मुगल साम्राज्य 7

 ### 36. मुगल साम्राज्य


 * मुगल वंश का संस्थापक **बाबर** तैमूरिड राजवंश का सदस्य था। तैमूरिडों ने इतिहास में दो प्रसिद्ध साम्राज्य स्थापित किए थे: फारस और मध्य एशिया में तैमूरिड साम्राज्य (1370-1507) और भारतीय उपमहाद्वीप में मुगल साम्राज्य (1526-1857)। बाबर एवं उत्तरवर्ती मुगल शासक तुर्क एवं सुन्नी मुसलमान थे। बाबर ने मुगल वंश की स्थापना के साथ ही पद-पादशाही की स्थापना की, जिसके तहत शासक को **पादशाह** कहा जाता था।


#### बाबर (1526-1530 ई.)


 * बाबर का जन्म फरवरी 1483 ई. में हुआ था। इसके पिता **उमरशेख मिर्जा** फरगाना नामक छोटे राज्य के शासक थे। बाबर फरगाना की गद्दी पर **8 जून, 1494 ई.** में बैठा।


 * बाबर ने 1507 ई. में **पादशाह** की उपाधि धारण की, जिसे अब तक किसी तैमूर शासक ने धारण नहीं की थी। बाबर के चार पुत्र थे—**हुमायूँ, कामरान, अस्करी तथा हिंदाल**।


 * बाबर ने भारत पर **पाँच बार** आक्रमण किया। बाबर का भारत के विरुद्ध किया गया प्रथम अभियान 1519 ई. में युसुफ जाई जाति के विरुद्ध था। इस अभियान में बाबर ने बाजोर और भेरा को अपने अधिकार में कर लिया।


 * पानीपत के प्रथम युद्ध में बाबर ने पहली बार तुलगमा युद्ध नीति एवं तोपखाने का प्रयोग किया था। उस्ताद अली एवं मुस्तफा बाबर के दो प्रसिद्ध निशानेबाज थे, जिसने पानीपत के प्रथम युद्ध में भाग लिया था।


#### बाबर द्वारा लड़े गए प्रमुख युद्ध


| युद्ध | वर्ष | पक्ष | परिणाम |


|---|---|---|---|


| **पानीपत का प्रथम युद्ध** | 21 अप्रैल, 1526 | इब्राहिम लोदी व बाबर | बाबर विजयी |


| **खानवा का युद्ध** | 17 मार्च, 1527 | राणा सांगा एवं बाबर | बाबर विजयी |


| **चंदेरी का युद्ध** | 29 जन., 1528 | मेदनी राय एवं बाबर | बाबर विजयी |


| **घाघरा का युद्ध** | 6 मई, 1529 | अफगानों एवं बाबर | बाबर विजयी |


 * इब्राहिम लोदी मध्यकाल का प्रथम शासक था जो युद्धस्थल में मारा गया। इसके साथ उसका मित्र ग्वालियर के राजा विक्रमजीत भी युद्धस्थल में मारा गया।


> **नोट:** *हुमायूँ ने कोहिनूर हीरा ग्वालियर के दिवंगत राजा विक्रमजीत के परिवार से प्राप्त किया था।*


> 


 * बाबर को अपनी उदारता के लिए **कलन्दर** की उपाधि दी गयी।


 * बाबर ने मुसलमानों को **तमगा** नामक कर से मुक्त कर दिया था।


 * खानवा युद्ध में बाबर ने राणा सांगा के खिलाफ **जिहाद** का नारा दिया और युद्ध में विजय के बाद **गाजी** की उपाधि धारण की।


 * 30 जनवरी, 1528 ई. को जहर दे देने के कारण राणा सांगा की मृत्यु हो गई।


 * बाबर ने बंगाल के शासक नुसरतशाह के साथ 6 मई, 1529 को एक दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करने का वादा करते हुए एक संधि की जिसके अनुसार नुसरतशाह ने अफगान विद्रोहियों को शरण न देने का वचन दिया।


 * करीब 48 वर्ष की आयु में **26 दिसम्बर, 1530 ई.** को आगरा में बाबर की मृत्यु हो गयी।


 * प्रारंभ में बाबर के शव को आगरा के आरामबाग में दफनाया गया, बाद में काबुल में उसके द्वारा चुने गए स्थान पर दफनाया गया।


 * बाबर की मातृभाषा तुर्की थी लेकिन वह अरबी और फारसी का भी अच्छा ज्ञाता था। बाबर ने अपनी आत्मकथा *बाबरनामा* (तुर्की में) की रचना की, जिसका अनुवाद बाद में फारसी भाषा में अब्दुल रहीम खानखाना ने किया। अपनी आत्मकथा में बाबर ने औपचारिक बागों की योजनाओं और उनके बनाने में अपनी रुचि का वर्णन किया है। अक्सर ये बाग दीवार से घिरे होते थे तथा कृत्रिम नहरों द्वारा चार भागों में विभाजित आयताकार अहाते में स्थित थे। चार समान हिस्सों में बँटे होने के कारण ये **चार बाग** कहलाते थे।


> **नोट:** *चार बाग बनाने की परंपरा की शुरुआत अकबर के समय से हुई।*


> 


 * बाबर को **मुबईयान** नामक पदशैली का भी जन्मदाता माना जाता है।


 * बाबर प्रसिद्ध नक्शबंदी सूफी ख्वाजा उबेदुल्ला अहरार का अनुयायी था। बाबर का उत्तराधिकारी **हुमायूँ** हुआ।


#### हुमायूँ (1530-1556 ई.)


 * नसीरुद्दीन हुमायूँ **29 दिसम्बर, 1530 ई.** को आगरा में 23 वर्ष की अवस्था में सिंहासन पर बैठा। गद्दी पर बैठने से पहले हुमायूँ **बदख्शाँ** का सूबेदार था।


 * अपने पिता के निर्देश के अनुसार हुमायूँ ने अपने राज्य का बँटवारा अपने भाइयों में कर दिया। इसने कामरान को काबुल और कंधार, मिर्जा असकरी को संभल, मिर्जा हिंदाल को अलवर व मेवाड़ की जागीरें दीं। अपने चचेरे भाई सुलेमान मिर्जा को हुमायूँ ने बदख्शाँ प्रदेश दिया।


