव्रे थी।
स्टेट्स जनरल के अधिवेशन की शुरुआत 5 मई, 1789 को हुई थी।
मीटर-लीटर की दशमलव प्रणाली फ्रांस की देन है।
सांस्कृतिक राष्ट्रीयता का जनक हर्डर को कहा जाता है।
नेपोलियन का जन्म 15 अगस्त, 1769 ई. को कोर्सिका द्वीप की राजधानी अजासियो में हुआ था।
नेपोलियन के पिता का नाम कार्लो बोनापार्ट था।
नेपोलियन ने ब्रिटेन की सैनिक अकादमी में शिक्षा प्राप्त की।
1796 में नेपोलियन ने इटली में ऑस्ट्रिया के प्रभाव को समाप्त किया।
फ्रांस में डायरेक्टरी के शासन का अन्त 1799 ई. में हुआ।
नेपोलियन 1799 ई. में प्रथम कॉन्सल बना और 1802 ई. में आजीवन कॉन्सल बना।
1804 ई. में नेपोलियन फ्रांस का सम्राट बना।
आधुनिक फ्रांस का निर्माता नेपोलियन को माना जाता है।
नेपोलियन ने इंग्लैंड को ‘बनियों का देश’ कहा था।
नेपोलियन ने अपनी पहली पत्नी जोजेफाइन को तलाक देकर ऑस्ट्रिया की राजकुमारी मेरी लुइसा से शादी की।
ट्राफलगर का युद्ध 21 अक्टूबर, 1805 ई. में इंग्लैंड एवं नेपोलियन के बीच हुआ।
नेपोलियन ने बैंक ऑफ फ्रांस की स्थापना 1800 ई. में की।
नेपोलियन ने कानूनों का संग्रह तैयार करवाया, जिसे नेपोलियन कोड कहा जाता है।
नेपोलियन को नील नदी के युद्ध में अंग्रेजी जहाजी बेड़े के नायक नेल्सन के हाथों पराजित होना पड़ा।
यूरोप के राष्ट्रों ने मिलकर 1813 ई. में नेपोलियन को लिपजिग नामक स्थान पर हरा दिया।
नेपोलियन को 18 जून, 1815 ई. को वाटरलू के युद्ध में पराजित कर बन्दी बना लिया गया।
नेपोलियन के पतन का कारण उसका रूस पर आक्रमण करना था।
इंग्लैंड के वाणिज्य एवं व्यापार का बहिष्कार करने के लिए नेपोलियन ने महाद्वीपीय व्यवस्था का सूत्रपात किया।
वियना कांग्रेस समझौते के तहत यूरोप के राष्ट्रों ने 1815 ई. में फ्रांस के प्रभुत्व को समाप्त किया
फ्रांस की राज्यक्रांति — आगे
‘कानून की आत्मा’ (The Spirit of Laws) की रचना माँटेस्क्यू ने की थी।
फ्रांस की क्रांति का सबसे महत्वपूर्ण नारा ‘समानता’ था। स्वतंत्रता एवं बन्धुत्व भी क्रांति का नारा था।
18वीं शताब्दी में फ्रांसीसी समाज तीन एस्टेट्स में बँटा हुआ था।
प्रथम एस्टेट—पादरी (Clergy), द्वितीय एस्टेट—अभिजात वर्ग (Nobility), तृतीय एस्टेट—सामान्य जनता।
तृतीय एस्टेट में देश की लगभग 90% जनता थी।
नेपोलियन बोनापार्ट
नेपोलियन का जन्म 15 अगस्त, 1769 ई. को कोर्सिका द्वीप की राजधानी अजासियो में हुआ।
नेपोलियन के पिता का नाम कार्लो बोनापार्ट था।
नेपोलियन ने ब्रिटेन की सैनिक अकादमी में शिक्षा प्राप्त की।
1796 में नेपोलियन ने इटली में ऑस्ट्रिया के प्रभाव को समाप्त किया।
फ्रांस में डायरेक्टरी के शासन का अन्त 1799 ई. में हुआ।
1799 ई. में नेपोलियन प्रथम कॉन्सल बना।
1802 ई. में वह आजीवन कॉन्सल बना।
1804 ई. में नेपोलियन फ्रांस का सम्राट बना।
आधुनिक फ्रांस का निर्माता नेपोलियन को माना जाता है।
नेपोलियन ने इंग्लैंड को ‘बनियों का देश’ कहा था।
नेपोलियन ने जोजेफाइन को तलाक देकर ऑस्ट्रिया की राजकुमारी मेरी लुइसा से विवाह किया।
ट्राफलगर का युद्ध 21 अक्टूबर, 1805 ई. में इंग्लैंड एवं नेपोलियन के बीच हुआ।
नेपोलियन ने बैंक ऑफ फ्रांस की स्थापना 1800 ई. में की।
नेपोलियन कोड तैयार करवाया गया।
नेपोलियन नील नदी के युद्ध में अंग्रेजी जहाजी बेड़े के नायक नेल्सन से पराजित हुआ।
1813 ई. में लिपजिग में यूरोप के राष्ट्रों ने नेपोलियन को पराजित किया।
