आधुनिक भारत 8

 ### आधुनिक भारत


### 39. उत्तरकालीन मुगल सम्राट्


➣ **बहादुरशाह I (1707-12) :** लगभग दो वर्षों के उत्तराधिकार के संघर्ष के बाद 63 वर्षीय शाहजादा मुअज्जम (औरंगजेब का बड़ा बेटा) शासक बना और उसने बहादुरशाह की उपाधि धारण की। इस लड़ाई में उसने अपने भाइयों—मुहम्मद आजम तथा कामबख्श की हत्या कर दी। बाद में इसे बहादुरशाह प्रथम कहा गया।


➣ उत्तराधिकार युद्ध में **गुरु गोविन्द सिंह** ने बहादुरशाह का साथ दिया था।


#### मुगलों से स्वतंत्र होने वाले राज्य एवं संस्थापक


| क्र. | राज्य | संस्थापक |


|---|---|---|


| 1. | अवध | साअदत खाँ |


| 2. | हैदराबाद | चिनकिलिच खाँ या निजाम-उल-मुल्क आसफ़ जाह |


| 3. | रुहेलखंड | वीर दाऊद एवं अली मुहम्मद खाँ |


| 4. | बंगाल | मुर्शिदकुली खाँ |


| 5. | कर्नाटक | सादुल्ला खाँ |


| 6. | भरतपुर | चूरामन एवं बदन सिंह |


**नोट : मुगल सम्राट् मुहम्मद शाह ने साअदत खाँ को बुरहान-उल-मुल्क की उपाधि दी। साअदत खाँ का असली नाम मीर मुहम्मद अमीन था।**


➣ खाफी खान ने बहादुरशाह को **'शाह-ए-बेखबर'** की उपाधि दी।


➣ **जहाँदार शाह (1712-13) :** जुल्फिकार खान की मदद से जहाँदार शाह शासक बना। जुल्फिकार खान को प्रधानमंत्री बनाया, उसने साम्राज्य की वित्तीय स्थिति ठीक करने के लिए इजाsub-प्रथा की 


शुरुआत की। जहाँदार शाह ने भी जजिया कर को समाप्त कर दिया।



➤ जहाँदार शाह अपने शासन में लाल कुमारी नाम की वेश्या को हस्तक्षेप करने का आदेश दे रखा था।

**नोट :** *मुगलकालीन इतिहास में सैयद बन्धु हुसैन अली खाँ एवं अब्दुल्ला खाँ को शासक निर्माता के रूप में जाना जाता है।*

➤ जहाँदार शाह को **लम्पट मूर्ख** भी कहा जाता था।

➤ फर्रूखसियर (1713-19): सैयद बंधुओं-अब्दुला खान एवं हुसैनअली की मदद से फर्रूखसियर शासक बना।

➤ फर्रूखसियर को मुगल वंश का **घृणित कायर** कहा गया है।

➤ *1715 में एक शिष्टमंडल जॉन सुरमन के नेतृत्व में भारत आया। यह शिष्ट मंडल फर्रूखसियर के दरबार में 1717 में पहुँचा, उस समय फर्रूखसियर जानलेवा घाव से पीड़ित था। इस शिष्टमंडल में हैमिल्टन नामक डॉक्टर थे जिन्होंने फर्रूखसियर का इलाज किया था। इससे खुश होकर इसने अंग्रेजों को भारत में कहीं भी व्यापार करने की अनुमति तथा अंग्रेजी सिक्के को मान्यता प्रदान किया। फर्रूखसियर द्वारा जारी किए गए इस घोषणा का ईस्ट इंडिया का **मैग्नाकार्टा** कहा जाता है।*

➤ 1719 में सैयद बंधुओं ने पेशवा बालाजी विश्वनाथ की सहायता से फर्रूखसियर को गद्दी से उतार दिया एवं अंधा बनाकर मार डाला।

➤ **रफी-उद-दराजत (28 फरवरी–6 जून, 1719)** इसने मुगल शासकों में सबसे कम दिन शासन किया।

➤ **रफी-उद-दौला (6 जून–17 सितंबर, 1719)** सैयद बंधुओं ने रफी-उद-दौला को **शाहजहाँ II** के नाम से राजगद्दी पर बैठाया। यह अफीम का आदी था।

**मुहम्मदशाह (1719-48)**

➤ इसने निजामुल्मुल्क की सहायता से सैयद बन्धुओं को मौत के घाट उतार दिया। तुरानी सैनिक हैदर बेग ने 9 अक्टूबर, 1720 ई. को सैय्यद बन्धु हुसैन अली खाँ की हत्या कर दी। 1724 में निजामुल्मुल्क वजीर बना।

➤ इसके शासन के दौरान 1737 में मराठा पेशवा बाजीराव प्रथम ने दिल्ली पर हमला किया।

➤ इसी के समय ईरान के सम्राट नादिर शाह 1739 में दिल्ली पर आक्रमण किया और करनाल के युद्ध में मुगलों को परास्त किया।

**नोट :** *हैदराबाद की स्थापना तुरानियों ने एवं अवध की स्थापना ईरानियों ने की थी।*

➤ ईरान (फारस) के सम्राट नादिरशाह ने 1739 ई. में दिल्ली पर आक्रमण किया। उस समय दिल्ली का शासक मोहम्मदशाह था। नादिरशाह को **ईरान का नेपोलियन** कहा जाता है।

➤ नादिर शाह लगभग 70 करोड़ रुपये की धनराशि और शाहजहाँ का बनवाया हुआ तख्ते ताऊस (Peacock throne) तथा कोहिनूर हीरा लेकर फारस वापस लौटा।

### **उत्तरकालीन मुगल सम्राट्**

| शासक | अवधि |

|---|---|

| **बहादुरशाह** | 1707-1712 ई. |

| **जहाँदार शाह** | 1712-1713 ई. |

| **फर्रूखसियर** | 1713-1719 ई. |

| **मुहम्मदशाह** | 1719-1748 ई. |

| **अहमदशाह** | 1748-1754 ई. |

| **आलमगीर-II** | 1754-1759 ई. |

| **शाह आलम-II** | 1759-1806 ई. |

| **अकबर-II** | 1806-1837 ई. |

| **बहादुरशाह जफर** | 1837-1857 ई. |

➤ **तख्ते ताऊस (मयूर सिंहासन)** पर बैठने वाला अंतिम मुगल शासक मुहम्मदशाह था।

➤ सुन्दर युवतियों के प्रति अत्यधिक रुझान के कारण **मुहम्मदशाह को रंगीला बादशाह** कहा जाता था। एक संगीतकार के रूप में मोहम्मदशाह ने अनेक ख़यालों की रचना की।

➤ मोहम्मदशाह के शासनकाल में ही हैदराबाद के चिनकिलिच ख़ॉ ने निजाम-उल-मुल्क की उपाधि धारण की और 1725 ई. में स्वतंत्र राज्य की स्थापना की।

**अहमदशाह (1748-54)**

➤ यह एक अयोग्य शासक था। इसने राजकाल के सभी काम उधम बाई को सौंप दिये थे, जिसे किबला-ए-आलम की उपाधि दी गयी।

**आलमगीर-II (1754-59)**

➤ यह जहांदारशाह का पुत्र था। इसी के समय 1757 में प्लासी का युद्ध हुआ।

**शाहजहाँ-III (1759-60)**

➤ इसे मुही-उल-मिल्लत के नाम से भी जाना जाता है। मराठों के हस्तक्षेप से इसे गद्दी से उतार फेंका गया।

**शाहआलम-II (1759-1806)**

➤ इसके शासन काल में दो निर्णायक युद्ध-पानीपत का तीसरा युद्ध (1761) एवं बक्सर का युद्ध (1764) हुए।

➤ पानीपत के तीसरे युद्ध में अहमदशाह अब्दाली ने मराठों को परास्त किया।

➤ 1765 में इलाहाबाद की संधि की शर्तों के अनुरूप शाह आलम-II को ईस्ट इंडिया कंपनी के संरक्षण में इलाहाबाद में रखा गया। इसने कंपनी को बंगाल, बिहार एवं उड़ीसा की दीवानी सौंपने के लिए फरमान भी जारी किया।

➤ 1772 में शाहआलम-II को मराठा दिल्ली ले आए जहाँ वह 1803 तक रहे। 1803 में अंग्रेजों ने दिल्ली पर कब्जा कर लिया।

**नोट :** *अहमदशाह अब्दाली का वास्तविक नाम अहमद खाँ था। उसने आठ बार भारत पर आक्रमण किया।*

➤ गुलाम कादिर खाँ ने 1806 में शाह आलम-II की हत्या करवा दी।

**अकबर-II (1806-37)**

➤ इसने राममोहन राय को राजा की उपाधि से नवाजा। इसके शासन काल के दौरान, 1835 में, ईस्ट इंडिया कंपनी ने स्वयं को मुगल शासक के अधीन कहलाना समाप्त कर दिया और मुगल शासक के नाम पर सिक्के जारी करना बंद कर दिया।

**बहादुरशाह II (1837-57)**

➤ **बहादुरशाह-II (जफर)** अंतिम मुगल सम्राट् था।

➤ 1857 ई. की क्रांति में भाग लेने के कारण अंग्रेजों द्वारा बहादुरशाह जफ़र को बंदी बना लिया गया एवं रंगून भेज दिया।

➤ लाल किला स्थित **हीरा महल** बहादुरशाह जफर ने बनवाया था।

➤ मशहूर शायर मिर्जा गालिब बहादुरशाह जफर के ही समय दिल्ली में रहते थे।

**नोट :** *हयात बख्श बाग लाल किला दिल्ली में स्थित है।*

### **40. भारत में यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों का आगमन**

➤ 17 मई, 1498 ई. में वास्को-डि-गामा ने भारत के पश्चिमी तट पर स्थित **कालीकट** बंदरगाह पहुँचकर भारत एवं यूरोप के बीच नए समुद्री मार्ग की खोज की। इस यात्रा में वास्को-डि-गामा को गुजराती पथ प्रदर्शक अब्दुल मजीद ने सहयोग किया था।

➤ 1505 ई. में फ्रान्सिस्को द अल्मेडा भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय बनकर आया।

➤ 1509 ई. में अल्फांसो द अल्बुकर्क भारत में पुर्तगालियों का वायसराय बना। इसने 1510 ई. में बीजापुर के युसुफ आदिल शाह से गोवा को जीता।

#### **यूरोपीय कम्पनियों की स्थापना**

| कम्पनी | स्थापना वर्ष |

|---|---|

| **पुर्तगाली ईस्ट इंडिया कम्पनी** | 1498 ई. |

| **अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कम्पनी** | 1600 ई. |

| **डच ईस्ट इंडिया कम्पनी** | 1602 ई. |

| **डेनिश ईस्ट इंडिया कम्पनी** | 1616 ई. |

| **फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कम्पनी** | 1664 ई. |

| **स्वीडिश ईस्ट इंडिया कम्पनी** | 1731 ई. |

#### **यूरोपीय कम्पनियों की प्रथम फैक्ट्री**

| कम्पनी | स्थान | वर्ष |

|---|---|---|

| **पुर्तगाली** | कोचीन | 1503 |

| **डच** | मसूलीपट्टनम | 1605 |

| **अंग्रेज** | मसूलीपट्टनम |

 1611 |

| **डेनिस** | त्रावणकोर | 1620 |

| **फ्रांसीसी** | सूरत | 1668 |




➤ पुर्तगालियों ने अपनी पहली व्यापारिक कोठी कोचीन में खोली।

➤ दक्षिणी-पूर्वी तट पर पुर्तगालियों की एक मात्र बस्ती सन-थोमे थी।

➤ पुर्तगालियों के बाद भारत में डच लोग आए। पहला डच यात्री कार्नेलियन हाउटमैन (Cornelis de Houtman) 1596 ई. में भारत के पूर्व सुमात्रा पहुँचा।

➤ डचों ने भारत में अपनी प्रथम व्यापारिक कोठी (फैस्ट्री) 1605 ई. में मसूलीपट्टम में स्थापित की। डचों की दूसरी व्यापारिक कोठी पुलीकट में स्थापित हुई जहाँ उन्होंने अपने स्वर्ण सिक्के (पैगोडा) को ढाला और पुलीकट को ही समस्त गतिविधियों का केन्द्र बनाया। डचों ने भारत में प्रथम वार औद्योगिक वेतनभोगी रखे।