 * 1533 ई. में हुमायूँ ने **दीनपनाह** नामक नए नगर की स्थापना की थी।


 * **चौसा का युद्ध 25 जून, 1539 ई.** में शेर खाँ एवं हुमायूँ के बीच हुआ। इस युद्ध में शेर खाँ विजयी रहा। इसी युद्ध के बा


द शेर खाँ ने **शेरशाह** की पदवी ग्रहण कर ली।


न्न नहीं है अपितु एक है।



➣ **बिलग्राम या कन्नौज युद्ध 17 मई, 1540 ई.** में शेर खाँ एवं हुमायूँ के बीच हुआ। इस युद्ध में भी हुमायूँ पराजित हुआ। शेर खाँ ने आसानी से आगरा एवं दिल्ली पर कब्जा कर लिया।

➣ **बिलग्राम युद्ध के बाद हुमायूँ सिन्ध चला गया, जहाँ उसने 15 वर्षों तक घुमक्कड़ों जैसा निर्वासित जीवन व्यतीत किया।**

➣ निर्वासन के समय हुमायूँ ने हिन्दाल के आध्यात्मिक गुरु फारसवासी शिया मीर बाबा दोस्त उर्फ मीर अली अकबर जामी की पुत्री हमीदा बानू बेगम से 29 अगस्त, 1541 ई. को निकाह कर लिया। कालान्तर में हमीदा से ही अकबर जैसे महान् सम्राट् का जन्म हुआ।

➣ 1555 ई. में हुमायूँ ने पंजाब के सूरी शासक सिकन्दर को पराजित कर पुनः दिल्ली की गद्दी पर बैठा।

➣ हुमायूँ द्वारा लड़े गए चार प्रमुख युद्धों का क्रम है : **देवरा (1531 ई.), चौसा (1539), बिलग्राम (1540) एवं सरहिन्द का युद्ध (1555 ई.)।**

➣ 1 जनवरी, 1556 ई. को दीन पनाह भवन में स्थित पुस्तकालय (शेर मंडल) की सीढ़ियों से गिरने के कारण हुमायूँ की मृत्यु हो गयी।

➣ हुमायूँ के बारे में इतिहासकार लेनपूल ने कहा है कि "हुमायूँ गिरते-पड़ते इस जीवन से मुक्त हो गया ठीक उसी तरह जिस तरह तमाम जिन्दगी वह गिरते-पड़ते चलता रहा था।"

➣ **हुमायूँनामा** की रचना गुलबदन बेगम ने की थी।

➣ हुमायूँ ज्योतिष में विश्वास करता था, इसलिए उसने सप्ताह के सातों दिन सात रंग के कपड़े पहनने के नियम बनाए।

### शेरशाह (1540-1545 ई.)

➣ **सूर साम्राज्य का संस्थापक अफगान वंशीय शेरशाह सूरी था।**

➣ **डॉ. के.आर. कानूनगो** के अनुसार हरियाणा प्रान्त के नारनौल (महेंद्रगढ़) स्थान पर इब्राहिम के पुत्र हसन के घर वर्ष 1486 में शेरशाह का जन्म हुआ था। परमात्मा शरण का विचार है कि शेरशाह का जन्म वर्ष 1472 ई. में हुआ था। इनके बचपन का नाम **फरीद खाँ** था। यह सूर वंश से संबंधित था। इनके पिता हसन खाँ जौनपुर राज्य के अन्तर्गत सासाराम के जमींदार थे।

➣ **फरीद ने एक शेर को तलवार के एक ही वार से मार दिया था।** उसकी इस बहादुरी से प्रसन्न होकर बिहार के अफगान शासक सुल्तान मुहम्मद बहार खाँ लोहानी ने उसे **शेर खाँ** की उपाधि प्रदान की।

➣ शेरशाह बिलग्राम युद्ध (1540 ई.) के बाद दिल्ली की गद्दी पर बैठा।

➣ शेरशाह की मृत्यु कालिंजर के किले को जीतने के क्रम में 22 मई, 1545 ई. को हो गयी। मृत्यु के समय वह उक्का नाम का आग्नेयास्त्र चला रहा था। कालिंजर का शासक कीरत सिंह था।

➣ **हिन्द तथा ईरानी वास्तुकला के समन्वय का प्रथम उदाहरण शेरशाह का मकबरा जिसे सासाराम में झील के बीच ऊँचे टीले पर निर्मित किया गया है।**

➣ **रोहतासगढ़ किला, किला-ए-कुहना (दिल्ली)** नामक मस्जिद का निर्माण शेरशाह के द्वारा किया गया था। शेरशाह ने रोहतासगढ़ के दुर्ग एवं कन्नौज के स्थान पर **शेरसूर** नामक नगर बसाया।

➣ **शेरशाह का उत्तराधिकारी उसका पुत्र इस्लाम शाह था।**

➣ शेरशाह ने भूमि की माप के लिए 32 अंकवाला **सिकन्दरी गज एवं सन की डंडी** का प्रयोग किया। शेरशाह के समय पैदावार का लगभग 1/3 भाग सरकार लगान के रूप में वसूल करती थी।

➣ **शेरशाह ने सोने के सिक्के अशरफ, चाँदी का रुपया (178 ग्रेन) तथा ताँबे का दाम (380 ग्रेन) नामक सिक्के चलाए।**

➣ **चाँदी का रुपया सर्वप्रथम शेरशाह ने जारी किया।** चाँदी के रुपए ताँबे के दाम का विनिमय अनुपात 1 : 64 का था।

➣ शेरशाह के समय ताँबे के अन्य सिक्के थे—अधोला, पावला, दमड़ी एवं जीतल।

➣ **कबूलियत एवं पट्टा प्रथा की शुरुआत शेरशाह ने की।**

➣ **शेरशाह ने 1541 ई. में पाटलिपुत्र को पटना के नाम से पुनः स्थापित किया।** इसने ग्रैंड ट्रंक रोड की मरम्मत करवायी। डाक-प्रथा का प्रचलन शेरशाह के द्वारा ही किया गया।

➣ **मलिक मुहम्मद जायसी शेरशाह के समकालीन थे।**

### अकबर (1556-1605 ई.)

➣ **सम्राट् अकबर का जन्म 15 अक्टूबर, 1542 ई. को हमीदा बानू बेगम के गर्भ से अमरकोट के राणा वीर साल के महल में हुआ।**

➣ अकबर के बचपन का नाम जलाल था। उसका राज्याभिषेक 14 फरवरी, 1556 ई. को पंजाब के कलानौर नामक स्थान पर हुआ।