18 जून, 1815 ई. को वाटरलू के युद्ध में नेपोलियन पराजित हुआ।
नेपोलियन की मृत्यु 1821 ई. में हुई। उसे ‘लिटल कॉरपोरल’ के नाम से जाना जाता है।
नेपोलियन के पतन का प्रमुख कारण रूस पर उसका आक्रमण था।
वियना कांग्रेस (1815) ने यूरोप में फ्रांस के प्रभुत्व को समाप्त किया।
4. इटली का एकीकरण
19वीं सदी के पूर्वार्द्ध में इटली में 13 राज्य थे।
इटली के एकीकरण का जनक जोसेफ मेजिनी को माना जाता है।
मेजिनी का जन्म जेनेवा में हुआ था।
इटली के एकीकरण में सबसे बड़ा बाधक ऑस्ट्रिया था।
इटली के एकीकरण में सार्डीनिया-पीडमौंट राज्य ने अगुआई की थी।
इटली की समस्या को काउंट कावूर ने अन्तरराष्ट्रीय समस्या बनाया।
इटली के एकीकरण की तलवार गैरीबाल्डी को कहा जाता है।
इटली के एकीकरण का श्रेय मेजिनी, काउंट कावूर और गैरीबाल्डी को दिया जाता है।
‘यंग इटली’ की स्थापना 1831 ई. में जोसेफ मेजिनी ने की।
गैरीबाल्डी ने ‘ला कुरती’ नाम से सेना का संगठन किया था।
विक्टर एमैनुएल सार्डीनिया का शासक था।
इटली के एकीकरण की शुरुआत लोम्बार्डी और सार्डीनिया राज्यों के मेल से हुई।
इटली राष्ट्र का जन्म 2 अप्रैल, 1860 ई. को माना जाता है।
1871 ई. में रोम को संयुक्त इटली की राजधानी घोषित किया गया।
“यदि समाज में क्रांति लानी हो तो क्रांति का नेतृत्व नवयुवकों के हाथ में दे दो”—यह कथन जोसेफ मेजिनी का है।
इटली का एकीकरण 1871 ई. में काउंट कावूर ने किया।
इटली की एकता का जन्मदाता नेपोलियन था।
5. जर्मनी का एकीकरण
जर्मनी का एकीकरण बिस्मार्क ने किया।
बिस्मार्क प्रशा के शासक विलियम प्रथम का प्रधानमंत्री था।
जर्मनी का सबसे शक्तिशाली राज्य प्रशा था।
बिस्मार्क जर्मनी का एकीकरण प्रशा के नेतृत्व में चाहता था।
विलियम को जर्मन संघ के सम्राट का ताज 8 फरवरी, 1871 ई. में पहनाया गया।
बिस्मार्क को सबसे अधिक भय फ्रांस से था।
जर्मनी में राष्ट्रीयता का संदेशवाहक नेपोलियन बोनापार्ट को माना जाता है।
जर्मनी के आर्थिक राष्ट्रवाद का पिता फ्रेडरिक लिस्ट को माना जाता है।
जर्मन राष्ट्रीय सभा को डायट के नाम से जाना जाता था। यह फ्रैंकफर्ट में होती थी।
1815 ई. से 1850 ई. के बीच जर्मन साम्राज्य पर ऑस्ट्रिया का आधिपत्य था।
ऑस्ट्रिया का चांसलर मेटरनिख था।
एकीकृत जर्मन राष्ट्र के निर्माण में रांके, बोमर, लसर आदि दार्शनिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
फ्रैंकफर्ट संविधान सभा का गठन मई, 1848 ई. में किया गया।
विलियम प्रथम के शासनकाल में प्रशा का रक्षामंत्री वॉन रून एवं सेनापति वॉन माल्टके था।
23 सितम्बर, 1862 ई. को बिस्मार्क प्रशा का चांसलर बना।
बिस्मार्क का जन्म 1 अप्रैल, 1815 ई. को ब्रेडनवर्ग में हुआ था।
विलियम प्रथम ने बिस्मार्क को ‘बाजीगर’ कहा था।
सेडान के युद्ध में 1866 ई. में ऑस्ट्रिया ने प्रशा के आगे आत्मसमर्पण कर दिया।
23 अगस्त, 1866 ई. की प्राग संधि के तहत ऑस्ट्रिया जर्मन संघ में शामिल हुआ।
फ्रांस एवं प्रशा के बीच सेडान का युद्ध 15 जुलाई, 1870 को हुआ।
नेपोलियन तृतीय ने प्रशा के आगे 1 सितम्बर, 1870 ई. को आत्मसमर्पण किया।
बिस्मार्क ने जर्मनी के सम्राट विलियम प्रथम का राज्याभिषेक वर्साय के राजमहल में किया।
फ्रैंकफर्ट की संधि 10 मई, 1871 को फ्रांस और प्रशा के बीच हुई।
सूडान के युद्ध के बाद जर्मनी का एकीकरण सम्भव हो सका।
6. रूसी क्रांति