**नोट :** *डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1632 में पटना में अपना कारखाना स्थापित किया था।*

➤ **कोलाचेल की लड़ाई :** इस लड़ाई में त्रावणकोर का राजा मार्तंड वर्मा ने 10 अगस्त, 1741 को एडमिरल यूस्टाचियस डी लैनॉय के नेतृत्व वाली डच ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना को हरा दिया।

➤ डचों का भारत में अन्तिम रूप से पतन 1759 ई. को अंग्रेजों एवं डचों के मध्य हुए **बेदरा युद्ध** से हुआ।

➤ 31 दिसम्बर, 1600 ई. को इंग्लैंड की रानी एलिजाबेथ प्रथम ने ईस्ट इंडिया कम्पनी को अधिकार-पत्र प्रदान किया।

➤ प्रारंभ में ईस्ट इंडिया कम्पनी में 217 साझेदार थे और पहला गवर्नर टॉमस स्मिथ था।

➤ मुगल दरबार में जाने वाला प्रथम अंग्रेज कैप्टन हॉकिन्स था, जो जेम्स प्रथम के राजदूत के रूप में अप्रैल 1609 ई. में जहाँगीर के दरबार में गया था।

**नोट :** *भारत आने वाला पहला अंग्रेजी जहाज रेड ड्रैगन था।*

➤ 1611 ई. में द.-पू. समुद्रतट पर सर्वप्रथम अंग्रेजों ने मसूलीपट्टनम में व्यापारिक कोठी की स्थापना की।

➤ जहाँगीर ने 1613 ई. में एक फरमान जारी कर अंग्रेजों को सूरत में थॉमस एलडवर्थ (Thomas Aldworth) के अधीन व्यापारिक कोठी (फैक्ट्री) खोलने की इजाजत दी।

**नोट :** *पूर्वी तट पर अंग्रेजों ने अपना प्रथम व्यापारिक कोठी मसूलीपट्टम में 1611 ई. में खोला, जबकि पश्चिमी तट पर सूरत में 1613 ई. में व्यापारिक कोठी स्थापित किया। पहली बार सूरत में 1608 ई. में व्यापारिक कोठी स्थापित करने का प्रयास किया गया था।*

➤ 1615 ई. में सम्राट जेम्स-I ने 'सर टॉमस रो' को अपना राजदूत बनाकर मुगल सम्राट जहाँगीर के दरबार में भेजा। वह फरवरी 1619 ई. तक भारत में रहा। उसने जहाँगीर एवं खुर्रम (शाहजहाँ) से अंग्रेजों के लिए कुछ व्यापारिक छूट प्राप्त करने में सफल हुआ।

➤ 1632 ई. में गोलकुण्डा के सुल्तान ने अंग्रेजों को एक सुनहला फरमान (Golden Farman) दिया जिसके अनुसार अंग्रेज सुल्तान को 500 पैगोडा वार्षिक कर देकर गोलकुण्डा राज्य के बन्दरगाह पर स्वतंत्रतापूर्वक व्यापार कर सकते थे।

➤ 1639 ई. में अंग्रेज फ्रांसिस डे ने चन्द्रगिरि के राजा से मद्रास पट्टे पर लिया एवं वहीं एक किलावेन्द कोठी का निर्माण किया; इस कोठी का नाम फोर्ट सेन्ट जॉर्ज पड़ा और यही फोर्ट सेन्ट जॉर्ज कालान्तर में कोरोमंडल तट पर अंग्रेजी मुख्यालय बना।

➤ 1661 ई. में पुर्तगाली राजकुमारी कैथरीन ऑफ ब्रेगेंजा (Catharine of Braganza) एवं ब्रिटेन के राजकुमार 'चार्ल्स द्वितीय' का विवाह हुआ। इस अवसर पर दहेज के रूप में पुर्तगालियों ने चार्ल्स-II को बम्बई प्रदान किया।

➤ 1668 ई. में चार्ल्स-II ने बम्बई को 10 पौण्ड के वार्षिक किराये पर ईस्ट इंडिया को दे दिया।

➤ 1687 ई. में अंग्रेजों ने पश्चिमी तट का मुख्यालय सूरत से हटाकर बम्बई को बनाया।

**नोट :** *गेराल्ड औंगियर (1669-1677 ई.) (सूरत का प्रेसीडेन्ट एवं बम्बई का गवर्नर) ने बम्बई शहर की स्थापना की।*

➤ बंगाल के शासक शाहशुजा ने सर्वप्रथम 1651 ई. में अंग्रेजों को व्यापारिक छूट की अनुमति दी। इस अनुमति को निशान कहते थे।

➤ 1698 ई. में अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कम्पनी ने तीन गाँव—सुतानुती, कालीकट एवं गोविन्दपुर की जमींदारी 1200 रुपये भुगतान कर प्राप्त की और यहाँ पर फोर्ट विलियम का निर्माण किया। चार्ल्स आयर फोर्ट विलियम के प्रथम प्रेसीडेन्ट हुए। कालान्तर में यही कलकत्ता (कोलकाता) नगर कहलाया, जिसकी नींव जॉर्ज चारनाक ने रखी।

➤ भारत में फ्रांसीसियों की प्रथम कोठी फ्रेंको कैरों के द्वारा सूरत में 1668 ई. में स्थापित की गयी।

➤ 1674 ई. में फ्रांसीसी कम्पनी के निदेशक फ्रेंकिस मार्टिन ने वालिकोंडापुर के सूबेदार शेर खाँ लोदी से पुदुचेरी नामक एक गाँव प्राप्त किया, जो कालान्तर में पाण्डिचेरी के नाम से जाना गया।

### **आंग्ल-फ्रांसीसी संघर्ष**

➤ भारत में आंग्ल-फ्रांसीसी संघर्ष को कर्नाटक युद्ध के नाम से जाना जाता है।

➤ **प्रथम कर्नाटक युद्ध (1746-48 ई.) :** 1740 में ऑस्ट्रिया पर उत्तराधिकार को लेकर यूरोप में अंग्रेजों तथा फ्रांसीसियों के मध्य संघर्ष प्रारंभ हुआ। इस संघर्ष के कारण ही भारत में दोनों कंपनियों के मध्य 1746 युद्ध प्रारंभ हो गया। प्रथम कर्नाटक युद्ध के दौरान लड़ा गया सेंट टोमे का युद्ध फ्रांसीसी सेना को जीत मिली। प्रथम कर्नाटक युद्ध यूरोप में 1748 में हुई **एक्स-ला-शापल की संधि** से समाप्त हुआ। इस संधि से ऑस्ट्रिया का उत्तराधिकार का विवाद आपसी सहमति से सुलझा लिया गया।

➤ **द्वितीय कर्नाटक युद्ध (1749-1754) :** इस युद्ध का कारण हैदराबाद एवं कर्नाटक के उत्तराधिकार विवाद बना।

➤ हैदराबाद और कर्नाटक में चल रहे इन विवादों से राजनीतिक बढ़त बनाते हेतु **डूपले** ने हैदराबाद में मुजफ्फरजंग और कर्नाटक में चंदा साहब का साथ दिया। अपरिहार्य रूप से अंग्रेजों को नासिरजंग एवं अनवरुद्दीन का सहयोग करना पड़ा।

★ **हैदराबाद :** आसफजाह की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार को लेकर नासिरजंग (पुत्र) और भतीजे मुजफ्फरजंग के मध्य विवाद खड़ा हो गया।

★ **कर्नाटक :** कर्नाटक के नवाब अनवरुद्दीन तथा उसके बहनोई चन्दा साहिब के मध्य विवाद शुरू हुआ।

➤ 1749 में फ्रेंच सेना की सहायता से एक युद्ध में अनवरुद्दीन मारा गया तथा चंदा साहब कर्नाटक का अगला नवाब बना।

**नोट :** *1750 में नासिरजंग भी फ्रेंच सेना से संघर्ष करता हुआ मारा गया और मुजफ्फरजंग हैदराबाद का नवाब बना।*

➤ अनवरुद्दीन के पुत्र मुहम्मद अली युद्ध से भागकर त्रिचनापल्ली में शरण ली। फ्रांसीसियों ने चन्दा साहब की सेना के साथ मिलकर मुहम्मद अली के दुर्ग को घेर लिया। क्लाइव इस घेरे को तोड़ने में असफल रहा तो उसने दबाव कम करने के लिए कर्नाटक की राजधानी अर्कट पर अधिकार कर लिया।

#### **कर्नाटक युद्ध : एक नजर में**

➤ **प्रथम कर्नाटक युद्ध 1746-48 ई.** में ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकार युद्ध से प्रभावित था। 1748 ई. में हुई **ए-ला-शापल की संधि** के द्वारा ऑस्ट्रिया का उत्तराधिकार युद्ध समाप्त हो गया और इसी संधि के तहत प्रथम कर्नाटक युद्ध समाप्त हुआ।

➤ **दूसरा कर्नाटक युद्ध 1749-1754 ई.** में हुआ। इस युद्ध में फ्रांसीसी गवर्नर डूपले की हार हुई। उसे वापस बुला लिया गया और उसकी जगह पर **गोदेहू** को भारत में अगला फ्रांसीसी गवर्नर बनाया गया। **पांडिचेरी की संधि (जनवरी, 1755 ई.)** के साथ युद्ध-विराम हुआ।

➤ **कर्नाटक का तीसरा युद्ध 1756-1763 ई.** के बीच हुआ जो 1756 ई. में शुरू हुए **सप्तवर्षीय युद्ध** का ही एक अंश था। **पेरिस की संधि** होने पर यह युद्ध समाप्त हुआ।


➤ 1752 में स्ट्रिंगर लारेंस के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने त्रिचनापल्ली को बचा लिया और फ्रांसीसी सेना ने अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इस हार के कारण डुप्ले को वापस फ्रांस बुला लिया गया और 1754 में गोडाहूं अगला फ्रांसीसी गवर्नर बनकर आया।

➤ जनवरी, 1755 में पांडिचेरी संधि के साथ यह युद्ध समाप्त हुआ।

➤ 1760 ई. में अंग्रेजी सेना ने सर आयरकूट के नेतृत्व में वांडीवाश की लड़ाई में फ्रांसीसियों को बुरी तरह हराया।

➤ 1761 ई. में अंग्रेजों ने पांडिचेरी को फ्रांसीसियों से छीन लिया।

➤ 1763 ई. में हुई पेरिस संधि के द्वारा अंग्रेजों ने चन्द्रनगर को छोड़कर शेष अन्य प्रदेशों को लौटा दिया, जो 1749 ई. तक फ्रांसीसी कब्जे में थे, ये प्रदेश भारत की आजादी तक फ्रांसीसियों के कब्जे में रहे।

### **41. बंगाल पर अंग्रेजों का आधिपत्य**

➤ मुगल साम्राज्य के अन्तर्गत आनेवाले प्रांतों में बंगाल सर्वाधिक सम्पन्न राज्य था।

➤ मुर्शिद कुली खाँ स्वतंत्र शासक था, परन्तु वह नियमित रूप से मुगल बादशाह को राजस्व भेजता था।

➤ मुर्शिद कुली खाँ ने अपनी राजधानी ढाका से मुर्शिदाबाद (भागीरथी नदी के तट पर) स्थानान्तरित की। इसने इजारेदारी प्रथा प्रारंभ की तथा कृषकों को तकावी ऋण (खेती के लिए अग्रिम कर्ज) प्रदान किया। इसका उत्तराधिकारी इसका दामाद शुजाउद्दीन हुआ।

#### **बंगाल के नवाब**

 1. **मुर्शिद कुली खाँ** — 1713-1727 ई.

 2. **शुजाउद्दीन** — 1727-1739 ई.

 3. **सरफराज खाँ** — 1739-1740 ई.

 4. **अलीवर्दी खाँ** — 1740-1756 ई.

 5. **सिराजुद्दौला** — 1756-1757 ई.

 6. **मीर जाफर** — 1757-1760 ई.

 7. **मीर कासिम** — 1760-1763 ई.

 8. **मीर जाफर** — 1763-1765 ई.

 9. **निजाम-उद्दौला** — 1765-1766 ई.

 10. **सैफ-उद्दौला** — 1766-1770 ई.

 11. **मुबारक-उद्दौला** — 1770-1775 ई.