#### अकबर के समकालीन शासक

 1. रानी एलिजाबेथ | 1558-1603 ई. | इंग्लैंड

 2. शाह अब्बास | 1588-1629 ई. | ईरान

 3. जार ईवान IV वेसिलियेविच* | 1530-1584 ई. | रूस

**जार ईवान IV वेसिलियेविच, ईवान दि टेरिबल नाम से कुख्यात था।*

➣ **अकबर का शिक्षक अब्दुल लतीफ ईरानी विद्वान था।**

➣ वह जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर वादशाही गाजी की उपाधि से राजसिंहासन पर बैठा।

➣ **बैरम खाँ (*शिया मतावलम्बी*) 1556 से 1560 ई. तक अकबर का संरक्षक रहा।** वह बदख्शाँ का निवासी था। उसे प्यार से 'खानी-बाबा' कहा जाता था।

➣ **पानीपत की दूसरी लड़ाई 5 नवम्बर, 1556 ई. को अकबर और हेमू के बीच हुई थी। इस युद्ध में अकबर की विजय हुई थी।**

➣ 31 जनवरी, 1561 को मक्का की तीर्थ-यात्रा के दौरान पाटन नामक स्थान पर मुबारक खाँ नामक युवक ने बैरम खाँ की हत्या कर दी।

➣ **मई, 1562 में अकबर ने हरम-दल से अपने को पूर्णतः मुक्त कर लिया।**

➣ **हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून, 1576 ई. को मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप एवं अकबर के बीच हुआ। इस युद्ध में अकबर विजयी हुआ। इस युद्ध में मुगल सेना का नेतृत्व मान सिंह एवं आसफ खाँ ने किया था। अकबर का सेनापति मान सिंह था।**

➣ **हल्दीघाटी युद्ध के समय कुम्भलगढ़ राणा प्रताप का राजधानी थी।** राणा की ओर से इस युद्ध में हाकिम खाँ सूर के नेतृत्व में एक अफगान फौजी टुकड़ी एवं भीलों की एक छोटी-सी सेना ने भाग लिया था।

➣ महाराणा प्रताप की मृत्यु 19 जनवरी, 1597 ई. में एक सख्त धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते समय अन्दरूनी चोट लग जाने के कारण हो गयी। हल्दीघाटी के युद्ध के बाद राणा प्रताप ने डुंगरपुर के निकट चांवड़ में नई राजधानी बनाई। महाराणा प्रताप के घोड़े का नाम चेतक एवं हाथी का नाम राम प्रसाद था।

➣ **दीन-ए-इलाही धर्म का प्रधान पुरोहित अकबर था।**

➣ दीन-ए-इलाही धर्म स्वीकार करने वाला प्रथम एवं अन्तिम हिन्दू शासक राजा बीरबल था। **महेशदास** नामक ब्राह्मण को राजा बीरबल की पदवी दी गयी थी जो हमेशा अकबर के साथ रहता था।

➣ अकबर ने जैनधर्म के जैनाचार्य हरिविजय सूरी को **जगत्गुरु** की उपाधि प्रदान की थी।

➣ अकबर ने शाही दरबार में एक अनुष्ठान के रूप में सूर्योपासना शुरू करवाई।

➣ **राजस्व प्राप्ति की जब्त प्रणाली अकबर के शासनकाल में प्रचलित थी।**

➣ अकबर के दीवान **राजा टोडरमल (खत्री जाति)** ने 1580 ई. में दहसाल बन्दोबस्त व्यवस्था लागू की।

➣ गुजरात-विजय के दौरान अकबर सर्वप्रथम पुर्तगालियों से मिला और यही उसने सर्वप्रथम समुद्र को देखा।

**नोट : गुजरात अभियान को इतिहासकार स्मिथ ने संसार के इतिहास का सर्वाधिक द्रुतगामी आक्रमण कहा है।**

➣ अकबर के दरबार के प्रसिद्ध चित्रकार **अब्दुस् समद** था

।

➣ अकबर के दरबार का प्रसिद्ध संगीतकार **तानसेन** था।



### अकबर द्वारा जीते गए प्रदेश

| क्र. | प्रदेश | शासक | वर्ष | मुगल सेनापति |

|---|---|---|---|---|

| 1. | मालवा | बाज बहादुर | 1561 | आधम खाँ, पीर मुहम्मद |

| 2. | चुनार | अफगानों का शासन | 1562 | अब्दुल्ला खाँ |

| 3. | आमेर | भारमल | 1562 | स्वेच्छा से अधीनता स्वीकार |

| 4. | मेड़ता | जयमल | 1562 | सरफुद्दीन |

| 5. | गोडवाना | वीरनारायण एवं दुर्गावती | 1564 | आसफ खाँ |

| 6. | मेवाड़ | उदय सिंह एवं राणा प्रताप | 1568, 1576 | स्वयं अकबर, मान सिंह एवं आसफ खाँ |

| 7. | रणथम्भौर | सुरजनहाड़ा | 1569 | भगवान दास एवं अकबर |

| 8. | कालिंजर | रामचन्द्र | 1569 | मजनू खाँ काकशाह |

| 9. | मारवाड़ | राव चन्द्रसेन | 1570 | स्वेच्छा से अधीनता स्वीकार |

| 10. | जैसलमेर | रावल हरराय | 1570 | स्वेच्छा से अधीनता स्वीकार |

| 11. | बीकानेर | कल्याणमल | 1570 | स्वेच्छा से अधीनता स्वीकार |

| 12. | गुजरात | मुजफ्फर खाँ-III | 1571 | सम्राट् अकबर |

| 13. | बिहार व बंगाल | दाऊद खाँ | 1574-76 | मुनीम खाँ खानखाना |

| 14. | काबुल | हकीम मिर्जा | 1581 | मानसिंह एवं अकबर |

| 15. | कश्मीर | युसुफ याकूब खाँ | 1586 | भगवान दास व कासिम खाँ |

| 16. | उड़ीसा | निसार खाँ | 1592 | मान सिंह |

| 17. | सिन्ध | जानी बेग | 1593 | अब्दुर्रहीम खानखाना |

| 18. | बलूचिस्तान | पन्नी अफगान | 1595 | मीर मासूम |

| 19. | कन्धार | मुजफ्फर हुसैन | 1595 | शाह बेग |

#### दक्षिण भारत

| क्र. | प्रदेश | शासक | वर्ष | मुगल सेनापति |

|---|---|---|---|---|

| 1. | खानदेश | अली खाँ | 1591 | स्वेच्छा से अधीनता स्वीकार |

| 2. | दौलताबाद | चाँद बीबी | 1599 | मुराद, अब्दुर्रहीम खानखाना, अबुल फजल, अकबर |