समाजवाद शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम रॉबर्ट ओवेन ने किया था। वह वेल्स का रहने वाला था।
आदर्शवादी समाजवाद का प्रवक्ता रॉबर्ट ओवेन को माना जाता है।
वैज्ञानिक समाजवाद का संस्थापक कार्ल मार्क्स था। कार्ल मार्क्स जर्मनी का निवासी था।
कार्ल मार्क्स ने दास कैपिटल और कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो नामक पुस्तकें लिखीं।
फ्रांसीसी साम्यवाद का जनक सेंट साइमन को माना जाता है।
फेबियन सोशलिज्म का नेतृत्व जॉर्ज बर्नार्ड शॉ ने किया।
लंदन में फेबियन सोसायटी की स्थापना 1884 ई. में हुई।
‘दुनिया के मजदूरों एक हो’ का नारा कार्ल मार्क्स ने दिया।
रूस के शासक को ‘जार’ कहा जाता था। यह जारशाही व्यवस्था मार्च, 1917 ई. में समाप्त हुई।
जार मुक्तिदाता के नाम से अलेक्जेंडर द्वितीय को जाना जाता है।
रूस का अंतिम जार शासक जार निकोलस द्वितीय था।
1917 में हुई रूसी क्रांति का तात्कालिक कारण प्रथम विश्वयुद्ध में रूस की पराजय थी।
7 नवम्बर, 1917 ई. की बोल्शेविक क्रांति का नेता लेनिन था।
लेनिन ने चेका का संगठन किया था।
लाल सेना का संगठन ट्रॉटस्की ने किया था।
रूस के जार शासक अलेक्जेंडर द्वितीय की हत्या बम-विस्फोट में हुई।
“एक जार, एक चर्च और एक रूस” का नारा जार निकोलस द्वितीय ने दिया था।
रूस में सबसे अधिक जनसंख्या स्लाव लोगों की थी।
अन्ना कैरेनिना के लेखक लियो टॉल्सटॉय थे।
शून्यवाद का जनक तुर्गनेव को माना जाता है।
रूसी साम्यवाद का जनक प्लेखानोव को माना जाता है।
सोशल डेमोक्रेटिक दल की स्थापना 1903 ई. में रूस में हुई।
यह दल दो गुटों में विभाजित था—बोल्शेविक और मेन्शेविक।
बोल्शेविक का अर्थ ‘बहुसंख्यक’ एवं मेन्शेविक का अर्थ ‘अल्पसंख्यक’ होता है।
बोल्शेविक दल का नेता लेनिन था।
16 अप्रैल, 1917 ई. में लेनिन ने रूस में क्रांतिकारी योजना प्रकाशित की, जो ‘अप्रैल थीसिस’ के नाम से जानी जाती है।
1921 ई. में लेनिन ने रूस में नई आर्थिक नीति लागू की।
आधुनिक रूस का निर्माता स्टालिन को माना जाता है।
लेनिन की मृत्यु 1924 ई. में हो गयी।
Rights of Man के लेखक टॉमस पेन हैं।
मदर की रचना मैक्सिम गोर्की ने की।
स्थायी क्रांति के सिद्धांत का प्रवर्तक ट्रॉटस्की था।
प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान लेनिन का नारा था—“युद्ध का अन्त करो।”
कार्ल मार्क्स का आजीवन साथी फ्रेडरिक एंगेल्स था।
7. औद्योगिक क्रांति
‘औद्योगिक क्रांति’ पद का प्रयोग सर्वप्रथम आर्नोल्ड टॉयनबी ने किया।
औद्योगिक क्रांति की शुरुआत इंग्लैंड में हुई, क्योंकि इंग्लैंड के पास उपनिवेशों के कारण कच्चे माल और पूँजी की अधिकता थी।
इंग्लैंड में औद्योगिक क्रांति की शुरुआत सूती कपड़ा उद्योग से हुई।
सबसे पहले स्कॉटलैंड के मैकडम नामक व्यक्ति ने पक्की सड़कें बनाने की विधि निकाली।
1761 ई. में ब्रिंडले नामक इंजीनियर ने मैनचेस्टर से बरसले तक नहर बनाई।
1814 ई. में जॉर्ज स्टीफेंसन ने पहला भाप से चलने वाला रेल इंजन ‘रॉकेट’ बनाया।
औद्योगिक क्रांति की दौड़ में जर्मनी इंग्लैंड का प्रतिद्वन्द्वी था।
औद्योगिक क्रांति के हुए आविष्कार
आविष्कार आविष्कारक वर्ष
तेज चलने वाला शटल जॉन के 1733 ई.
स्पिनिंग जेनी जेम्स हारग्रीव्ज 1765 ई.
स्पिनिंग जेनी (पानी की शक्ति से चालित) रिचार्ड आर्कराइट 1767 ई.
स्पिनिंग म्यूल क्रॉम्पटन 1776 ई.
घोड़ा द्वारा चलाये जाने वाला करघा कार्ट राइट —
सेफ्टी लैम्प हम्फ्री डेवी 1815 ई.