➤ **1740 ई. के गिरिया के युद्ध** में सरफराज को मारकर बिहार के सर सूबेदार अलीवर्दी खाँ बंगाल का नवाब बना। इसने अपने शासनकाल में मुगलों को राजस्व देना बंद कर दिया। इसके शासनकाल में बंगाल इतना समृद्धशाली बन गया कि बंगाल को **भारत का स्वर्ग** कहा जाने लगा। इसका उत्तराधिकारी इसका दामाद सिराजुद्दौला हुआ।

➤ **20 जून, 1756 ई.** को **कालकोठरी की त्रासदी (Black Hole Tragedy)** नामक घटना घटी। इस घटना के रचयिता जेड. हालवेल के अनुसार नवाब सिराजुद्दौला ने 20 जून की रात में 146 अंग्रेज व्यक्तियों को एक छोटी-सी कोठरी में बंद कर दिया था। अगले दिन सुबह 146 में से केवल 23 व्यक्ति जिन्दा बचे थे।

➤ **प्लासी का युद्ध 23 जून, 1757 ई.** को अंग्रेजों के सेनापति रॉबर्ट क्लाइव एवं बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के बीच हुआ जिसमें नवाब अपने सेनापति मीर जाफर की धोखाधड़ी के कारण पराजित हुआ। अंग्रेजों ने मीर जाफर को बंगाल का नवाब बनाया।

**नोट :** *प्लासी की लड़ाई में मोहनलाल एवं मीर मदान के नेतृत्व में एक छोटी सेना नवाब के वफादार रही। मीर मदान लड़ते हुए मारा गया। प्लासी भागीरथी नदी के किनारे है।*

➤ क्लाइव के हाथों की कठपुतली नवाब मीर जाफर को अंग्रेजों ने **1760 ई.** में हटाकर उसके दामाद **मीर कासिम** को बंगाल का नवाब बनाया। मीर कासिम ने अपनी राजधानी को मुर्शिदाबाद से **मुंगेर (मुद्गलपुर)** स्थानान्तरित किया।

**नोट :** *बंगाल के राजधानी का क्रम है— **ढाका, मुर्शिदाबाद एवं मुंगेर**।*

➤ **बक्सर का युद्ध 1764 ई.** में अंग्रेजों एवं मीर कासिम, अवध के नवाब शुजाउद्दौला एवं मुगल सम्राट् शाह आलम द्वितीय के बीच हुआ। इस युद्ध में भी अंग्रेज विजयी हुए। इस युद्ध में अंग्रेज सेनापति हेक्टर मुनरो था।

### **42. अंग्रेजों के मैसूर से संबंध**

➤ **1761 ई.** में हैदर अली मैसूर का शासक बना।

➤ हैदर अली की मृत्यु **1782 ई.** में द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध के दौरान हो गयी। हैदर अली का उत्तराधिकारी उसका पुत्र टीपू सुल्तान हुआ।

➤ **1787 ई.** में टीपू ने अपनी राजधानी श्रीरंगपट्टनम में 'बादशाह' की उपाधि धारण की। इसने अपनी राजधानी श्रीरंगपट्टनम में स्वतंत्रता का वृक्ष लगवाया और साथ ही जैकोबिन क्लब का सदस्य बना।

#### **प्रमुख युद्ध**

| युद्ध | वर्ष | गवर्नर जनरल |

|---|---|---|

| **प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध** | 1767-69 ई. | - |

| **द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध** | 1780-84 ई. | वारेन हेस्टिंग्स |

| **तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध*** | 1790-92 ई. | कार्नवालिस |

| **चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध** | 1799 ई. | लॉर्ड वेलेजली |

★ *इस युद्ध में मराठा, हैदराबाद के निजाम एवं अंग्रेजों की संयुक्त सेना मैसूर के खिलाफ लड़ रही थी।*

➤ टीपू की मृत्यु श्रीरंगपट्टम की आखिरी युद्ध यानी **चतुर्थ आंग्ल-मैसूर युद्ध के दौरान 1799 ई.** में हो गयी। टीपू सुल्तान को **शेर-ए-मैसूर** कहा जाता था।

➤ टीपू सुल्तान के राजसी झंडे पर शेर की तस्वीर होती थी।

**नोट :** *1760 ई. में वांडीवाश का युद्ध हुआ, जिसमें अंग्रेजों ने सर आयरकूट के नेतृत्व में, लाली के नेतृत्व वाली फ्रांसीसी सेना को पराजित किया।*

#### **महत्वपूर्ण संधियाँ**

| संधि | किसके बीच / स्थान | वर्ष |

|---|---|---|

| **प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध** | मद्रास की संधि | 1769 ई. |

| **द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध** | मंगलोर की संधि | 1784 ई. |

| **तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध** | श्रीरंगपट्टनम की संधि | 1792 ई. |

### **43. सिख एवं अंग्रेज**

➤ सिख सम्प्रदाय की स्थापना का श्रेय **गुरु नानक (प्रथम गुरु)** को है। गुरु नानक के अनुयायी ही सिख कहलाए। ये बादशाह बाबर एवं हुमायूँ के समकालीन थे।

➤ 1496 ई. की कार्तिक पूर्णिमा को नानक को आध्यात्मिक पुनर्जीवन का आभास हुआ।

➤ गुरुनानक ने **गुरु का लंगर** नामक निःशुल्क सहभागी भोजनालय स्थापित किए। गुरुनानक ने अनेक स्थानों पर **संगत (धर्मशाला)** और **पंगत (लंगर)** स्थापित किए।

➤ संगत और पंगत ने गुरुनानक के अनुयायियों के लिए एक संस्था का कार्य किया, जहाँ वे प्रतिदिन मिलते थे।

➤ गुरु नानक की **1538 ई.** में करतारपुर में मृत्यु हो गयी।

➤ **गुरु अंगद (1539-52 ई.)** सिखों के दूसरे गुरु थे। इनका प्रारंभिक नाम **लहना** था।

➤ इन्होंने नानक द्वारा शुरू की गई लंगर-व्यवस्था को स्थायी बना दिया।

➤ **गुरुमुखी लिपि** का आरंभ गुरु अंगद ने किया।

➤ सिखों के तीसरे गुरु **अमरदास (1552-1574 ई.)** थे।

➤ गुरु अमरदास ने हिन्दुओं से पृथक् होनेवाले कई कार्य किए। हिन्दुओं से अलग विवाह पद्धति **लवन** को प्रचलित किया।

➤ अकबर ने गुरु अमरदास से गोविन्दवाल जाकर भेंट की और गुरु-पुत्री बीबी भानी को कई गाँव दान में दिए।

➤ अमरदास ने 22 गद्दियों की स्थापना की और प्रत्येक पर एक महन्त की नियुक्ति की।

➤ बीबी के पति **रामदास (1574-1581 ई.)** सिखों के चौथे गुरु हुए। अकबर ने बीबी भानी को 500 बीघा भूमि दी। गुरु रामदास ने इसी भूमि पर अमृतसर नामक जलाशय खुदवाया और अमृतसर नगर की स्थापना की। गुरु रामदास ने अपने तीसरे पुत्र अर्जुन को गुरु का पद सौंपा। इस प्रकार इन्होंने गुरु-पद को पैतृक बनाया।


➤ **गुरु अर्जुन (1581-1606 ई.)** सिखों के पाँचवें गुरु हुए। इन्होंने सिखों के धार्मिक ग्रंथ **आदिग्रंथ** की रचना की। इसमें गुरु नानक की प्रेरणाप्रद प्रार्थनाएँ और गीत संकलित हैं।

**नोट :** *गुरु ग्रंथ साहिब यानी आदिग्रंथ में सिख गुरुओं के साथ-साथ कबीर, नामदेव एवं रैदास की रचनाओं को भी सम्मिलित किया गया है।*

➤ गुरु अर्जुन ने अमृतसर जलाशय के मध्य में **हरमन्दर साहब** का निर्माण कराया।

➤ राजकुमार खुसरो की सहायता करने के कारण जहाँगीर ने **1606 ई.** में गुरु अर्जुन को मरवा दिया।

➤ सिखों के छठे गुरु **हरगोविन्द (1606-1645 ई.)** हुए। इन्होंने सिखों को सैन्य संगठन का रूप दिया तथा **अकाल तख्त** या **ईश्वर के सिंहासन** का निर्माण करवाया।

➤ ये दो तलवार बाँधकर गद्दी पर बैठते थे एवं दरबार में नगाड़ा बजाने की व्यवस्था की। इन्होंने अमृतसर की किलेबंदी की।

➤ सिखों के सातवें गुरु **हरराय (1645-61 ई.)** हुए। इन्होंने दारा शिकोह को मिलने आने पर आशीर्वाद दिया।

➤ सिखों के आठवें गुरु **हरकिशन (1661-64 ई.)** हुए। इनकी मृत्यु चेचक से हो गयी। इन्हें दिल्ली जाकर गुरुपद के बारे में औरंगजेब को समझाना पड़ा था।

➤ सिखों के नौवें गुरु **तेगबहादुर (1664-75 ई.)** हुए। इस्लाम स्वीकार नहीं करने के कारण औरंगजेब ने इन्हें वर्तमान शीशगंज में गुरुद्वारा के निकट मरवा दिया।

➤ सिखों के दसवें एवं अंतिम गुरु, **गुरु गोविन्द सिंह (1675-1708 ई.)** हुए। इनका जन्म **1666 ई.** में पटना में हुआ था।

➤ गुरुगोविन्द सिंह अपने को **सच्चा पादशाह** कहा। इन्होंने सिखों के लिए पाँच 'ककार' अनिवार्य किया अर्थात् प्रत्येक सिख को केश, कंघा, कृपाण, कच्छा और कड़ा रखने की अनुमति दी और सभी लोगों को अपने नाम के अन्त में 'सिंह' शब्द जोड़ने के लिए कहा।

➤ गुरुगोविन्द सिंह का निवास स्थान आनंदपुर साहिब था एवं कार्यस्थली पाऊँता थी।

➤ गुरुगोविन्द सिंह ने फारसी में **जफरनामा** लिखे थे।

➤ इनके दो पुत्र फतह सिंह एवं जोरावर सिंह को सरहिंद के मुगल फौजदार वजीर खाँ ने दीवार में चिनवा दिया।

➤ **1699 ई.** में वैशाखी के दिन गुरुगोविन्द सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की। पाहुल प्रणाली की शुरुआत भी गुरुगोविन्द सिंह ने की।

➤ गुरुगोविन्द सिंह ने सिखों के धार्मिक ग्रंथ आदिग्रंथ को वर्तमान रूप दिया और कहा कि अब 'गुरुवाणी' सिख सम्प्रदाय के गुरु का कार्य करेगी।

➤ गुरुगोविन्द सिंह की हत्या **1708 ई.** में नांदेड़ नामक स्थान पर **गुुल खाँ** नामक पठान ने कर दी।

➤ **बन्दा बहादुर :** इनका जन्म 1670 ई. में पूँछ जिले के रजौली गाँव में हुआ था। इसके बचपन का नाम लक्ष्मणदास था। इनके पिता रामदेव भारद्वाज राजपूत थे।

➤ बन्दा का उद्देश्य पंजाब में एक सिख राज्य स्थापित करने का था। इसके लिए इन्होंने **लौहगढ़** को राजधानी बनाया। इन्होंने गुरुनानक एवं गुरुगोविन्द सिंह नाम के सिक्के चलवाए।

➤ बन्दा ने सरहिन्द के मुगल फौजदार वजीर खाँ की हत्या कर दी।

➤ मुगल बादशाह **फर्रूखसियर** के आदेश पर **1716 ई.** में बन्दा सिंह को गुरुदासपुर नांगल नामक स्थान पर पकड़कर मौत के घाट उतार दिया गया।

➤ शाहदरा **कत्लगढ़ी** के नाम से विख्यात है जहाँ बन्दा ने हजारों मुगल सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था।

➤ बन्दा की मृत्यु के बाद सिख कई छोटे-छोटे टुकड़ों में बँट गए थे, **1748 ई.** में नवाब कपूर सिंह की पहल पर सभी सिख टुकड़ियों का **दल खालसा** में विलय हुआ।

➤ दल खालसा को जस्सा सिंह आहलुवालिया के नेतृत्व में रखा गया, जिसे बाद में बारह दलों में विभाजित किया गया। इसे **मिसल** कहा गया।

➤ मिसल अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ **'समान'** होता है।

➤ **रणजीत सिंह :** रणजीत सिंह का जन्म गुजरोंवाला में 2 नवम्बर, 1780 ई. को सुकरचकिया मिसल के मुखिया महासिंह के यहाँ हुआ था। इनके दादा चरतसिंह ने 12 मिसलों में सुकरचकिया मिसल को प्रमुख स्थान दिला दिया।

➤ 1798-99 ई. में रणजीत सिंह **लाहौर** का शासक बना। 25 अप्रैल, 1809 ई. को चार्ल्स मेटकाफ और महाराजा रणजीत सिंह के बीच **अमृतसर की संधि** हुई।

➤ रणजीत सिंह का राज्य चार सूबों में बँटा था—पेशावर, कश्मीर, मुल्तान एवं लाहौर।

➤ महाराजा रणजीत सिंह का विदेश मंत्री **फकीर अजीजुद्दीन** एवं वित्त मंत्री **दीनानाथ** था।

➤ 7 जून, 1839 ई. में रणजीत सिंह की मृत्यु हो गयी।

➤ **प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध 1845-46 ई.** में एवं **द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध 1849 ई.** में हुआ।

#### **अंग्रेजों एवं सिखों के मध्य हुई संधि :**

 1. **लाहौर की संधि :** 9 मार्च, 1846 ई.