| 3. | अहमदनगर | बहादुर शाह चाँद बीबी | 1600 | — |

| 4. | असीरगढ़ | मीरन बहादुर | 1601 | अकबर (यह अकबर का अंतिम अभियान था) |

### अकबर के कुछ महत्वपूर्ण कार्य

| कार्य | वर्ष |

|---|---|

| दासप्रथा का अन्त | 1562 |

| अकबर को हरमदल से मुक्ति | 1562 |

| तीर्थयात्रा कर समाप्त | 1563 |

| जजिया-कर समाप्त | 1564 |

| फतेहपुरसीकरी की स्थापना एवं राजधानी का आगरा से फतेहपुर सीकरी स्थानान्तरण | 1571 |

| इबादतखाने की स्थापना | 1575 |

| इबादतखाने में सभी धर्मों के लोगों के प्रवेश की अनुमति | 1578 |

| मजहर की घोषणा | 1579 |

| दीन-ए-इलाही की स्थापना | 1582 |

| इलाही संवत् की शुरुआत | 1583 |

| राजधानी लाहौर स्थानांतरित | 1585 |

➣ **दसवंत एवं बसावन अकबर के दरबार के चित्रकार थे।**

➣ अकबर के शासनकाल के प्रमुख गायक **तानसेन, बाज बहादुर, बाबा रामदास एवं बैजू बावरा** थे। संगीत सम्राट् तानसेन का जन्म 1506 ई. में ग्वालियर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनका असली नाम रामतनु पांडेय था। यह ध्रुपद गायन शैली का महान संगीतकार था। ये बीण बजाते थे। इनकी प्रमुख कृतियाँ थीं—मियाँ की टोड़ी, मियाँ का मल्हार, मियाँ का सारंग, दरबारी कान्हरा आदि। कण्ठाभरण वाणीविलास की उपाधि अकबर ने तानसेन को दी थी। तानसेन, अकबर के दरबार में आने से पूर्व रीवाँ के राजा रामचन्द्र के राजाश्रय में थे।

➣ अकबर के काल में **स्वामी हरिदास** भी एक महान संगीतज्ञ थे। ये वृंदावन में रहकर भगवान की उपासना करते थे। एक मत के अनुसार हरिदास तानसेन के गुरु थे जबकि कुछ विद्वान हरिदास एवं तानसेन दोनों को मानसिंह तोमर का शिष्य बतलाते हैं। यह भी प्रचलित है कि हरिदास का गाना सुनने के लिए अकबर को इनकी कुटिया पर जाना पड़ा, क्योंकि इन्होंने अकबर के दरबार में जाने से मना कर दिया था। इनका कहना था कि वे केवल अपने भगवान के लिए ही गाते हैं, दरबार से उनका कोई सरोकार नहीं।

➣ **दास्तान-ए-अमीर हम्ज़ा, हम्ज़ानामा (प्रसिद्ध अरबी महाकाव्य) के नाम से भी प्रसिद्ध है।** यह मुगल चित्रशाला की सबसे पहली अत्यंत महत्वपूर्ण कृति है। इसमें हज़रत मुहम्मद साहब के चाचा अमीर हम्ज़ा के वीरतापूर्ण कारनामों का चित्रित संग्रह है। इस पाण्डुलिपि का चित्रण मीर सैयद अली (पर्यवेक्षक) और अब्दुस्समद के नेतृत्व में ग्वालियर, गुजरात, लाहौर, कश्मीर तथा मालवा आदि से बुलाए गए लगभग 100 चित्रकारों के एक समूह ने किया। हम्ज़ानामा को चित्रित करने का कार्य हुमायूँ के काल में प्रारंभ हुआ और अकबर के काल में पूर्ण हुआ। इस कार्य को पूरा करने में 15 वर्ष लगे। इसे अंतिम रूप से चित्रित करने का कार्य अब्दुस्समद ने किया। इसके चित्र को चित्रपट कहा गया।

➣ **अकबर की शासन-प्रणाली की प्रमुख विशेषता मनसबदारी प्रथा थी।**

➣ अकबर के समकालीन प्रसिद्ध सूफी सन्त **शेख सलीम चिश्ती** थे।

➣ **अकबर की मृत्यु 16 अक्टूबर, 1605 ई. को हुई।** इसे आगरा के निकट सिकंदरा में दफनाया गया।

➣ स्थापत्यकला के क्षेत्र में अकबर की महत्वपूर्ण कृतियाँ हैं—दिल्ली में हुमायूँ का मकबरा, आगरा का लालकिला, फतेहपुर सीकरी में शाहीमहल, दीवाने खास, पंचमहल, बुलंद दरवाजा, जोधाबाई का महल, इबादतखाना, इलाहाबाद का किला और लाहौर का किला।

➣ अकबर के दरबार को सुशोभित करने वाले **नौ रत्न** थे—1. अबुल फजल (1551-1602), 2. फैजी (1547-1595), 3. तानसेन, 4. बीरबल (1528-1583), 5. टोडरमल, 6. राजा मान सिंह, 7. अब्दुल रहीम खान-ए-खाना, 8. फकीर अजीउद्दीन, 9. मुल्ला दो प्याजा।

➣ अबुल-फजल का बड़ा भाई फैजी अकबर के दरबार में राजकवि के पद पर आसीन था। इसने भास्कराचार्य की पुस्तक **लीलावती** का फारसी में अनुवाद किया। इसे फारसी काव्य का मास्टर माना जाता था।

➣ अबुल-फजल ने **अकबरनामा** ग्रंथ की रचना की। वह दीन-ए-इलाही धर्म का मुख्य पुरोहित था।

➣ अकबर ने भगवान दास (आमेर के राजा भारमल के पुत्र) को **अमीर-उल-उमरा** की उपाधि दी।

➣ युसुफजाइयों के विद्रोह को दबाने के दौरान बीरबल की हत्या हो गयी।

➣ 1602 ई. में सलीम (जहाँगीर) के निर्देश पर दक्षिण से आगरा की ओर आ रहे अबुल-फजल को रास्ते में **वीर सिंह बुन्देला** नामक सरदार ने हत्या कर दी।