8. इंग्लैंड में क्रांति
इंग्लैंड में गृह-युद्ध चार्ल्स प्रथम के शासनकाल में 1642 ई. में हुआ।
इंग्लैंड में गौरवपूर्ण क्रांति 1688 ई. में हुई। उस समय इंग्लैंड का शासक जेम्स द्वितीय था।
सप्तवर्षीय युद्ध इंग्लैंड एवं फ्रांस के बीच 1756 से 1763 तक हुआ था।
गुलाबों का युद्ध इंग्लैंड में हुआ।
इंग्लैंड के सामन्तों ने राजा जॉन को सन् 1215 ई. में एक अधिकार-पत्र पर हस्ताक्षर करने को मजबूर किया। इस अधिकार-पत्र को मैग्नाकार्टा कहा जाता है।
यह सर्वसाधारण के अधिकारों का घोषणा-पत्र था।
ट्यूडर वंश के शक्तिशाली राजाओं के शासनकाल में संसद उनके हाथों की कठपुतली बनी रही।
एलिजाबेथ प्रथम का संबंध ट्यूडर वंश से था।
इंग्लैंड में गृह-युद्ध सात वर्षों तक चला।
इंग्लैंड के राजा चार्ल्स प्रथम को फाँसी की सजा दी गयी।
गृह-युद्ध के दौरान राजा के समर्थकों को कैवेलियर्स तथा संसद के समर्थकों को राउंडहेड्स कहा गया।
9. प्रथम विश्वयुद्ध
प्रथम विश्वयुद्ध की शुरुआत 28 जुलाई, 1914 ई. को ऑस्ट्रिया द्वारा सर्विया पर आक्रमण किये जाने के साथ हुई। यह चार वर्षों तक चला। इसमें 37 देशों ने भाग लिया।
प्रथम विश्वयुद्ध का तात्कालिक कारण ऑस्ट्रिया के राजकुमार आर्कड्यूक फर्डिनेंड की बोस्निया की राजधानी सेराजेवो में 28 जून, 1914 को की गई हत्या थी।
प्रथम विश्वयुद्ध में सम्पूर्ण विश्व दो खेमों में बँट गया—मित्र राष्ट्र एवं धुरी राष्ट्र।
धुरी राष्ट्रों का नेतृत्व जर्मनी ने किया। इसमें ऑस्ट्रिया, हंगरी, तुर्की, बुल्गारिया और इटली आदि शामिल थे।
मित्र राष्ट्रों में इंग्लैंड, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस एवं फ्रांस शामिल थे।
गुप्त संधियों की प्रणाली एवं यूरोप में गुटबन्दी का जनक जर्मनी के चांसलर बिस्मार्क को माना जाता है।
ऑस्ट्रिया, जर्मनी एवं इटली के बीच त्रिगुट का निर्माण 1882 ई. में हुआ।
त्रिगुट का सदस्य होने के बावजूद इटली कुछ समय तक तटस्थ रहा और अन्ततः 26 अप्रैल, 1915 को ऑस्ट्रिया-हंगरी और जर्मनी के खिलाफ युद्ध में शामिल हुआ।
सर्विया की गुप्त क्रांतिकारी संस्था थी—काला हाथ।
रूस-जापान युद्ध (1904-05 ई.) का अन्त अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट की मध्यस्थता से हुआ।
मोरक्को संकट 1906 ई. में पैदा हुआ।
यहाँ तीनों पृष्ठों का संपूर्ण पाठ हिंदी में दिया गया है:
* प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान जर्मनी ने रूस पर आक्रमण 1 अगस्त, 1914 ई. में एवं फ्रांस पर आक्रमण 3 अगस्त, 1914 ई. में किया।
* 4 अगस्त, 1914 ई. को इंग्लैंड प्रथम विश्वयुद्ध में शामिल हुआ।
* 26 अप्रैल, 1915 ई. को इटली मित्र राष्ट्रों की ओर से प्रथम विश्वयुद्ध में शामिल हुआ।
* प्रथम विश्वयुद्ध के समय अमेरिका का राष्ट्रपति वुडरो विल्सन था।
* अमेरिका 6 अप्रैल, 1917 ई. को प्रथम विश्वयुद्ध में शामिल हुआ।
* जर्मनी के यू-बोट द्वारा इंग्लैंड के लूसितानिया नामक जहाज को डुबाने के बाद अमेरिका प्रथम विश्वयुद्ध में शामिल हुआ, क्योंकि उस जहाज पर मरनेवाले 1153 व्यक्तियों में 128 व्यक्ति अमेरिकी थे।
* जुलाई 1918 में ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका ने संयुक्त सैनिक अभियान आरंभ किया और जर्मनी तथा उनके सहयोगी देशों की हार होने लगी। सितम्बर, 1918 में बुल्गारिया, अक्टूबर, 1918 में तुर्की तथा 3 नवम्बर, 1918 को ऑस्ट्रेलिया तथा हंगरी के सम्राट ने आत्मसमर्पण कर दिया।