 2. **भैरोंवाल की संधि :** 22 दिसम्बर, 1846 ई.। इस संधि के तहत राजा दलीप सिंह के संरक्षण हेतु अंग्रेजी सेना का प्रवास पंजाब में मान लिया गया।

➤ 20 अगस्त, 1847 ई. को महारानी जिंदा को राजा दलीप सिंह से अलग कर ₹48,000 वार्षिक पेंशन देकर शेखुपूरा भेज दिया गया।

➤ द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध के दौरान पहली लड़ाई **चिलियानवाला की लड़ाई** सिख नेता शेर सिंह एवं अंग्रेज कमांडर गफ के मध्य लड़ी गयी। दूसरी लड़ाई गुजरात के चिनाव नदी के किनारे चार्ल्स नेपियर के नेतृत्व में अंग्रेजों ने 21 फरवरी, 1849 को लड़ी। इस युद्ध में सिख बुरी तरह पराजित हुए।

➤ **लॉर्ड डलहौजी की 29 मार्च, 1849 की घोषणा द्वारा संपूर्ण पंजाब का विलय अंग्रेजी राज्य में कर लिया।** महाराजा दलीप सिंह को 50,000 पौंड की वार्षिक पेंशन दे दी गयी और उसे शिक्षा प्राप्त करने के लिए इंग्लैंड भेज दिया गया। सिख राज्य का प्रसिद्ध **हीरा कोहिनूर को महारानी विक्टोरिया** को भेज दिया गया।

### **44. कम्पनी के अधीन गवर्नर-जनरल**

**बंगाल के गवर्नर**

**रॉबर्ट क्लाइव (1757-60 ई. एवं पुनः 1765-67 ई.)**

➤ इसने बंगाल में **द्वैध शासन** की व्यवस्था की, जिसके तहत राजस्व वसूलने, सैनिक संरक्षण एवं विदेशी मामले कम्पनी के अधीन थे, जबकि शासन चलाने की जिम्मेवारी नवाब के हाथों में थी।

➤ इसने मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय को इलाहाबाद की संधि (1765 ई.) के द्वारा कम्पनी के संरक्षण में ले लिया। इस संधि के जरिए ईस्ट इंडिया कंपनी को देश की राजनीतिक और संवैधानिक व्यवस्था में दखल देने का अवसर मिल गया और यहीं से भारत में ब्रिटिश शासन की नींव पड़ी।

➤ रॉबर्ट क्लाइव ने बंगाल के समस्त क्षेत्र के लिए दो उप-दीवान, बंगाल के लिए **मुहम्मद रज़ा खाँ** और बिहार के लिए **राजा शिताब राय** को नियुक्त किया।

➤ अन्य गवर्नर **वरेलास्ट (1767-69 ई.)**, **कार्टियर (1769-72 ई.)**, **वारेन हेस्टिंग्स (1772-74 ई.)**।

**कम्पनी के अधीन गवर्नर-जनरल**

➤ **रेगुलेटिंग एक्ट 1773 ई.** के अनुसार बंगाल के गवर्नर को अब अंग्रेजी क्षेत्रों का गवर्नर-जनरल कहा जाने लगा, जिसका कार्यकाल 5 वर्षों का निर्धारित किया गया। मद्रास एवं बम्बई के गवर्नर को इसके अधीन कर दिया गया। इस प्रकार भारत में कम्पनी के अधीन **प्रथम गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स (1774-85 ई.)** हुआ।


➤ वारेन हेस्टिंग्स 1750 ई. में कम्पनी के एक क्लर्क के रूप में कलकत्ता आया था और अपनी कार्यकुशलता के कारण कासिम बाजार का अध्यक्ष, बंगाल का गवर्नर एवं कम्पनी का गवर्नर-जनरल बना।

**वारेन हेस्टिंग्स (1774-85 ई.)**

➤ इसने राजकीय कोषागार को मुर्शिदाबाद से हटाकर कलकत्ता लाया।

➤ **1772 ई.** में इसने प्रत्येक जिले में एक फौजदारी व दीवानी अदालत की स्थापना की। फौजदारी अदालतें सदर निजामत अदालत द्वारा निरीक्षित होती थी। नाजिर द्वारा नियुक्त दरोगा अदालत की अध्यक्षता करता था। दीवानी अदालत में कलक्टर मुख्य न्यायाधीश होता था। जिला फौजदारी अदालत एक भारतीय अधिकारी के अधीन होती थी जिसकी सहायता के लिए एक मुफ्ती और एक काजी होता था। कलक्टर इस न्यायालय के कार्य की देखभाल करता था।

➤ कलकत्ता में एक **सदर दीवानी अदालत** और एक **सदर फौजदारी अदालत** की स्थापना की गयी। सदर दीवानी अदालत में कलकत्ता कौंसिल का सभापति और उसी कौंसिल का दो सदस्य राय रायन और मुख्य कानूनगो की सलाह से न्याय करते थे। सदर फौजदारी अदालत में नाइव-निजाम, मुख्य काजी, मुफ्ती और तीन मौलवियों की सलाह से न्याय करते थे। जिले की दीवानी और फौजदारी आदालतों के मुकदमे अन्तिम निर्णय के लिए सदर अदालतों में भेजे जाते थे।

➤ दीवानी मुकदमों में जातीय कानून अर्थात् हिन्दुओं के संबंध में हिन्दू-कानून और मुसलमान के लिए मुस्लिम कानून लागू किया जाता था, जबकि फौजदारी मुकदमों में मुस्लिम कानून लागू किया जाता था।

➤ **1772 में कोर्ट ऑफ डॉयरेक्टरों ने द्वैध प्रणाली को समाप्त करने** तथा कम्पनी को बंगाल, बिहार तथा उड़ीसा प्रान्त की शासन व्यवस्था का उत्तरदायित्व संभालने का आदेश दिया। वारेन हेस्टिंग्स ने दोनों उपदीवानों, मुहम्मद रजाखाँ तथा राजा शिताबराय को पद से हटा दिया गया।

➤ **1772 में वारेन हेस्टिंग्स ने एक नयी भू-राजस्व पद्धति लागू की**, जिसे **इजारेदारी प्रथा** के नाम से जाना जाता है। इस पद्धति को अपनाने का मुख्य उद्देश्य अधिक भूराजस्व वसूल करना था। इसकी मुख्य विशेषताएँ थीं— (i) इसमें पंचवर्षीय ठेके की व्यवस्था थी और (ii) इसके अंतर्गत उच्चतम बोली लगाने वाले को लगान वसूली का अधिकार दिया गया।

➤ हेस्टिंग्स ने नवाब की देखभाल के लिए मीरजाफर की विधवा **मुन्नी बेगम** को उसका संरक्षक नियुक्त किया। 1775 में मुन्नी बेगम को हटाकर **मुहम्मद रज़ा खाँ** को नवाब का संरक्षक नियुक्त किया गया।

➤ **1776 में मनुस्मृति का अंग्रेजी अनुवाद 'ए कोड ऑफ जेन्टू लॉज' (A Code of Gentoo Laws)** के नाम से हुआ। विलियम विल्किन्स ने 1785 में भगवद्गीता का



**रैयतवाड़ी व्यवस्था**

रैयतवाड़ी व्यवस्था : किसानों के साथ व्यक्तिगत रूप से किए गए लगान समझौते को रैयतवाड़ी कहा गया है। इस व्यवस्था के अन्तर्गत ब्रिटिश भारत की 51% भूमि आई। 1792 ई० में रैयतवाड़ी व्यवस्था बारामहल जिले में पहली बार कर्नल रीड द्वारा लागू की गई। 1820 ई० में यह व्यवस्था मद्रास में लागू कर दी गई और इसे सुचारू रूप से चलाने के लिए मुनरो को मद्रास का गवर्नर नियुक्त किया गया। 1825 में यह व्यवस्था बम्बई में लागू कर दी गई तथा 1858 तक यह व्यवस्था सम्पूर्ण दक्कन और अन्य क्षेत्रों में लागू कर दी गई।

इस व्यवस्था की मुख्य विशेषताएँ निम्न थीं—

 1. सरकार और किसान के बीच कोई बिचौलिया वर्ग नहीं था।

 2. भूमि का स्वामित्व किसानों को दिया गया जिससे वे भूमि का विक्रय कर सकते थे एवं गिरवी रख सकते थे।

 3. लगान की अदायगी न होने पर भूमि जब्त की जा सकती थी।

 4. लगान अदायगी की प्रत्येक 30 वर्ष बाद पुनर्मीक्षा करने की व्यवस्था की गई थी।

 5. राजस्व के रूप में किसानों को उपज का \frac{1}{2} भाग देना था, जो धन के रूप में देना होता था।

**महालवाड़ी व्यवस्था**

महाल शब्द से तात्पर्य है जागीर अथवा गाँव। इस पद्धति में सरकार ने राजस्व के लिए कृषकों से सीधा सम्पर्क नहीं किया बल्कि गाँव या जागीरों के मुखिया या लम्बरदार को राजस्व वसूली का आधार बनाया। 1822 ई० में यह व्यवस्था प्रारंभ की गई। यह व्यवस्था गंगा की घाटी, आधुनिक पश्चिमी उत्तरप्रदेश, मध्य भारत के कुछ भाग तथा तत्कालीन सम्पूर्ण पंजाब में लागू की गयी। इस व्यवस्था में पहली बार लगान तय करने के लिए मानचित्रों तथा पंजियों का प्रयोग किया। इस व्यवस्था का जन्मदाता हाल्ट मैकेन्जी हुए। 1833 ई० में मार्टिन बर्ड तथा जेम्स टॉमसन के बंदोबस्त में यह अपने सबसे अच्छे रूप में सामने आई। प्रारंभ में इस व्यवस्था में लगान उत्पादन का दो-तिहाई भाग था। बाद में इसे घटाकर उत्पादन का \frac{1}{2} भाग यानी 50% कर दिया गया।

**भू-राजस्व संग्रह करने की विधियाँ**

| | जमींदारी | रैयतवाड़ी | महालवाड़ी |

|---|---|---|---|

| **क्षेत्रफल** | 19% | 51% | 30% |

| **पक्ष** | जमींदार | किसान | मुखिया या लम्बरदार |

| **योजनाकार** | लॉर्ड कॉर्नवालिस व जॉन शोर | रीड, टॉमस मुनरो | हाल्ट मैकेन्जी |

 * कॉर्नवालिस को भारत में नागरिक सेवा का जनक माना जाता है।

**सर जॉन शोर (1793-98 ई.)**

 * इसने अहस्तक्षेप नीति अपनाई। इसी के कार्यकाल के दौरान 1795 ई. में बंगाल नियम-21 के तहत नवजात कन्याओं की हत्या किए जाने को बाकी हत्याओं के समान ही अपराध घोषित कर दिया गया।

**लॉर्ड वेलेजली (1798-1805 ई.)**

 * इसने सहायक संधि की पद्धति शुरू की। भारत में सहायक संधि का प्रयोग वेलेजली से पूर्व फ्रांसीसी गवर्नर डूप्ले ने किया था।

 * सहायक संधि करनेवाले राज्य थे—हैदराबाद (1798 ई.), मैसूर (1799 ई.), तंजौर (अक्टूबर, 1799 ई.), अवध (1801 ई.), पेशवा (दिसम्बर, 1802 ई.), बरार एवं भोंसले (दिसम्बर, 1803 ई.), सिंधिया (1804 ई.) एवं अन्य सहायक संधि करनेवाले राज्य जोधपुर, जयपुर, मच्छेद्री, बूँदी तथा भरतपुर।

 * *नोट : इंदौर के होल्करों ने सहायक संधि स्वीकार नहीं की थी।*

 * टीपू सुल्तान चौथे आंग्ल-मैसूर युद्ध (1799 ई.) में मारा गया।

 * इसके शासन काल के दौरान 1804 ई. में नियम-3 के अंतर्गत शिशु वध को बाकी हत्या की तरह ही मानते हुए दंड का प्रावधान कर दिया गया।