➣ मुगल सम्राट् अकबर ने **'अनुवाद विभाग'** की स्थापना की। नकीब खाँ, अब्दुल कादिर बदायूंनी तथा शेख सुल्तान ने रामायण एवं महाभारत का फारसी अनुवाद किया व महाभारत का नाम **'रज्मनामा' (युद्धों की पुस्तक)** रखा।

➣ पंचतंत्र का फारसी भाषा में अनुवाद अबुल फजल ने **अनवर-ए-सादात** नाम से तथा मौलाना हुसैन फैज ने **यार-ए-दानिश** नाम से किया। हाजी इब्राहिम सरहदी ने अथर्ववेद का, मुल्लाशाह मोहम्मद ने राजतरंगिणी का, अब्दुर्रहीम खानखाना ने **'तुजुक-ए-बाबरी'** का तथा फैजी ने लीलावती का फारसी में अनुवाद किया। फैजी ने नल दमयन्ती (*सूरदास द्वारा रचित*) कथा का फारसी में अनुवा

द कर उसका नाम **'सहेली'** रखा। भागवत पुराण का अनुवाद फारसी...



...में टोडरमल ने किया। अब्दुल कादिर बदायूँनी ने सिंहासन बत्तीसी का अनुवाद फारसी में किया। ज्योतिष के प्रसिद्ध ग्रंथ तजक एवं तुजुक का फारसी में अनुवाद जहान-ए-जफर नाम से मुहम्मद खाँ गुजराती ने किया।

**नोट : पंचतंत्र का अरबी भाषा में अनुवाद कलीला वा डिमना कहलाता है।**

➣ निजामुद्दीन पानीपत ने रामायण के परिशिष्ट के रूप में योगवासिष्ठ (वेदान्तिक दर्शन पर एक ग्रंथ) का फारसी में अनुवाद किया।

➣ **अकबर के काल को हिन्दी साहित्य का स्वर्णकाल कहा जाता है।**

➣ अकबर ने बीरबल को **कविप्रिय** एवं नरहरि को **महापात्र** की उपाधि प्रदान की।

➣ **बुलन्द दरवाजा का निर्माण अकबर ने गुजरात-विजय के उपलक्ष्य में करवाया था।**

➣ चार बाग बनाने की परंपरा अकबर के समय शुरू हुई।

➣ अकबर ने **शीरीं कलम** की उपाधि **अब्दुस्समद** को एवं **जड़ी कलम** की उपाधि **मुहम्मद हुसैन कश्मीरी** को दिया।

**नोट : मुगलों की राजकीय भाषा फारसी थी।**

➣ अकबर नक्कारा (नगाड़ा) नामक वाद्ययंत्र बजाता था।

➣ मुगल मुद्रा व्यवस्था को सुव्यवस्थित रूप प्रदान करने का श्रेय अकबर को प्राप्त है। उसके एक सिक्के पर कलमें की जगह **अल्लाह-उ-अकवर, जल्ले-जलालहू** तथा दूसरी ओर टकसाल का नाम अंकित था। उसके चाँदी के एक अन्य सिक्के के एक भाग पर धनुर्धारी राम और राम के पीछे सीता की प्रतिमाएँ अंकित हैं और ऊपर **रामसियम** शब्द अंकित है।

➣ अकबर ने असीरगढ़ के विजय की स्मृति में अपने सिक्कों पर बाज की आकृति अंकित करवाई।

### जहाँगीर (1605-1627 ई.)

➣ अकबर का उत्तराधिकारी **सलीम** हुआ, जो 24 अक्टूबर, 1605 को नुरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर बादशाही गाजी की उपाधि धारण कर गद्दी पर बैठा। जहाँगीर का जन्म 30 अगस्त, 1569 में हुआ था।

➣ अकबर ने अपने पुत्र का नाम सलीम सूफी संत **शेख सलीम चिश्ती** के नाम पर रखा।

➣ **जहाँगीर को न्याय की जंजीर के लिए याद किया जाता है।** यह जंजीर सोने की बनी थी, जो आगरा के किले के शाहबुर्ज एवं यमुना-तट पर स्थित पत्थर के खम्भे में लगवाई हुई थी।

➣ जहाँगीर द्वारा शुरू की गई 'तुजुक-ए-जहाँगीरी' नामक आत्मकथा को पूरा करने का श्रेय **मौतबिंद खाँ** को है।

➣ जहाँगीर के सबसे बड़े पुत्र **खुसरो** ने 1606 ई. में अपने पिता के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। खुसरो और जहाँगीर की सेना के बीच युद्ध जालंधर के निकट भैरवल नामक मैदान में हुआ। खुसरो को पकड़कर कैद में डाल दिया गया।

➣ खुसरो की सहायता देने के कारण जहाँगीर ने सिक्खों के 5वें गुरु **अर्जुनदेव** को फाँसी दिलवा दी। खुसरो गुरु से गोइंदवाल में मिला था।

➣ अहमदनगर के वजीर मलिक अम्बर के विरुद्ध सफलता से खुश होकर जहाँगीर ने खुर्रम को **शाहजहाँ** की उपाधि प्रदान की।

➣ 1622 ई. में कंधार मुगलों के हाथ से निकल गया। शाह अब्बास ने इस पर अधिकार कर लिया।

➣ **नूरजहाँ :** ईरान निवासी मिर्जा गयास बेग की पुत्री नूरजहाँ का वास्तविक नाम **मेहरुन्निसा** था। 1594 में नूरजहाँ का विवाह अलीकुली बेग से सम्पन्न हुआ। जहाँगीर ने एक शेर मारने के कारण अली कुली बेग को **शेर अफगान** की उपाधि प्रदान की। 1607 में शेर अफगान की मृत्यु के बाद मेहरुन्निसा अकबर की विधवा सलीमा बेगम की सेवा में नियुक्त हुई। सर्वप्रथम जहाँगीर ने नवरोज त्यौहार के अवसर पर मेहरुन्निसा को देखा और उसके सौंदर्य पर मुग्ध होकर जहाँगीर ने मई, 1611 में उससे विवाह कर लिया। विवाह के पश्चात् जहाँगीर ने उसे **नूरमहल** व **नूरजहाँ** की उपाधि प्रदान की। नूरजहाँ के सम्मान में जहाँगीर ने चाँदी के सिक्के जारी किए।