* जर्मन सम्राट् कैसर विलियम द्वितीय ने 10 नवम्बर, 1918 ई. को अपने पद से इस्तीफा दे दिया और हॉलैंड भाग गया। ऐसी अवस्था में समाजवादी प्रजातांत्रिक दल ने सत्ता अपने हाथों में लेकर एकतंत्र के स्थान पर गणतंत्र की स्थापना की और अपने नेता फ्रेडरिक एबर्ट को जर्मनी का चांसलर बनाया, जिसने 11 नवम्बर, 1918 को युद्ध विराम की संधि पर हस्ताक्षर कर दिया फलस्वरूप प्रथम विश्व युद्ध समाप्त हुआ।
* 18 जून, 1919 ई. को पेरिस शांति सम्मेलन हुआ, जिसमें 27 देश भाग ले रहे थे; मगर शांति-संधियों की शर्तें केवल तीन देश—ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका तय कर रहे थे।
* पेरिस शांति सम्मेलन में शांति-संधियों की शर्तें निर्धारित करने में जिन राष्ट्राध्यक्षों ने मुख्य भूमिका निभाई, वे थे—अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री लॉयड जॉर्ज और फ्रांस के प्रधानमंत्री जॉर्ज क्लेमेंसो।
* वर्साय की संधि 28 जून, 1919 ई. को जर्मनी के साथ हुई। संधि के तहत जर्मनी की सेना 1 लाख तक सीमित कर दी गयी। उससे वायुसेना एवं पनडुब्बियां रखने के अधिकार छीन लिए गए। जर्मनी के सारे उपनिवेश विजित राष्ट्रों ने आपस में बाँट लिए।
* युद्ध के हर्जाने के रूप में जर्मनी से 6 अरब 10 करोड़ पौंड की राशि की मांग की गयी।
* अन्तरराष्ट्रीय क्षेत्र में प्रथम विश्वयुद्ध का सबसे बड़ा योगदान राष्ट्रसंघ की स्थापना थी।
* प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान होनेवाली वर्साय की संधि में द्वितीय विश्वयुद्ध का बीजारोपण हुआ।
#### **10. चीनी क्रांति**
* मंचू राजवंश का पतन 1911 ई. में हुआ।
* 1911 ई. में हुई चीनी क्रांति का नायक सनयात सेन था।
* 1905 ई. में सनयात सेन ने तुंग-मेंग दल की स्थापना की, जिसका उद्देश्य चीन में मंचू वंश के शासन को समाप्त करना था।
* क्रांतिकारियों ने 29 दिसम्बर, 1911 ई. में सनयात सेन को अपनी सरकार का अध्यक्ष चुना।
* कोबनिनेड लीग सोसायटी का संस्थापक सनयात सेन था।
* 1911 ई. की क्रांति के बाद चीन में गणतंत्र शासन-पद्धति की स्थापना हुई।
* युआन शीह काई के समर्थन में सनयात सेन ने अपना नेतृत्व वापस ले लिया।
* 1912 ई. में सनयात सेन ने कुओमिनतांग पार्टी की स्थापना की। इस पार्टी के पुनर्गठन के लिए सेन ने माइकेल बोरोदिन को आमंत्रित किया।
* डॉ. सनयात सेन ने अपनी सेना के संगठन के लिए जनरल गैलेन को चुना।
* डॉ. सनयात सेन के तीन सिद्धान्त थे—राष्ट्रवाद, लोकतंत्रवाद और सामाजिक न्याय।
* डॉ. सनयात सेन को चीन का राष्ट्रपिता कहा जाता है।
**तांग वंश**
चीन में तांग राजवंश के तहत एक साम्राज्य स्थापित हुआ, जो लगभग तीन सौ वर्षों तक (7वीं से 9वीं सदी तक) सत्ता में रहा। इसकी राजधानी शिआन दुनिया के सबसे बड़े नगरों में एक थी।
तांग साम्राज्य परीक्षा के माध्यम से नियुक्त की गई नौकरशाही द्वारा प्रशासित होता था।
* डॉ. सनयात सेन की मृत्यु 1925 ई. में हो गयी।
* डॉ. सनयात सेन की मृत्यु के बाद च्यांग काई शेक ने 1926 ई. में कुओमिनतांग पार्टी का नेतृत्व संभाला।
* 1927 ई. में कुओमिनतांग पार्टी से साम्यवादी लोग अलग हुए।
* चीन में गृह-युद्ध 1928 ई. में शुरू हुआ।
* 1925 ई. को हुनान के विशाल किसान आन्दोलन का नेतृत्व माओत्से तुंग ने किया।
* माओत्से तुंग का जन्म 1893 ई. में हुनान में हुआ था।
* च्यांग काई शेक ने केंद्रीय सरकार की सत्ता नानकिंग में संभाली।
* च्यांग काई शेक ने अपनी सरकार की स्थापना फारमोसा में की।
* साम्यवादियों के दमन करने के लिए च्यांग काई शेक ने ब्लूशर्ट आतंकवादी दल का गठन किया।
* माओत्से तुंग के नेतृत्व में 1 अक्टूबर, 1949 ई. जनवादी गणराज्य की स्थापना चीन में की गई।
* चीनी साम्यवादी गणतंत्र का प्रथम अध्यक्ष माओत्से तुंग था।
* चीनी जनवादी गणराज्य का प्रथम प्रधानमंत्री चाऊ-एन-लाई था।
* चीन के जनवादी गणराज्य की राजधानी हुनान थी।