 * इसी ने (1800 ई.) कलकत्ता में नागरिक सेवा में भर्ती किए गए युवकों को प्रशिक्षित करने के लिए फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना की, जो 1854 तक अंग्रेजों को भारतीय भाषाओं की शिक्षा देने के लिए चलता रहा।

 * *नोट : 1806 में भारत भेजे जाने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए इंग्लैंड में हेलेबरी में एक ईस्ट इंडिया कॉलेज खोला गया जहाँ नवयुवक प्रशासनिक अधिकारियों को दो वर्ष का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की गयी।*

 * यह स्वयं को बंगाल का शेर कहा करता था।

 * लॉर्ड कॉर्नवालिस का (1805 ई.) दूसरा कार्यकाल शुरू हुआ, परन्तु शीघ्र ही इसकी मृत्यु हो गयी।

**सर जॉर्ज वार्लो (1805-1807 ई.)**

 * 1806 ई. में वेल्लौर में हुई सिपाही विद्रोह इसके काल की महत्वपूर्ण घटना है।

**लॉर्ड मिन्टो प्रथम (1807-1813 ई.)**

 * इसके काल में रणजीत सिंह एवं अंग्रेजों के बीच 25 अप्रैल, 1809 को अमृतसर की संधि (मध्यस्थता चार्ल्स मेटकॉफ) हुई। इसी के समय चार्टर एक्ट 1813 ई. पास हुआ।

**लॉर्ड हेस्टिंग्स (1813-1823 ई.)**

 * इसी के समय आंग्ल-नेपाल युद्ध 1814-16 ई. में हुई; इसमें नेपाल के अमर सिंह थापा को आत्मसमर्पण करना पड़ा। मार्च, 1816 ई. में अंग्रेजों एवं गोरखों के बीच संगोली की संधि के द्वारा आंग्ल-नेपाल युद्ध का अंत हुआ।

 * इसके समय में पिंडारियों का दमन कर दिया गया। पिंडारियों के प्रमुख नेताओं में वासिल मुहम्मद, चीतू एवं करीम खाँ थे।

 * इसने मराठों की शक्ति को अंतिम रूप से नष्ट कर दिया।

 * इसने प्रेस पर लगे प्रतिबंध को समाप्त कर प्रेस के मार्गदर्शन के लिए नियम बनाए।

 * इसी के समय 1822 ई. का टेनेन्सी एक्ट या काश्तकारी अधिनियम लागू किया गया।

**लॉर्ड एमहर्स्ट (1823-1828 ई.)**

 * इसके समय में प्रथम आंग्ल-वर्मा युद्ध (1824-1826 ई.) लड़ा गया।

 * 1826 ई. में वर्मा एवं अंग्रेजों के बीच याण्डबू की संधि हुई।

 * 1824 ई. में बैरकपुर का सैन्य विद्रोह भी इसी के समय में हुआ।

**लॉर्ड विलियम बैंटिक (1828-1835 ई.)**

 * 1803 ई. में यह मद्रास का गवर्नर था; इसी के समय 1806 ई. में माथे पर जातीय चिह्न न लगाने तथा कानों में बालियाँ न पहनने देने पर वेल्लौर के सैनिकों ने विद्रोह कर दिया।

 * 1833 ई. के 'चार्टर एक्ट' द्वारा बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल बना दिया गया। इस प्रकार भारत का पहला गवर्नर-जनरल लॉर्ड विलियम बैंटिक हुआ।

 * *नोट : बंगाल का प्रथम गवर्नर जनरल बारेन हेस्टिंग्स था।*

 * राजा राममोहन राय के सहयोग से बैंटिक ने 1829 ई. में सती-प्रथा को समाप्त कर दिया। बैंटिक ने इस प्रथा के खिलाफ कानून बनाकर 1829 ई. में धारा 17 के द्वारा विधवाओं के सती होने को अवैध घोषित कर दिया।

 * *नोट : अकबर और मराठा पेशवाओं ने भी सती-प्रथा पर रोक लगाने का प्रयास किया था।*

 * बैंटिक ने कर्नल स्लीमेन की सहायता से 1830 ई. तक ठगी प्रथा को समाप्त कर दिया। ठग देवी काली की पूजा करते थे।

 * सन् 1835 ई. में बैंटिक ने कलकत्ता में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज की स्थापना की।


 * इसी के समय मैकाले की अनुशंसा पर अंग्रेजी को शिक्षा का माध्यम बनाया गया। मैकाले के अध्यक्षता वाले लॉ कमीशन (विधि-आयोग) ने कानूनों के कोडीकरण का प्रयास किया।

 * *नोट : भारतीय शिक्षा पर मैकाले का कार्यवृत 1835 ई. को भारत में पाश्चात्य शिक्षा का प्रारंभ माना जा सकता है।*

 * बैंटिक ने 1831 ई. में मैसूर तथा 1834 ई. में कुर्ग एवं मध्यकचेर को हड़प लिया।

 * इसने भारतीयों को उत्तरदायी पदों पर नियुक्त किया। इसके समय में भारतीयों को प्रदान किया गया उच्चतम पद सदर अमीन का था जिसे 700 रु. प्रति माह तनख्वाह मिलती थी।

 * इसके समय कम्पनी के 1833 के चार्टर एक्ट द्वारा यह निश्चित किया गया कि धर्म, जाति, रंग अथवा जन्म के आधार पर किसी व्यक्ति को कंपनी की सेवा में प्रवेश करने से नहीं रोका जाएगा।

 * इसने शिशु बालिका की हत्या पर भी प्रतिबंध लगा दिया।

**चार्ल्य मेटकॉफ (1835-1836 ई.)**

 * इसने अपने एक वर्ष के कार्यकाल में प्रेस पर से नियंत्रण हटाया। इसीलिए इसे भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता कहा जाता है।

**लॉर्ड ऑकलैण्ड (1836-1842 ई.)**

 * इसके समय की सबसे महत्वपूर्ण घटना है—प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध (1839-42 ई.)।

 * 1839 ई. में इसने कलकत्ता से दिल्ली तक ग्रैंड ट्रंक रोड का मरम्मत करवाया।

 * इसी के समय में भारतीय विद्यार्थियों को डॉक्टरी की शिक्षा हेतु विदेश जाने की अनुमति ब्रिटिश संसद ने प्रदान की।

**लॉर्ड एलिनबरो (1842-1844 ई.)**

 * प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध समाप्त हुआ।

 * सिन्ध को अगस्त, 1843 ई. में पूर्ण रूप से ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया। सिन्ध विजय के विषय में नेपियर का कथन है कि—'वह अफगानी तूफान की पूँछ थी'।

 * दास-प्रथा का उन्मूलन इसी के समय में हुआ। (1843 के एक्ट-V के द्वारा इसमें स्वामियों को अपने दासों पर दावा करने के लिए न्यायालय जाने से वंचित किया गया।)

 * *नोट : रविवार की छुट्टी की शुरुआत 1843 ई. से हुई।*

**लॉर्ड हार्डिंग (1844-1848 ई.)**

 * इसके काल की सबसे महत्वपूर्ण घटना थी—प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध (1845-1846 ई.)। इसमें अंग्रेज विजयी हुए।

 * इसने नरबलि-प्रथा पर प्रतिबंध लगाया।

**लॉर्ड डलहौजी (1848-1856 ई.)**

 * द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध (1848-1849) तथा पंजाब का ब्रिटिश शासन में विलय (29 मार्च, 1849)। जगतप्रसिद्ध सिख राज्य का प्रसिद्ध हीरा कोहिनूर महारानी विक्टोरिया को भेज दिया गया।

 * द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध के दौरान तीन युद्ध लड़े गये—प्रथम रामनगर का युद्ध-16 नवम्बर, 1848 ई. अनिर्णित, दूसरा चिलियावाला का युद्ध-13 जनवरी, 1849 ई. अनिर्णित, तीसरा युद्ध गुजरात (चिनाव नदी के किनारे) नामक स्थान पर 12 मार्च, 1849 ई. को हुआ, जिसमें सिख बुरी तरह पराजित हुए।

 * द्वितीय आंग्ल-वर्मा युद्ध, और 1852 ई. में लोअर वर्मा एवं पीगू को अंग्रेजी राज्य में मिला लिया गया।

 * डलहौजी ने सिक्किम पर दो अंग्रेज डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाकर सन् 1850 ई. में उस पर अधिकार कर लिया।

 * 1852 ई. में एक इनाम कमीशन की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य भूमिकर रहित जागीरों का पता करके उन्हें छीनना था।

 * डलहौजी का शासनकाल उसके व्यपगत सिद्धान्त (Doctrine of Lapse) के कारण अधिक याद किया जाता है। इस नीति के तहत अंग्रेजी साम्राज्य में विलय किए गए राज्य थे—

   सर्वप्रथम सतारा 1848 ई. में, जैतपुर (बुंदेलखंड) और संभलपुर (उड़ीसा) 1849 ई. में, बघाट (हिमाचल प्रदेश) 1850 ई. में, उदयपुर (मध्य प्रदेश) 1852 ई. में, झाँसी 1853 ई. में, नागपुर 1854 ई. में।

 * 1856 ई. में अवध को कुशासन का आरोप लगाकर अंग्रेजी राज्य में मिला लिया गया। उस समय अवध का नवाब वाजिद अली शाह था।

 * *नोट : 18वीं शताब्दी में अवध राज्य का संस्थापक सआदत खाँ था।*

 * 1856 ई. में इसने तोपखाने के मुख्यालय को कलकत्ता से मेरठ स्थानान्तरित किया और सेना का मुख्यालय शिमला में स्थापित किया।

 * शिक्षा संबंधी सुधारों में डलहौजी ने 1854 ई. के वुड डिस्पैच को लागू किया। इसके अनुसार जिलों में एंग्लो-वर्नाक्यूलर स्कूल, प्रमुख नगरों में सरकारी कॉलेजों तथा लॉर्ड कैनिंग के समय में 1857 ई. में तीनों प्रेसीडेंसियों कलकत्ता, मद्रास एवं बम्बई में एक-एक विश्वविद्यालय स्थापित किए गए एवं साथ ही प्रत्येक प्रदेश में एक शिक्षा निदेशक नियुक्त किया गया।

 * डलहौजी को भारत में रेलवे का जनक माना जाता है। इसी के समय भारत में पहली बार 16 अप्रैल, 1853 ई. में बम्बई से थाणे के बीच (34 किमी.) प्रथम रेल चलायी गयी।

 * सन् 1854 ई. में नया पोस्ट ऑफिस एक्ट पारित हुआ और भारत में पहली बार डाक टिकट का प्रचलन प्रारंभ हुआ।

 * इसने पृथक् रूप से भारत में पहली बार सार्वजनिक निर्माण विभाग की स्थापना की व 1854 ई. में एक स्वतंत्र विभाग के रूप में लोक सेवा विभाग की स्थापना की।

 * इसी के समय में 1853 ई. में कलकत्ता एवं आगरा के बीच पहली बार बिजली से संचालित तार-सेवा शुरू हुई।

 * इसने शिमला को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया।

 * 1853 ई. के चार्टर ऐक्ट के द्वारा कंपनी के संचालक मंडल से कंपनी के प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति का अधिकार वापस ले लिया गया और 1853 ई. से ही अधिकारियों की नियुक्ति के लिए प्रतियोगिता परीक्षा की व्यवस्था की गयी जिसके लिए उम्र सीमा 18 से 23 वर्ष रखी गयी।

 * *नोट : 1. सत्येन्द्रनाथ टैगोर पहले भारतीय थे जिन्होंने 1863 ई. में लंदन में हुई सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त की थी।*

 * *2. 1922 ई. में इलाहाबाद (भारत) एवं लंदन दोनों स्थानों पर साथ-साथ सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन किया जाने लगा।*

 * डलहौजी ने नर-बलि प्रथा को रोकने का भी प्रयास किया।

**लॉर्ड कैनिंग (1856-1862 ई.)**

 * यह भारत में कम्पनी द्वारा नियुक्त अन्तिम गवर्नर-जनरल तथा ब्रिटिश सम्राट् के अधीन नियुक्त भारत का प्रथम वायसराय था।

 * इसके समय की सबसे महत्वपूर्ण घटना थी सन् 1857 ई. का ऐतिहासिक विद्रोह। इसी विद्रोह के बाद प्रशासनिक सुधार के अंतर्गत भारत का शासन कम्पनी के हाथों से सीधे ब्रिटिश सरकार के नियंत्रण में ले लिया गया।