➣ जहाँगीर ने गियास बेग को शाही दीवान बनाया एवं **इतमाद-उद-दौला** की उपाधि दी। जहाँगीर के शासनकाल में ईरानियों को उच्च पद प्राप्त हुए।

➣ लाडली बेगम शेर अफगान एवं मेहरुन्निसा की पुत्री थी, जिसकी शादी जहाँगीर के पुत्र शहरयार के साथ हुई थी।

➣ **नूरजहाँ की माँ अस्मत बेगम ने गुलाब से इत्र निकालने की विधि खोजी थी।**

➣ महाबत खाँ ने झेलम नदी के तट पर 1626 ई. में जहाँगीर, नूरजहाँ एवं उसके भाई आसफ खाँ को बन्दी बना लिया था।

➣ जहाँगीर के पाँच पुत्र थे— 1. खुसरो, 2. परवेज, 3. खुर्रम, 4. शहरयार, 5. जहाँदार।

➣ 28 अक्तू., 1627 को भीमवार नामक स्थान पर जहाँगीर की मृत्यु हो गयी। उसे **शहादरा (लाहौर)** में रावी नदी के किनारे दफनाया गया।

➣ मुगल चित्रकला अपने चरमोत्कर्ष पर जहाँगीर के शासनकाल में पहुँची।

➣ जहाँगीर के दरबार के प्रमुख चित्रकार थे— **आगा रजा, अबुल हसन, मुहम्मद नासिर, मुहम्मद मुराद, उस्ताद मंसूर, बिसनदास, मनोहर एवं गोवर्धन, फारुख बेग, दौलत।**

➣ जहाँगीर ने **आगा रजा** के नेतृत्व में आगरा में एक चित्रणशाला की स्थापना की।

**नोट : मुगल शासकों में सर्वप्रथम जहाँगीर ने ही राजा की आकृति युक्त सिक्के जारी किए। इसके समय निसार चाँदी का सिक्का था जो रुपए के चौथाई के बराबर होता था।**

➣ उस्ताद मंसूर एवं अबुल हसन को जहाँगीर ने क्रमशः **नादिर-अल-उस** एवं **नादिरुज्जमा** की उपाधि प्रदान की। इसने संस्कृत के कवि जगन्नाथ को **'पंडितराज'** की उपाधि दी।

➣ जहाँगीर ने अपनी आत्मकथा में लिखा कि कोई भी चित्र चाहे वह किसी मृतक व्यक्ति या जीवित व्यक्ति द्वारा बनाया गया हो, मैं देखते ही तुरन्त बता सकता हूँ कि यह किस चित्रकार की कृति है। यदि किसी चेहरे पर आँख किसी एक चित्रकार ने, भौंह किसी और ने बनाई हो, तो भी यह जान लेता हूँ कि आँख किसने और भौंह किसने बनायी है।

➣ **जहाँगीर के समय को चित्रकला का स्वर्णकाल कहा जाता है।**

➣ इतमाद-उद-दौला का मकबरा 1626 ई. में नूरजहाँ बेगम ने बनवाया। मुगलकालीन वास्तुकला के अन्तर्गत निर्मित यह प्रथम ऐसी इमारत है, जो पूर्णरूप से बेदाग सफेद संगमरमर से निर्मित है। सर्वप्रथम इसी इमारत में **पितरा दुरा** नामक जड़ाऊ काम किया गया।

➣ अशोक के कौशाम्बी स्तम्भ (वर्तमान में प्रयाग) पर समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति तथा जहाँगीर का लेख उत्कीर्ण है।

➣ जहाँगीर के मकबरा का निर्माण **नूरजहाँ** ने करवाया था।

➣ जहाँगीर के शासनकाल में कैप्टन हॉकिन्स, (प्रथम अंग्रेज) सर थॉमस रो, विलियम फिंच एवं एडवर्ड टेरी जैसे यूरोपीय यात्री आए थे।

➣ भारत में तंबाकू की खेती सर्वप्रथम जहाँगीर के शासन काल में प्रारंभ हुई थी। पुर्तगालियों द्वारा सर्वप्रथम 1605 ई. में दक्षिण में तंबाकू की खेती प्रारंभ किया गया। पुर्तगाली इसे ब्राजील से लाए थे।

**नोट : जहाँगीर के समय ही मराठे पहली बार मुगलों की सेवा में 1620 आए।**

### शाहजहाँ (1627-1657 ई.)

➣ जहाँगीर के बाद सिंहासन पर **शाहजहाँ** बैठा।

➣ जोधपुर के शासक मोटा राजा उदय सिंह की पुत्री **जगत गोसाईं** के गर्भ से 5 जनवरी, 1592 ई. को खुर्रम (शाहजहाँ) का जन्म लाहौर में हुआ था। 1612 ई. में खुर्रम का विवाह आसफ खाँ की पुत्री अरजुमन्द बानो बेगम से हुआ, जिसे शाहजहाँ ने मल्लिका-ए-जमानी की उपाधि प्रदान की। 7 जून, 1631 

ई. में प्रसव-पीड़ा के कारण उसकी मृत्यु हो गयी।



➣ **4 फरवरी, 1628***\1 को शाहजहाँ आगरा में **अबुल मुजफ्फर शहाबुद्दीन मुहम्मद साहिब किरन-ए-साानी** की उपाधि प्राप्त कर सिंहासन पर बैठा।

➣ शाहजहाँ ने आसफ खाँ को वजीर पद एवं महाबत खाँ को खानखाना की उपाधि प्रदान की।

➣ उसने नूरजहाँ को दो लाख रुपये प्रतिवर्ष की पेंशन देकर लाहौर जाने दिया, जहाँ 1645 ई. में उसकी मृत्यु हो गयी।

➣ अपनी बेगम मुमताज महल की याद में शाहजहाँ ने ताजमहल का निर्माण आगरा में उसकी कब्र के ऊपर करवाया। उस्ताद ईशा ने ताजमहल की रूप-रेखा तैयार की थी।

➣ ताजमहल का निर्माण करनेवाला मुख्य स्थापत्य कलाकार **उस्ताद अहमद लाहौरी** था।

➣ मयूर सिंहासन का निर्माण शाहजहाँ ने करवाया था। इसका मुख्य कलाकार **बे बादल खाँ** था। बादशाह के सिंहासन के पीछे पितरा-दुरा के जड़ाऊ काम की एक शृंखला बनाई गयी थी, जिससे पौराणिक यूनानी देवता **आर्फियस** को वीणा बजाते हुए चित्रित किया गया है।