* खुले द्वार की नीति चीन में अपनाई गयी थी।
* चीन के द्वार खोलने का श्रेय ब्रिटेन को दिया जाता है।
* खुले द्वार की नीति का प्रतिपादक 'जॉन हे' था।
* चीन 'एशिया का मरीज' के नाम से जाना गया।
* चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना 1921 ई. में हुई।
#### **11. तुर्की**
* तुर्की को 'यूरोप का मरीज' कहा जाता था।
* पान इस्लामिज्म का नारा अब्दुल हमीद द्वितीय ने दिया था।
* युवा तुर्क आन्दोलन की शुरुआत अब्दुल हमीद द्वितीय के शासनकाल में 1908 ई. में हुई।
* प्रथम विश्वयुद्ध के बाद तुर्की के साथ भीषण अपमानजनक संधि सेव्र की संधि 10 अगस्त, 1920 ई. को की गयी। मुस्तफा कमाल पाशा ने इसे मानने से इनकार कर दिया।
* आधुनिक तुर्की का निर्माता मुस्तफा कमाल पाशा को माना जाता है। इसे 'अतातूर्क' (तुर्की का पिता) के उपनाम से भी जाना जाता है।
* मुस्तफा कमाल पाशा का औपचारिक जन्म तिथि 19 मई, 1881 में सैलेनिका में हुआ था। इसके पिता का नाम अली रज़ा (Ali Riza) था।
* तुर्की में एकता और प्रगति समिति की गठन 1889 ई. में हुआ।
* प्रारंभ में कमाल पाशा एकता और प्रगति समिति के प्रभाव में आया।
* एक सेनापति के रूप में कमाल पाशा ने गल्लीपोती युद्ध में शानदार सफलता हासिल की थी। इसके बाद 1919 ई. में कमाल पाशा ने सैनिक पद से इस्तीफा दे दिया।
* 1919 ई. के अखिल तुर्क कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता मुस्तफा कमाल पाशा ने की। 1923 ई. में तुर्की एवं यूनान के बीच में लोजान की संधि हुई।
* 23 अक्टूबर, 1923 ई. को तुर्की गणतंत्र की घोषणा हुई।
* कमाल पाशा ने तुर्की में 3 मार्च, 1924 ई. को खिलाफत को समाप्त कर दिया।
* 20 अप्रैल, 1924 ई. को तुर्की में नये संविधान की घोषणा हुई।
* तुर्की के नये गणतंत्र का राष्ट्रपति मुस्तफा कमाल पाशा हुआ।
* रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी का संस्थापक मुस्तफा कमाल पाशा था।
* मुस्तफा कमाल पाशा द्वारा किये गये महत्वपूर्ण कार्य निम्न हैं :
1. 1932 ई. में तुर्की भाषा परिषद की स्थापना।
2. 1933 ई. में तुर्की में प्रथम पंचवर्षीय योजना का लागू होना।
3. 1924 ई. में तुर्की को धर्मनिरपेक्ष राज्य की घोषणा।
4. इस्ताम्बुल में एक मेडिकल कॉलेज की स्थापना।
5. ग्रेगोरियन कैलेंडर का प्रचलन (26 दिसम्बर, 1925 ई. से लागू)।
* इस्ताम्बुल का पुराना नाम कुस्तुंतुनिया था।
* 25 नवम्बर, 1925 ई. को तुर्की में टोपी और औरतों को बुरका पहनने पर कानूनी प्रतिबंध लगाया गया।
* कमाल पाशा की मृत्यु 1938 ई. में हो गयी।
#### **12. इटली में फासिस्टों का उदय**
* फासिज्म का उदय सर्वप्रथम इटली में हुआ। इसका जन्मदाता मुसोलिनी को माना जाता है।
* मुसोलिनी का जन्म 1883 ई. में रोमाग्ना में हुआ था।
* मुसोलिनी के दल का नाम फासिस्टवाद था। इसकी स्थापना मिलान में की गयी थी।
* ड्यूस के नाम से मुसोलिनी को पुकारा जाता था।
* फासीवादी राष्ट्रवाद का समर्थन करते थे।
* फासीवादी दल के स्वयंसेवक काली कमीज पहनते थे।
* मुसोलिनी ने दियाज को सेना का अधिकारी नियुक्त किया।
* मुसोलिनी द्वारा बनाये गये निगमों की संख्या 22 थी।
* राष्ट्रीय निगम परिषद का अध्यक्ष मुसोलिनी था, जिसकी सदस्यों की संख्या 500 थी।
* ग्रैंड काउंसिल ऑफ फासिस्ट पार्टी के सदस्यों की संख्या 25 थी।
* मुसोलिनी ने अक्टूबर, 1922 ई. में रोम पर और 1935 ई. में अबीसीनिया पर आक्रमण किया।
* जापान एवं जर्मनी के साथ मुसोलिनी ने रोम-बर्लिन-टोकियो धुरी का निर्माण 1936 ई. में किया।