 * कैनिंग के समय 1861 में उच्च न्यायालय अधिनियम बनाया गया जिसके अनुसार पुरानी सुप्रीम कोर्ट और सदर अदालतों को समाप्त कर दिया गया तथा कलकत्ता, मद्रास तथा मुम्बई में एक-एक उच्च न्यायालय की स्थापना की गई।

 * *नोट : 1866 में आगरा में एक उच्च न्यायालय की स्थापना की गई जिसे 1875 में इलाहाबाद स्थानान्तरित कर दिया गया।*

 * कैनिंग के समय में ही 1856 ई. में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम स्वतंत्र रूप से लागू हुआ। विधवा पुनर्विवाह अधिनियम के नियम XV द्वारा विधवा विवाह को वैध करार देते हुए पैदा होने वाले बच्चों को वैध माना गया।


बच्चों को वैध माना गया। भारत में पहला कानूनी विधवा विवाह कलकत्ता में 7 दिसम्बर, 1856 ई. को ईश्वरचन्द्र विद्यासागर की प्रेरणा और देख-रेख में सम्पन्न हुआ।

 * 1856 में पैतृक सम्पत्ति से संबंधित जो कानून बनाया गया उसके अनुसार यह निश्चित किया गया कि धर्म परिवर्तन करने पर किसी व्यक्ति को उसकी पैतृक सम्पत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा।

 * 1857 ई. में कैनिंग के समय ही महालेखा परीक्षक पद का सृजन किया गया जो स्वतंत्रता के बाद नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कहलाया।

 * भारत शासन अधिनियम-1858 ई. के तहत मुगल सम्राट के पद को समाप्त कर दिया गया।

 * मैकाले द्वारा प्रारूपित दंड-संहिता को 1858 ई. में कानून बना दिया गया तथा 1859 ई. में अपराध विधान संहिता लागू की गयी।

 * व्यपगत सिद्धांत (Doctrine of Lapse) यानी राज्य-विलय की नीति को समाप्त कर दिया गया।

 * 1861 ई. में इंडियन कौंसिल एक्ट पारित हुआ तथा पोर्टफोलियो-प्रणाली लागू की गयी।

**लॉर्ड एल्गिन (1862-1863 ई.)**

 * इसने वहाबी आन्दोलन का दमन किया। 1863 ई. में धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) में इसकी मृत्यु हो गयी।

**लॉर्ड लॉरेंस (1864-1869 ई.)**

 * 1865 ई. में भूटान ने ब्रिटिश साम्राज्य पर आक्रमण किया।

 * अफगानिस्तान के संबंध में इसने अहस्तक्षेप की नीति अपनाई, जिसे 'शानदार निष्क्रियता' के नाम से जाना जाता है।

 * इसी के समय में उड़ीसा में सन् 1866 ई. में तथा बुंदेलखण्ड एवं राजपूताना में 1868-1869 ई. में भीषण अकाल पड़ा।

 * इसने हेनरी कैंपबेल के नेतृत्व में एक अकाल आयोग का गठन किया।

 * सन् 1865 ई. में इसके द्वारा भारत एवं यूरोप के बीच प्रथम समुद्री टेलीग्राफ सेवा शुरू की गयी।

**लॉर्ड मेयो (1869-1872 ई.)**

 * लॉर्ड मेयो ने अजमेर में 1872 ई. में मेयो कॉलेज की स्थापना की।

 * इसने सन् 1872 ई. में एक कृषि विभाग की स्थापना की।

 * भारत में अंग्रेजों के समय में प्रथम जनगणना 1872 ई. में लॉर्ड मेयो के कार्यकाल में ही हुआ।

 * एक अफगान शेर अली अफरीदी ने 8 फरवरी, 1872 ई. में पोर्ट ब्लेयर में चाकू मार कर इसकी हत्या कर दी।

**लॉर्ड नार्थब्रुक (1872-1876 ई.)**

 * इसके समय में बंगाल में भयानक अकाल पड़ा।

 * इसने बड़ौदा के मल्हारराव गायकवाड़ को भ्रष्टाचार के आरोप में पदच्युत कर मद्रास भेज दिया।

 * लॉर्ड नार्थब्रुक ने यह घोषणा की—"मेरा उद्देश्य करों को हटाना तथा अनावश्यक वैधानिक कार्यवाइयों को बन्द करना है।"

 * पंजाब का प्रसिद्ध कूका आन्दोलन इसी के समय में हुआ।

 * इसी के समय में स्वेज नहर खुल जाने से भारत एवं ब्रिटेन के बीच व्यापार में वृद्धि हुई।

**लॉर्ड लिटन (1876-1880 ई.)**

 * यह एक प्रसिद्ध उपन्यासकार, निबंध-लेखक एवं साहित्यकार था। साहित्याकाश में इसे ओवन मेरेडिथ के नाम से जाना जाता था।

 * इसके समय में बम्बई, मद्रास, हैदराबाद, पंजाब, मध्य भारत आदि में भयानक अकाल पड़ा।

 * लिटन ने रिचर्ड स्ट्रैची की अध्यक्षता में 1878 में एक अकाल आयोग की नियुक्ति की।

 * 1 जनवरी, 1877 ई. को ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया को कैसर-ए-हिन्द की उपाधि से सम्मानित करने के लिए दिल्ली दरबार का आयोजन किया गया।

 * मार्च, 1878 ई. में लिटन ने भारतीय समाचारपत्र अधिनियम (वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट) पारित कर भारतीय समाचारपत्रों पर कठोर प्रतिबंध लगा दिए। (विशेषकर राष्ट्रवादी समाचार-पत्र 'सोम प्रकाश' को प्रतिबंधित करने के लिए)। इस कानून में प्रावधान था कि अगर किसी अखबार में कोई आपत्तिजनक चीज छपती है तो सरकार उसकी प्रिंटिंग प्रेस सहित सारी सम्पत्ति जब्त कर सकती है।

 * *नोट : पायनियर अखबार ने वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट-1878 का समर्थन किया।*

 * इसी के समय में सन् 1878 ई. को भारतीय शस्त्र अधिनियम पारित हुआ, जिसके तहत शस्त्र रखने एवं व्यापार करने के लिए लाइसेंस को अनिवार्य बना दिया गया।

 * इसने सिविल सेवा परीक्षाओं में प्रवेश की अधिकतम आयु सीमा 21 से घटाकर 19 वर्ष कर दी।

 * *नोट : 1857 में सिविल सेवा परीक्षा में सम्मिलित होने की आयु 23 वर्ष निर्धारित की गयी थी। 1859 में आयु सीमा को घटाकर 22 वर्ष और 1866 में इसको घटाकर 21 वर्ष किया गया था!*

 * लिटन ने अलीगढ़ में एक मुस्लिम-एंग्लो प्राच्य महाविद्यालय की स्थापना की।

**लॉर्ड रिपन (1880-1884 ई.)**

 * प्रधानमंत्री ग्लैडस्टोन के परामर्श पर रिपन ने सर्वप्रथम समाचारपत्रों की स्वतंत्रता को बहाल करते हुए सन् 1882 ई. में वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट को समाप्त कर दिया और भारतीय भाषाओं में प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों को भी वही सुविधाएँ दी गईं जो अन्य समाचार-पत्रों को प्राप्त थीं।

 * इसने सिविल सेवा में प्रवेश की अधिकतम आयु सीमा को 19 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष कर दिया।

 * इसने स्थानीय स्वाशासन की शुरुआत की। 18 मई, 1882 को स्थानीय स्वाशासन संबंधी एक कानून बनाया जिसके आधार पर विभिन्न प्रांतों में 1883 से 1885 के मध्य स्थानीय स्वाशासन सम्बंधी कानून बनाए गए।

 * इसके समय में ही भारत में सन् 1881 ई. में सर्वप्रथम नियमित जनगणना करवायी गयी। तब से लेकर अब तक प्रत्येक 10 वर्ष के अन्तराल पर जनगणना की जाती है। 1881 की जनगणना में हैदराबाद और राजपूताने को नहीं जोड़ा गया था।

 * *नोट : भारत में पहली बार जनगणना सन् 1872 ई. में हुई, परन्तु इसमें भारत के सम्पूर्ण भागों का प्रतिनिधित्व नहीं हुआ। लगभग 20% भारत का भाग इसमें छूट गया।*

 * रिपन के द्वारा ही सन् 1881 ई. में प्रथम कारखाना अधिनियम लाया गया। इसमें 7 वर्ष से कम आयु के बच्चों को काम करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया और 7 से 12 वर्ष के श्रमिकों के लिए 9 घंटे से अधिक कार्य कराया जाना प्रतिबंधित कर दिया गया। यह एक्ट चाय, कॉफी एवं नील की खेती पर लागू नहीं थी।

 * 3 फरवरी, 1882 में रिपन के समय में शैक्षिक सुधारों के अन्तर्गत विलियम हण्टर की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया गया, जो भारत में प्रथम शिक्षा आयोग था। इसमें व्यावसायिक शिक्षा पर बल दिया गया था।

 * 2 फरवरी, 1883 को यूरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्यायाधीशों द्वारा मुकदमे की सुनवाई के लिए इल्बर्ट विधेयक प्रस्तुत किया गया, लेकिन यूरोपवासियों के प्रबल विरोध के कारण इसे वापस लेना पड़ा। अंग्रेजों द्वारा इस विधेयक के विरोध में किए विद्रोह को 'श्वेत विद्रोह' के नाम से जाना जाता है।

 * फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने रिपन को 'भारत के उद्धारक' की संज्ञा दी।

**लॉर्ड डफरिन (1884-1888 ई.)**

 * इसके समय तृतीय आंग्ल-वर्मा युद्ध (1885-88 ई.) हुआ और वर्मा को अन्तिम रूप से अंग्रेजी राज्य में मिला लिया गया।


 * इसी समय बंगाल टेनेन्सी एक्ट, अवध टेनेन्सी एक्ट तथा पंजाब टेनेन्सी एक्ट पारित हुआ।

 * इसके समय की सबसे महत्वपूर्ण घटना थी—28 दिस., 1885 को बम्बई में ए.ओ. ह्यूम के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की स्थापना।

**लॉर्ड लैन्सडाउन (1888-1894 ई.)**

 * भारत और अफगानिस्तान के मध्य सीमा-रेखा (ड्यूरण्ड रेखा) का निर्धारण इसी समय हुआ।

 * 1891 ई. में दूसरा कारखाना अधिनियम लाया गया, जिसमें स्त्रियों को 11 घंटे प्रतिदिन से अधिक काम करने पर प्रतिबंध लगाया गया। साथ ही सप्ताह में एक दिन छुट्टी की व्यवस्था की गयी।

**लॉर्ड एल्गिन द्वितीय (1894-1899 ई.)**

 * "भारत को तलवार के बल पर विजित किया गया है और तलवार के बल पर ही इसकी रक्षा की जाएगी" यह कथन—लॉर्ड एल्गिन द्वितीय का है।

 * 1895-1898 ई. के मध्य उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब एवं मध्य प्रदेश में भयानक अकाल पड़ा।

**लॉर्ड कर्जन (1899-1905 ई.)**

 * 1899 में कर्जन ने भारतीय टंकण और पत्र-मुद्रा अधिनियम पारित कराकर अंग्रेजी स्वर्ण-मुद्रा को भारत की कानूनी मुद्रा घोषित कर दिया।

 * शासन की कार्यक्षमता के आधार पर लॉर्ड कर्जन ने रिपन द्वारा स्थापित स्थानीय स्वाशासन की प्रणाली पर आघात किया और 1899 में कलकत्ता कॉरपोरेशन अधिनियम बनाया।

 * कर्जन ने सन् 1901 ई. में सर कॉलिन स्कॉट मॉनक्रीफ की अध्यक्षता में एक सिंचाई आयोग, टॉमस रॉबर्टसन की अध्यक्षता में एक रेलवे आयोग, 1902 ई. में सर एण्ड्रयू फ्रेजर की अध्यक्षता में एक पुलिस आयोग एवं सर टामस रिले की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय आयोग की स्थापना की।

 * 1904 ई. में भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम पास किया गया।

 * इसने सर एण्टनी मैकडॉनिल की अध्यक्षता में एक अकाल आयोग का गठन किया एवं सैन्य अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए क्वेटा में एक कॉलेज की स्थापना की।

 * प्राचीन स्मारक परीक्षण अधिनियम 1904 ई. के द्वारा कर्जन ने भारत में पहली बार ऐतिहासिक इमारतों की सुरक्षा एवं मरम्मत की ओर ध्यान दिया। इस कार्य के लिए कर्जन ने भारतीय पुरातत्व विभाग की स्थापना की।