**नोट : पितरा-दुरा : जब संगमरमर या बलुआ पत्थर में नक्काशी किए गए खुदाई में रखे गए रंगीन सख्त पत्थर सुंदर अलंकृत पैटर्न बनाते हैं तो उसे ही पितरा-दुरा कहा जाता है।**

➣ **शाहजहाँ के शासनकाल को स्थापत्यकला का स्वर्णयुग कहा जाता है।** शाहजहाँ द्वारा बनवायी गयी प्रमुख इमारतें हैं— दिल्ली का लाल किला, दीवाने आम, दीवाने खास, दिल्ली का जामा मस्जिद, आगरा का मोती मस्जिद, ताजमहल एवं लाहौर किला स्थित शीश महल आदि।

**नोट : हुमायूँ के मकबरा को ताजमहल का पूर्ववर्ती माना जाता है।**

➣ शाहजहाँ ने 1632 में अहमदनगर को मुगल साम्राज्य में मिला लिया।

➣ शाहजहाँ ने 1638 ई. में अपनी राजधानी को आगरा से दिल्ली लाने के लिए यमुना नदी के दाहिने तट पर **शाहजहाँनाबाद** की नींव डाली।

➣ आगरे के जामा मस्जिद का निर्माण शाहजहाँ की पुत्री **जहाँआरा** ने करवाई।

➣ शाहजहाँ के दरबार के प्रमुख चित्रकार **मुहम्मद फकीर** व **मीर हासिम** थे व प्रमुख संस्कृत कवि **वंशीधर मिश्र** एवं **हरिनारायण मिश्र** थे।

➣ शाहजहाँ ने संगीतज्ञ लाल खाँ को **'गुण समन्दर'** की उपाधि एवं संगीतज्ञ जगन्नाथ को जिन्हें हिन्दी का कवि भी था, को **महाकविराय** की उपाधि से सम्मानित किया।

➣ शाहजहाँ के पुत्रों में **दारा शिकोह** सर्वाधिक विद्वान था। उसने भगवद्गीता, योगवाशिष्ठ, उपनिषद् एवं रामायण का अनुवाद फारसी में करवाया। उसने **सर्र-ए-अकबर (महान रहस्य)** नाम से उपनिषदों का अनुवाद करवाया था। दारा शिकोह कादिरी सिलसिले के मुल्ला शाह बदख्शी का शिष्य था। फ्रांसा बर्नियर दारा शिकोह का चिकित्सक था।

➣ शाहजहाँ की पुत्री जहाँआरा ने शेख मुइनद्दीन चिश्ती की जीवनी **मुनिस अल अरवाह** नाम से लिखी। जहाँआरा मुल्लाशाह बदख्शी की शिष्या थी। इसने भी कादिरी सुफी सिलसिले में दीक्षा ली थी।

➣ शाहजहाँ ने दिल्ली में एक कॉलेज का निर्माण एवं दारुल बका नामक कॉलेज की मरम्मत करायी।

➣ सितम्बर, 1657 ई. में शाहजहाँ के गंभीर रूप से बीमार पड़ने और मृत्यु का अफवाह फैलने के कारण उसके पुत्रों के बीच उत्तराधिकार का युद्ध प्रारंभ हुआ। उस समय सूजा बंगाल, मुराद गुजरात एवं औरंगजेब दक्कन में था।

➣ **15 अप्रैल, 1658 ई.** में दारा एवं औरंगजेब के बीच **धरमट का युद्ध** हुआ। इस युद्ध में दारा की पराजय हुई।

*\1 द गजटियर ऑफ इंडिया (V. II) P. 327

➣ **सामूगढ़ का युद्ध 29 मई, 1658 ई.** को दारा एवं औरंगजेब के बीच हुआ। इस युद्ध में भी दारा की हार हुई। उत्तराधिकार का अन्तिम युद्ध **देवराई की घाटी** में मार्च, 1659 ई. को हुआ। इस युद्ध में दारा के पराजित होने पर उसे इस्लाम धर्म की अवहेलना करने के अपराध में **30 अगस्त, 1659 ई.** को हत्या कर दी गई। दारा शिकोह ने अपना निर्वासित जीवन **अलवर (राजस्थान)** के कंकवाड़ी किला में बिताया। इस किला का निर्माण जय सिंह-II ने किया था।

➣ **शाह बुलंद इकबाल (king of Lofty fortune)** के रूप में दारा शिकोह जाना जाता है।

➣ **8 जून, 1658 को औरंगजेब ने शाहजहाँ को बंदी बना लिया।** आगरा के किले में अपने कैदी जीवन के आठवें वर्ष अर्थात् **22 जनवरी, 1666 को 74 वर्ष की अवस्था में शाहजहाँ की मृत्यु हो गयी।**

### औरंगजेब (1658-1707 ई.)

➣ औरंगजेब का जन्म **24 अक्टूबर, 1618 ई.** को **दोहाद (गुजरात)** नामक स्थान पर हुआ था।

➣ औरंगजेब के बचपन का अधिकांश समय नूरजहाँ के पास बीता। 18 मई, 1637 को फारस के राजघराने की **'दिलरास बानो बेगम'** के साथ औरंगजेब का निकाह हुआ।

➣ आगरा पर कब्जा कर जल्दबाजी में औरंगजेब ने अपना राज्याभिषेक **'अबुल मुजफ्फर मुहीउद्दीन मुहम्मद औरंगजेब बहादुर आलमगीर बादशाह गाजी'** की उपाधि से **31 जुलाई, 1658 को करवाया।** देवराई के युद्ध में सफल होने के बाद **15 मई, 1659 को औरंगजेब ने दिल्ली में प्रवेश किया** और शाहजहाँ के शानदार महल में **5 जून, 1659 को दूसरी बार राज्याभिषेक करवाया।**

➣ औरंगजेब के गुरु थे— **मीर मुहम्मद हकीम।**

➣ औरंगजेब सुन्नी धर्म को मानता था, उसे **जिन्दा पीर** कहा जाता था।

➣ जय सिंह एवं शिवाजी के बीच **पुरन्दर की संधि 22 जून, 1665 ई.** को सम्पन्न हुई।

➣ मई, 1666 ई. को आगरा के किले के दीवान-ए-आम में औरंगजेब के समक्ष शिवाजी उपस्थित हुए। यहाँ शिवाजी को कैद कर **जयपुर भवन** में रखा गया। इस्लाम नहीं स्वीकार करने के कारण सिक्खों के 9वें गुरु **तेगबहादुर की हत्या** औरंगजेब ने **1675 ई.** में दिल्ली में करवा दी थी।