* मुसोलिनी ने 10 जून, 1939 ई. को द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान मित्र राष्ट्रों के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की। इटली में फासीवाद का अन्त 28 अप्रैल, 1945 ई. को माना जाता है।
#### **13. जर्मनी में नाजीवाद का उदय**
* जर्मनी में नाजी दल का उत्थान हिटलर के नेतृत्व में हुआ।
* हिटलर का जन्म 20 अप्रैल, 1889 ई. को ऑस्ट्रिया के ब्राउना नामक शहर में हुआ था।
* हिटलर बचपन में चित्रकार बनना चाहता था।
* प्रथम विश्वयुद्ध (1914-18) में हिटलर जर्मनी की तरफ से लड़ा था और युद्ध में अभूतपूर्व वीरता के लिए उसे आयरन क्रास प्राप्त हुआ था।
* युद्ध के बाद हिटलर जर्मन वर्कर्स पार्टी का सदस्य बना। 1920 ई. में इस पार्टी का नाम बदलकर नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी रखा गया। धीरे-धीरे हिटलर इसका फ्यूहरर (नेता) बन गया।
* 1923 में हिटलर ने लुडेनडार्फ के साथ मिलकर वाइमर गणतंत्र के खिलाफ विद्रोह कर दिया। विद्रोह असफल हुआ। हिटलर को बंदी बना लिया गया। जेल में ही हिटलर ने अपनी प्रसिद्ध आत्मकथा *माइनकैम्फ* की रचना की। 1924 के अंत में उसे जेल से रिहा कर दिया गया। जेल से रिहा होने के बाद उसने अपने दल को फिर से संगठित किया और स्वास्तिक को प्रतीक के रूप में ग्रहण किया।
* 1932 के चुनाव में हिटलर की नाजी पार्टी को 230 सीटें प्राप्त हुईं परन्तु उसे सरकार बनाने का मौका नहीं मिला। बाद में राष्ट्रपति हिंडेनबर्ग ने 30 जनवरी, 1933 को हिटलर को चांसलर मनोनीत किया।
* अगस्त, 1934 में हिंडेनबर्ग की मृत्यु पर चांसलर और राष्ट्रपति के पद को मिलाकर एक कर दिया गया और हिटलर जर्मन का सर्वेसर्वा बन गया।
* गुप्तचर पुलिस 'गेस्टापो' का संगठन हिटलर ने किया था।
* 'एक राष्ट्र एक नेता' का नारा हिटलर ने दिया।
* नाजी दल का प्रचार-कार्य गोयबल्स संभालता था।
* जर्मन सुरक्षा परिषद की स्थापना 4 अप्रैल, 1933 ई. में हुई।
* हिटलर ने 16 मार्च, 1935 ई. में जर्मनी में पुनः सशस्त्रीकरण की घोषणा की उसने वर्साय संधि की निःशस्त्रीकरण संबंधी सभी धाराओं को तोड़ने की घोषणा की एवं उसने पूरे जर्मनी में अनिवार्य सैनिक सेवा लागू कर दिया।
* साम्यवादी खतरा से बचने के लिए जर्मनी, इटली एवं जापान के बीच कामिन्टर्न विरोधी समझौता 1936 में सम्पन्न हुआ जो कालान्तर में धुरी राष्ट्र के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
* हिटलर ने 1 सितम्बर, 1939 ई. को पोलैंड पर आक्रमण किया।
* हिटलर की विस्तारवादी नीति का पहला शिकार ऑस्ट्रिया हुआ।
* एडोल्फ हिटलर के लिए शामी विरोधी नीति का अर्थ था—यहूदी विरोधी नीति।
* हिटलर ने 30 अप्रैल, 1945 ई. को आत्महत्या की।
#### **14. जापानी साम्राज्यवाद**
* जापान के साम्राज्यवाद का सबसे पहला शिकार चीन हुआ।
* 1863 ई. में एक अमेरिकी नाविक पेरी ने बल-प्रयोग कर जापान का द्वार अमेरिकी व्यापार के लिए खोला।
* जापान में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत मुत्सुहीतो ने की।
* 1872 ई. में जापान में सैनिक सेवा अनिवार्य कर दी गई।
* 1905 ई. में जापान ने रूस को हराया।
* जापान-रूस युद्ध की समाप्ति 5 सितम्बर, 1905 ई. को पोर्ट्समाउथ की संधि के द्वारा हुई।
* जापान ने 1931 ई. में अपनी साम्राज्यवादी आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए मंचूरिया पर आक्रमण किया।
* 20 मार्च, 1933 ई. को जापान ने राष्ट्रसंघ की सदस्यता त्याग दी।
* पीत आतंक से जापान को संबोधित किया जाता था।
* द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान ने धुरी राष्ट्र का साथ दिया था।
* अमेरिका ने जापान पर पहला अणु बम 6 अगस्त, 1945 ई. को हिरोशिमा पर गिराया था।