 * कर्जन के समय 1904 में सहकारी उधार समिति अधिनियम बनाया गया जिसके द्वारा सहकारी-समितियों की स्थापना करके किसानों को उचित ब्याज पर रुपया कर्ज देने की व्यवस्था की गयी।

 * इसने कृषि बैंक भी खुलवाए।

 * इसने 1901 में कृषि इंस्पेक्टर-जनरल की नियुक्ति की।

 * इसके समय 1905 में पूसा में एक कृषि-अनुसंधान संस्था खोली गयी।

 * कर्जन के समय ही पहली बार प्रत्येक प्रांत और केंद्र स्तर पर एक निदेशक के अधीन एक पृथक गुप्तचर विभाग की स्थापना की गयी।

 * लॉर्ड कर्जन के समय में किचनर-परीक्षा को सैनिक-प्रशिक्षण में शामिल करके सेना की युद्ध-क्षमता को बढ़ाया गया।

 * इसी के कार्यकाल के दौरान कलकत्ता में विक्टोरिया मेमोरियल हॉल का निर्माण हुआ।

 * कर्जन के भारत विरोधी कार्यों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य था—1905 ई. में बंगाल का विभाजन। 19 जुलाई, 1905 ई. को बंगाल विभाजन के निर्णय की घोषणा शिमला में की गयी और इसका प्रारूप प्रकाशित किया गया। सितम्बर, 1905 में उसे सम्राट ने भी स्वीकृति दे दी। 16 अक्टूबर, 1905 को इस बंगाल विभाजन की योजना को लागू किया गया। बंगाल को दो प्रांतों में बाँट दिया गया-एक पूर्वी बंगाल और असम प्रांत, दूसरा-पश्चिमी बंगाल। पूर्वी बंगाल का मुख्यालय ढाका में बनाया गया पूर्वी बंगाल का ले. गवर्नर ब्लूमफील्ड फूलर को पश्चिमी बंगाल का ले. गवर्नर एण्ड्रयू फ्रेजर को बनाया गया।

 * गवर्नर-जनरल की कार्यकारिणी के सैनिक-सदस्य के अधिकारों के प्रश्न पर कर्जन का प्रधान सेनापति किचनर से मतभेद हो गया जिसमें भारत सचिव ने किचनर का पक्ष लिया। इससे असंतुष्ट होकर अगस्त 1905 में लॉर्ड कर्जन ने त्यागपत्र दे दिया।

लॉर्ड मिन्टो द्वितीय (1905-1910 ई.)  

इसके समय में आगा खाँ एवं सलीम उल्ला खाँ के द्वारा ढाका में 1906 ई. में मुस्लिम लीग की स्थापना की गयी।  

1907 के काँग्रेस के सूरत अधिवेशन में काँग्रेस का विभाजन हो गया।  

इसके शासनकाल में 1907 ई. में आंग्ल एवं रूसी प्रतिनिधिमंडलों के बीच बैठक हुई।  

समाचार पत्र अधिनियम (प्रेस ऐक्ट), 1908 पारित।  

बाल गंगाधर तिलक की राजद्रोह के आरोप में 22 जुलाई, 1908 को गिरफ्तारी एवं 6 वर्ष की सजा।  

गवर्नर जनरल की कौंसिल के सदस्य के रूप में एस.पी. सिन्हा की नियुक्ति की गई।  

मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन व्यवस्था मार्ले-मिन्टो सुधार अधिनियम-1909 ई. के द्वारा किया गया।  

लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय (1910-1916 ई.)  

इसके समय में ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम भारत आए। 12 दिसम्बर, 1911 ई. में दिल्ली में एक भव्य दरबार का आयोजन हुआ। यहाँ पर बंगाल-विभाजन को रद्द करने की घोषणा की गयी एवं भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानान्तरित करने की घोषणा की गयी। 1912 ई. में दिल्ली भारत की राजधानी बनी।  

इसी के समय गोपाल कृष्ण गोखले ने 1910 एवं 1911 में अनिवार्य एवं निःशुल्क प्राथमिक शिक्षा आरंभ करने के लिए इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल में विधेयक प्रस्तुत किया।  

23 दिसम्बर, 1912 ई. को लॉर्ड हार्डिंग पर दिल्ली में बम फेंका गया। इसके लिए अनुशीलन समिति उत्तरदायी था। हार्डिंग वामकांड दिल्ली षड्यंत्र केस के रूप प्रसिद्ध है। इसमें 13 व्यक्तियों को अभियुक्त बनाया गया था जिसमें मास्टर अमीरचंद, दीनानाथ, भाई बालमुकुंद, बलराज मैला, बसंत कुमार एवं अवध बिहारी को गिरफ्तार किया गया। इसमें चार लोगों को फाँसी तथा दो को 7 वर्ष की सजा मिली। दीनानाथ सरकारी गवाह बन गया था। इसमें मुख्य भूमिका निभाने वाले रास बिहारी बोस जापान भाग गए थे।  

इसी के समय 28 जुलाई, 1914 को प्रथम विश्वयुद्ध प्रारंभ हुआ।  

इसी के शासनकाल में फिरोजशाह मेहता ने 'बॉम्बे क्रोनिकल' एवं गणेश शंकर विद्यार्थी ने 'प्रताप' का प्रकाशन किया।  

1916 ई. में लॉर्ड हार्डिंग को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय का कुलाधिपति नियुक्त किया गया। 

 लॉर्ड चेम्सफोर्ड (1916-1921 ई.)  

काँग्रेस के लखनऊ अधिवेशन (1916 ई.) में काँग्रेस का एकीकरण हुआ एवं मुस्लिम लीग के साथ समझौता हुआ।  

1916 ई. में पूना में महिला विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।  

इसके काल में 1917 ई. में शिक्षा पर सैडलर आयोग का गठन हुआ।  

20 अगस्त, 1917 के सुधारों की घोषणा को मांटेग्यू घोषणा के नाम से जाना जाता है। लोक सेवाओं की परीक्षा इंग्लैंड एवं भारत में एक साथ कराने की संस्तुति मांटेग्यू चेम्सफोर्ड रिपोर्ट के द्वारा की गई थी।  

इसी के काल में 1919 ई. में रोलेट एक्ट पारित हुआ।  

इसी के काल में 13 अप्रैल, 1919 ई. को जालियांवाला बाग (अमृतसर) हत्याकांड हुआ।  

खिलाफत आन्दोलन एवं गाँधीजी का असहयोग आन्दोलन इसी के समय प्रारंभ हुआ।  


तृतीय अफगान युद्ध इसी के समय हुआ।  

अक्टूबर, 1920 में मानवेन्द्र नाथ रॉय (एमएन रॉय) ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (ताशकंद समूह) का गठन किया।  

लॉर्ड रीडिंग (1921-1926 ई.)  

1921 ई. में मोपला विद्रोह हुआ।  

इसके काल में ही प्रिंस ऑफ वेल्स ने नवम्बर, 1921 ई. में भारत की यात्रा की। इस दिन पूरे भारत में हड़ताल का आयोजन किया गया।  

5 फरवरी, 1922 को घटी चौरी-चौरा काण्ड (उ.प्र. के गोरखपुर जिले में) के बाद गाँधी जी ने अपना असहयोग आन्दोलन वापस ले लिया।  

भारत में 1922 से इलाहाबाद में सिविल सेवा परीक्षा की शुरुआत हुई।  

विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना 1921 में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने पश्चिम बंगाल के शांति निकेतन में की जो 1922 ई. में कार्य करना प्रारंभ किया। वर्तमान में यह एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय है।  

1923 ई. में चित्तरंजन दास एवं मोतीलाल नेहरू ने इलाहाबाद में काँग्रेस के अंतर्गत स्वराज पार्टी की स्थापना की। 1923 ई. के चुनाव में इस दल को मध्य प्रांत एवं बंगाल में पूर्ण बहुमत मिला।  

1925 ई. में प्रसिद्ध आर्यसमाजी राष्ट्रवादी नेता स्वामी श्रद्धानन्द की हत्या कर दी गयी।  

लॉर्ड इरविन (1926-1931 ई.)  

3 फरवरी, 1928 ई. साइमन कमीशन बम्बई पहुँचा।  

लाला लाजपत राय की मृत्यु के बदले में भारतीय चरमपंथियों द्वारा दिल्ली के असेम्बली हॉल में 1929 ई. में बम फेंका गया।  

लाहौर जेल में जतिनदास ने 13 जुलाई, 1929 को भूख हड़ताल शुरू की व भूख-हड़ताल के 64वें दिन 13 सितम्बर, 1929 को उनकी मृत्यु हो गई। भूख हड़ताल का कारण भारतीय एवं अंग्रेज कैदियों के बीच व्यवहार में किया जाने वाला भेद-भाव था।  

1929 ई. में काँग्रेस के लाहौर अधिवेशन में 'पूर्ण स्वराज' का लक्ष्य निर्धारित किया गया और 26 जनवरी, 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने की घोषणा की गयी।  

सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान—महात्मा गाँधी को 5 मई, 1930 ई. को गिरफ्तार कर लिया गया। 25 जनवरी, 1931 ई. को वायसराय इरविन बिना कोई शर्त के उन्हें रिहा कर दिया।  

12 नवम्बर, 1930 ई. में लंदन में प्रथम गोलमेज सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन में काँग्रेस ने भाग नहीं लिया।  

4 मार्च*, 1931 को गाँधी-इरविन समझौते पर हस्ताक्षर किया गया और साथ ही 'सविनय अवज्ञा आन्दोलन' को स्थगित किया गया।  

नोट : वायसराय भवन (वर्तमान में राष्ट्रपति भवन) में रहने वाले पहले व्यक्ति लॉर्ड इरविन थे। इस भवन के निर्माण में 17 वर्ष लगे थे और 1931 में इसका उद्घाटन हुआ। इस भवन का वास्तुकार सर एडविन लुटियंस और एडवर्ड बेकर थे।  

लॉर्ड वेलिंगटन (1931-1936 ई.)  

इसके समय में लंदन में 7 सितम्बर से 1 दिसम्बर, 1931 तक द्वितीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस सम्मेलन में काँग्रेस ने भी भाग लिया। काँग्रेस का प्रतिनिधित्व गाँधी जी ने किया। दूसरे गोलमेज सम्मेलन की असफलता के बाद गाँधी जी ने 3 जनवरी, 1932 ई. को दोबारा सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ किया।  

16 अगस्त, 1932 में रैम्जे मैकडोनाल्ड ने विवादास्पद 'साम्प्रदायिक पंचाट' की घोषणा की। इसके अनुसार दलितों को हिन्दुओं से अलग मानकर उन्हें अलग प्रतिनिधित्व देने को कहा गया और दलित वर्गों के लिए अलग निर्वाचन मंडल का प्रावधान किया गया। इससे गाँधीजी बहुत दुखी हुए और उन्होंने इसे हटाने के लिए आमरण उपवास आरंभ कर दिया; अंत में एक समझोता, जिसे प्रायः 'पूना समझौता' कहते हैं, किया गया जिसमें दलित वर्गों के लिए साधारण वर्गों में ही सीटों का आरक्षण किया गया। पूना समझौता 24 सितम्बर, 1932 ई. को हुआ।  

17 नवम्बर से 24 दिसम्बर, 1932 ई. तक लंदन में तृतीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन हुआ। काँग्रेस ने इसमें भाग नहीं लिया।  

बिहार में 1934 ई. में भयंकर भूकम्प आया।  

भारत सरकार अधिनियम-1935 पास किया गया। इस अधिनियम ने ब्रिटिश भारत में प्रांतीय स्वायत्तता शुरू की।  

लॉर्ड वेलिंगटन ने काँग्रेस के बम्बई अधिवेशन-1915 ई. में हिस्सा लिया था। इस अधिवेशन की अध्यक्षता सर सत्येन्द्र प्रसन्न सिन्हा ने की थी।  

लॉर्ड लिनलिथगो (1936-1943 ई.)  

इसके समय में पहली बार चुनाव कराए गए। काँग्रेस ने ग्यारह में से आठ प्रांतों (1. बॉम्बे 2. मद्रास 3. बिहार, 4. संयुक्त प्रांत 5. मध्य प्रांत 6. उड़ीसा 7. उ.-प. सीमान्त प्रांत 8. असम) में अपनी सरकारें बनाई। प्रथम छह प्रांतों में काँग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिली थी। बंगाल, असम, उत्तर-पश्चिम सीमा प्रान्त, पंजाब और सिन्ध में काँग्रेस को पूर्ण बहुमत नहीं मिली थी।  

1 सितम्बर, 1939 ई. को द्वितीय विश्वयुद्ध प्रारंभ हुआ। ब्रिटिश सरकार ने बिना भारतीयों से पूछे भारत को भी युद्ध में झोंक दिया। काँग्रेस ने इसका विरोध करते हुए नारा दिया, 'न कोई भाई, न कोई पाई' और उसने अपने द्वारा शासित प्रांतों के सभी मंत्रिमंडलों से त्यागपत्र दे दिया।  

1 मई, 1939 में सुभाष चन्द्र बोस ने फॉरवर्ड ब्लॉक नाम की एक नयी पार्टी बनाई।  

मार्च 1940 ई. में लीग के लाहौर अधिवेशन में पहली बार पाकिस्तान की माँग की गयी। इस प्रस्ताव का प्रारूप सिकंदर हयात खान ने बनाया था और फज़लुल हक ने प्रस्तुत किया था। खलीकुज्जमां ने उसका समर्थन किया था।  

8 अगस्त, 1940 ई. को अगस्त प्रस्ताव अंग्रेजों के द्वारा लाया गया।  

मार्च 1942 ई. में क्रिप्स मिशन भारत आया। काँग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने क्रिप्स प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया। पंडित जवाहर लाल नेहरू एवं मौलाना आजाद क्रिप्स मिशन के साथ काँग्रेस के आधिकारिक वार्ताकार थे।  

9 अगस्त, 1942 को काँग्रेस ने 'भारत छोड़ो' आन्दोलन प्रारंभ किया। भारत छोड़ो आंदोलन को अगस्त क्रांति के नाम से भी जानते हैं।  

1943 ई. में बंगाल में भयानक अकाल पड़ा।  

लॉर्ड वेवेल (1944-1947 ई.)  

वायसराय वेवेल ने 25 जून, 1945 ई. को शिमला में एक सम्मेलन बुलाया। इस सम्मेलन में काँग्रेस प्रतिनिधिमण्डल का नेतृत्व अबुल कलाम आजाद ने किया था। गाँधी जी ने सम्मेलन में भाग नहीं लिया, यद्यपि वे शिमला में उपस्थित रहे। सम्मेलन के दौरान मुस्लिम लीग द्वारा यह शर्त रखी गई कि वायसराय की कार्यकारिणी परिषद में नियुक्त होने वाले सभी मुस्लिम सदस्यों का चयन वह स्वयं करेगी। मुस्लिम लीग का यह अड़ियल रुख 14 जुलाई तक बना रहा। अतः वेवेल 14 जुलाई, 1945 को सम्मेलन के विफलता की घोषणा की।  

1945 में बनी क्लीमेन्ट एटली की अध्यक्षता वाली लेबर पार्टी की सरकार द्वारा की गई प्रथम कार्यवाही के अन्तर्गत भारत में आम चुनाव करवाना था। दिसम्बर, 1945 ई. में घोषित चुनाव परिणामों में केन्द्रीय विधान सभा तथा प्रांतीय विधान मंडलों में काँग्रेस को पर्याप्त बहुमत मिला। केन्द्रीय विधान सभा में काँग्रेस को निर्वाचन क्षेत्रों में 91.3 प्रतिशत मत मिले। मुस्लिम लीग ने सभी मुस्लिम सीटें जीत ली। प्रांतीय विधान मंडल में काँग्रेस को बम्बई, मद्रास, संयुक्त प्रांत बिहार, उड़ीसा और मध्य प्रांत में पूर्ण बहुमत मिला। मुस्लिम लीग को बंगाल तथा सिंध में बहुमत मिला। पंजाब में काँग्रेस, अकालियों और यूनियनिस्ट पार्टी की साझा सरकार बनी।  


➤ **कैबिनेट मिशन 1946 ई.** में भारत आया। इस मिशन के सदस्य थे—स्टेफोर्ड क्रिप्स, पैथिक लारेंस, ए. बी. अलेक्जेंडर।

➤ **20 फरवरी, 1947 ई.** में प्रधानमंत्री लॉर्ड क्लीमेंट एटली (लेबर पार्टी) ने हाउस ऑफ कॉमंस में यह घोषणा की कि जून, 1948 ई. तक प्रभुसत्ता भारतीयों के हाथ में दे देंगे।

**लॉर्ड माउण्टबेटन (मार्च, 1947 से जून, 1948 ई.)**

➤ सत्ता हस्तांतरण के लिए **24 मार्च, 1947 ई.** को भारत का गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउण्ट बेटन को बनाया गया। **3 जून, 1947 ई.** को माउण्ट बेटन योजना घोषित, इसमें भारत विभाजन शामिल था।

➤ **4 जुलाई, 1947** को ब्रिटिश संसद में एटली द्वारा भारतीय स्वतंत्रता विधेयक प्रस्तुत किया गया, जिसे 18 जुलाई को स्वीकृति मिली। विधेयक के अनुसार भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र राष्ट्रों की घोषणा की गयी।

➤ **15 अगस्त, 1947 ई.** को भारत स्वतंत्र हुआ।

➤ स्वतंत्र भारत का प्रथम गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउण्टबेटन हुए।

> **नोट : स्वतंत्र भारत के प्रथम एवं अंतिम भारतीय गवर्नर-जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी हुए।**

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### 45. अंग्रेजी शासन के विरुद्ध महत्वपूर्ण विद्रोह

| क्र. | आन्दोलन (विद्रोह) | प्रभावित क्षेत्र | संबंधित नेता, नेतृत्व | समय |

|---|---|---|---|---|

| 1. | संन्यासी विद्रोह | बिहार, बंगाल | केना सरकार, द्विजनारायण | 1760-1800 |

| 2. | फकीर विद्रोह | बंगाल | मजनूनशाह व चिराग अली | 1776-77 |

| 3. | रंगपुर विद्रोह | रंगपुर व दिनाजपुर (बंगाल) | धीरज नारायण | 1783 |

| 4. | पहाड़िया विद्रोह (झारखंड का प्रथम जनजातीय विद्रोह) | संथालपरगना (झारखंड) | रमना आहरी (1772), जगन्नाथ देव (1778), महेशपुर की रानी सर्वेश्वरी (1781-82) | 1772-1782 चार चरण- 1772, 1778, 1779, 1781-82 |

| 5. | चुआरों विद्रोह (जंगल महल आंदोलन) | बाँकुड़ा (बंगाल), धालभूम, मानभूम, मिदनापुर | जगन्नाथ सिंह (1769-71), मंगल सिंह (1782-84), दुर्जन सिंह (1798-99), कर्णगढ़ की रानी शिरोमणि (1799) | 1769-1809 |

| 6. | चेरो विद्रोह | झारखंड (पलामू) | भूषण सिंह | 1800 |

| 7. | पॉलीगरों का विद्रोह | तमिलनाडु | वीर. पी. काट्टावाम्मान | 1799-1801 |

| 8. | वेलाटम्प्री विद्रोह | त्रावणकोर | मेलुथाम्पी | 1808-09 |

| 9. | भील विद्रोह | पश्चिमी घाट | सेवरम | 1825-31 |

| 10. | रामोसी विद्रोह | पश्चिमी घाट | चित्तर सिंह | 1822-29 |

| 11. | पागलपंथी विद्रोह | असम | टीपू | 1825-27 |

| 12. | अहोम विद्रोह | असम | गोमधर कुँवर | 1828 |

| 13. | वहाबी आन्दोलन | बिहार, उ. प्रदेश | सैयद अहमद तुतीमीर | 1831 |

| 14. | कोल विद्रोह | छोटानागपुर (झारखंड) | बुधू भगत | 1831-32 |

| 15. | भूमिज विद्रोह (गंगा नारायण का हंगामा) | झारखंड (राँची) (जंगल महल) | गंगा नारायण सिंह | 1832 |

| 16. | खासी विद्रोह | असम | तीरत सिंह | 1833 |

| 17. | कंध विद्रोह | उड़ीसा | चक्र बिसोई | 1837 |

| 18. | फरायजी आन्दोलन | बंगाल | शरीयातुल्ला ददू मियाँ | 1838-48 |

| 19. | नील विद्रोह | बंगाल, बिहार | तिरुत सिंह | 1854-62 |

| 20. | संथाल विद्रोह | बंगाल एवं बिहार | सिद्धू-कान्हू | 1855-56 |

| 21. | मुंडा विद्रोह | झारखंड | बिरसा मुंडा | 1899-1900 |

| 22. | पाइक विद्रोह | उड़ीसा | बख्शी जगबन्धु | 1817-1825 |

| 23. | नील आन्दोलन | बंगाल | दिगम्बर | 1859-60 |

| 24. | पावना विद्रोह | पावना (बंगाल) | ईशानचन्द्र राय एवं शंभूपाल | 1873-76 |

| 25. | दक्कन विद्रोह | महाराष्ट्र | — | 1874-75 |

| 26. | मोपला विद्रोह | मालाबार (केरल) | अली मुसलियार | 1920-22 |

| 27. | कूका आन्दोलन | पंजाब | भगत जवाहर मल | — |

| 28. | रंपाओ का विद्रोह | आन्ध्र प्रदेश | सीताराम राजू | 1879-1922 |

| 29. | ताना भगत आन्दोलन | बिहार | जतरा भगत | 1914 |

| 30. | तेभागा आन्दोलन | बंगाल | कम्पाराम सिंह एवं भवन सिंह | 1946 |

| 31. | तेलंगाना आंदोलन | आन्ध्र प्रदेश | — | 1946 |

 * इसी संन्यासी विद्रोह का उल्लेख बन्दे मातरम् के रचयिता बंकिम चन्द्र चटर्जी ने अपने उपन्यास आनन्द मठ में किया है।

   ➤ **रम्पा विद्रोह** में कोया और कोंडा जनजाति के मुखियों ने एक मनसबदार परिवार के स्थानीय अधिपति के विरुद्ध बगावत की।

   ➤ **तिलका मांझी** ने भागलपुर के प्रथम कलक्टर अगस्तस क्लेवलैंड को 1784 ई. में तीर एवं धनुष से जख्मी कर दिया था जिससे उसकी मृत्यु हो गयी। इसी कारण उसे गिरफ्तार कर 1785 ई. में भागलपुर के बीच चौराहे पर बरगद के पेड़ से लटकाकर फाँसी दे दी गई। तिलका मांझी का वास्तविक नाम **जबरा पहाड़िया** था।

   ➤ 1832 में ब्रिटिश शासन ने संथालों को बसाने के लिए भागलपुर से राजमहल के बीच एक बड़े भूभाग को **दामिन-ए-कोह** के रूप में सीमांकन किया था। इसी संथाल बहुल क्षेत्र में बाहरी लोगों एवं अंग्रेजों के अत्याचार से तंग आकर 1855-56 में सिद्धू-कान्हू के नेतृत्व में संथालों ने विद्रोह कर दिया जिसे संथाल विद्रोह कहा जाता है। सिद्धू, कान्हू भगनाडीह गाँव के चुलु संथाल के पुत्र थे। चुलु संथाल के दो अन्य पुत्रों का नाम चाँद और भैरव था। सिद्धू ने अपने आप को ठाकुर का अवतार घोषित किया। जुलाई 1855 में संथाल विद्रोह प्रारंभ हुआ। सशस्त्र विद्रोह के प्रारंभ दीगी नामक स्थान में अत्याचारी दरोगा महेश लाल की हत्या से हुआ।

> **नोट : अहोम लोगों द्वारा लिखी गयी ऐतिहासिक कृतियाँ बुरंजी कहलाती हैं।**

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➤ दक्कन विद्रोह के दौरान 12 मई, 1875 में बंबई प्रेसीडेंसी में पूना जिले के सूपा गाँव में किसानों ने साहुकारों और दुकानदारों पर हमले किए, बही खाते जला दिए। अनाज की दुकान लूट ली और साहूकारों के घर में आग लगा दी।

➤ बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर, 1875 ई. को खूंटी जिले के तमाड़ के निकट उलीहातू नामक गाँव में हुआ था। 1895 में बिरसा ने अपने आप को ईश्वर का दूत घोषित किया।

➤ उड़ीसा के कंध आदिवासियों के बीच मारियाह प्रथा (मानव बलि प्रथा) का प्रचलन था।

> **नोट : भगत जवाहर मल के शिष्य राम सिंह ने 1872 ई. में अंग्रेजों का कड़ाई से सामना किया; बाद में इन्हें कैद कर रंगून 

भेज दिया गया जहाँ 1885 ई. में इनकी मृत्यु हो गयी।**

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