* हिरोशिमा और नागासाकी पर अणु बम गिराये जाने के कारण जापान ने द्वितीय विश्वयुद्ध में आत्मसमर्पण किया था।
#### **15. द्वितीय विश्वयुद्ध**
* 1 सितम्बर, 1939 ई. को जर्मनी ने पोलैंड पर आक्रमण किया। इसके दो दिन बाद फ्रांस एवं ब्रिटेन ने जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की और इसी के साथ द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत हुई। यह 6 वर्षों तक लड़ा गया। इसका अन्त 2 सितम्बर, 1945 ई. को हुआ। इसमें 61 देशों ने भाग लिया।
* द्वितीय विश्वयुद्ध का तात्कालिक कारण जर्मनी का पोलैंड पर आक्रमण था।
* द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जर्मन जनरल रोमेल का नाम डेजर्ट फॉक्स रखा गया था।
* म्यूनिख पैक्ट सितम्बर, 1938 ई. में सम्पन्न हुआ।
* जर्मनी ने वर्साय की संधि का उल्लंघन 1935 ई. में किया।
* स्पेन में गृह-युद्ध 1936 ई. में शुरू हुआ। संयुक्त रूप से इटली एवं जर्मनी का पहला शिकार स्पेन था।
* जर्मनी द्वारा सोवियत संघ पर आक्रमण करने की योजना को ऑपरेशन बारबोसा कहा गया।
* 23 अगस्त, 1939 ई. को जर्मनी-रूस आक्रमण समझौते पर हस्ताक्षर हुए। जर्मनी ने रूस पर समझौता उल्लंघन का आरोप लगाकर उस पर 22 जून, 1941 ई. में आक्रमण कर दिया। फरवरी 1943 में रूसी सेना जर्मनी को हराने में सफल हुई।
* जर्मनी की ओर से द्वितीय विश्वयुद्ध में 10 जून, 1940 ई. को इटली ने प्रवेश किया।
* अमेरिका का द्वितीय विश्वयुद्ध में प्रवेश 8 दिसम्बर, 1941 ई. को हुआ। इसका कारण जापान द्वारा 7 दिसम्बर, 1941 का हवाई द्वीप स्थित पर्ल हार्बर के अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर जबरदस्त हमला था।
* द्वितीय विश्वयुद्ध के समय इंग्लैंड का प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल एवं अमेरिका का राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट था।
> **नोट:** रूजवेल्ट राष्ट्रपति पद के लिए चार बार चुने गए और 1933-45 तक इस पद पर रहे। वे अमेरिका के पहले राष्ट्रपति थे जिन्होंने दो बार से ज्यादा इस पद की शोभा बढ़ाई। इनका संबंध डेमोक्रेट पार्टी से था।
>
* इंग्लैंड की शानदार अलगाववाद की नीति का विचारक सेलिसेवरी था।
* वर्साय की संधि को आरोपित संधि के नाम से जाना जाता है।
* द्वितीय विश्वयुद्ध में जर्मनी की पराजय का श्रेय रूस को दिया जाता है।
* मित्र राष्ट्रों के सामूहिक प्रयासों से 6 जून, 1944 को जर्मन सेना परास्त हो गयी और 7 मई, 1945 को उसने आत्मसमर्पण कर दिया।
* द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिका ने 6 अगस्त, 1945 ई. को जापान पर अणु बम का प्रयोग किया। इस युद्ध में मित्रराष्ट्रों द्वारा पराजित होनेवाला अंतिम देश जापान था।
* अमेरिका ने 6 अगस्त, 1945 ई. को हिरोशिमा पर लिटुल बॉय (यूरेनियम-235) तथा 9 अगस्त, 1945 ई. को नागासाकी पर फैटमैन (प्लूटोनियम-239) नामक एटम बम गिराया था।
* यूरोप में द्वितीय विश्वयुद्ध का अन्त 8 मई, 1945 को तब हुआ जब जर्मनी ने बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया।
* 15 अगस्त, 1945 को एशिया में भी दूसरा विश्व युद्ध समाप्त हो गया जब जापानी साम्राज्य ने आत्मसमर्पण करना स्वीकार कर लिया। इस घोषणा पर 2 सितम्बर, 1945 को टोक्यों की खाड़ी स्थित अमेरिकी युद्धपोत मिसूरी पर मित्र राष्ट्रों के सर्वोच्च सेनापति मैक आथर के समक्ष जापान ने हस्ताक्षर किए। जापानी प्रधानमं
त्री एडमिरल सुजुकी ने त्यागपत्र दे दिया।
* अन्तरराष्ट्रीय क्षेत्र में द्वितीय विश्वयुद्ध का सबसे बड़ा योगदान संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना है।
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