➣ औरंगजेब ने **1679 ई.** में **जजिया-कर को पुनः लागू किया।**

#### जजिया कर

यह गैर मुस्लिमों से लिया जाने वाला कर था। किन्तु ब्राह्मण, संत, वृद्ध, निर्धन, पागल, अल्पवयस्क व स्त्रियों से यह नहीं लिया जाता था। भारत में सर्वप्रथम **मीर कासिम ने 712 ई.** में सिंध विजय के बाद जजिया की वसूली प्रारंभ की। फिरोज तुगलक ने ब्राह्मणों से भी जजिया वसूल किया। मुगल काल में बाबर एवं हुमायूँ के काल में जजिया प्रचलित थी। किन्तु अकबर ने 1564 ई. में इसे बंद कर दिया था। औरंगजेब ने 1679 ई. में सर्वप्रथम मारवाड़ में जजिया की वसूली का आदेश दिया। तत्पश्चात् राज्य के अन्य भागों में वसूला जाने लगा। जजिया की अंतिम रूप से समाप्ति **मोहम्मद शाह के समय 1720 ई.** में हुई।

➣ औरंगजेब ने **बीबी का मकबरा** का निर्माण **1679 ई.** में औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में करवाया।

➣ औरंगजेब के समय हुए जाट विद्रोह का नेतृत्व **गोकुला एवं राजाराम** ने किया था। **1670 ई.** में तिलपत की लड़ाई में जाट परास्त हुए। गोकुल को मौत के घाट उतार दिया गया। इसके बावजूद जाटो ने **1685 ई.** में राजाराम के नेतृत्व में पुनः विद्रोह किया। इन जाटों ने सिकन्दरा में स्थित अकबर के मकबरे को भी लूटा। भरतपुर राजवंश की नींव औरंगजेब के शासनकाल में जाट नेता एवं राजाराम के भतीजा **चूरामन** ने डाली।

➣ **1686 ई.** में बीजापुर एवं **1687 ई.** में गोलकुण्डा को औ

रंगजेब ने मुगल साम्राज्य में मिला लिया।



➣ मदन्ना एवं अकन्ना नामक ब्राह्मणों का संबंध गोलकुण्डा के शासक **अबुल हसन** से था।

➣ **औरंगजेब के समय में हिन्दू मनसबदारों की संख्या लगभग 337 थी**, जो अन्य मुगल सम्राटों की तुलना में अधिक थी। औरंगजेब सर्वाधिक हिन्दू अधिकारियों की नियुक्ति करने वाला मुगल सम्राट् था।

➣ औरंगजेब का पुत्र अकबर ने दुर्गादास के बहकावे में आकर अपने पिता के खिलाफ विद्रोह किया।

➣ **औरंगजेब ने कुरान को अपने शासन का आधार बनाया।** उसने सिक्के पर कलमा खुदवाना, नवरोज का त्यौहार मनाना, भाँग की खेती करना, गाना-बजाना, झरोखा दर्शन, तुलादान प्रथा (*इस प्रथा में सम्राट् को उसके जन्म-दिन पर सोने, चाँदी तथा अन्य वस्तुओं से तौलने की प्रथा थी*) हिन्दू-राजाओं के माथे पर अपने हाथ से तिलक लगाना (*जिसे अकबर ने प्रारंभ किया था*), सती प्रथा आदि पर प्रतिबंध लगा दिया। वेश्याओं को शादी करने अथवा देश छोड़ देने के आदेश दिए और दरबार में होली, दीवाली आदि त्यौहार मनाने बन्द कर दिए।

➣ **औरंगजेब ने दरबार में संगीत पर पाबन्दी लगा दी** तथा सरकारी संगीतज्ञों को अवकाश दे दिया गया। भारतीय शास्त्रीय संगीत पर फारसी में सबसे अधिक पुस्तकें औरंगजेब के ही शासनकाल में लिखी गयीं। औरंगजेब स्वयं **वीणा** बजाने में दक्ष था।

➣ **औरंगजेब ने 1665 ई. में हिन्दू मंदिरों को तोड़ने का आदेश दिया।** इसके शासनकाल में तोड़े गए प्रमुख मंदिरों में पाटन का सोमनाथ का मंदिर, बनारस का विश्वनाथ मंदिर एवं वीर सिंह देव द्वारा जहाँगीर काल में मथुरा में निर्मित केशव देव राय मंदिर थे।

➣ **औरंगजेब की मृत्यु 20 फरवरी, 1707 ई.** को हुई। इसे खुलदाबाद (Khuldabad) जो अब रोजा (Roza) कहलाता है, में दफनाया गया। औरंगजेब के समय सूबों की संख्या 20 थी।

➣ औरंगजेब दारुल हर्ब (काफिरों का देश) को दारुल इस्लाम (इस्लाम का देश) में परिवर्तित करने को अपना महत्वपूर्ण लक्ष्य मानता था।

**नोट : औरंगजेब के शासनकाल में मुगल सेना में सर्वाधिक हिन्दू सेनापति थे।**

➣ फ्रांसीसी यात्री फ्रांकोइस बर्नियर औरंगजेब के चिकित्सक थे।

### 37. मुगल शासन व्यवस्था

➣ मंत्रिपरिषद को **विजारत** कहा जाता था।

➣ बाबर के शासनकाल में **वजीर** पद काफी महत्वपूर्ण था।

➣ सम्राट् के बाद शासन के कार्यों को संचालित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी **वकील** था जिसके कर्तव्यों को अकबर ने दीवान, मीरबख्शी, सदर-उस-सद्र व मीर समन में विभाजित कर दिया।

➣ औरंगजेब के समय में **असद खान** ने सर्वाधिक 31 वर्षों तक दीवान के पद पर कार्य किया।

➣ मीरबख्शी द्वारा **'सरखत'** नाम के पत्र पर हस्ताक्षर के बाद ही सेना को हर महीने वेतन मिल पाता था।

➣ जब कभी सद्र न्याय विभाग के प्रमुख का कार्य करता था, तब उसे **काजी** कहा जाता था।

➣ लगानहीन भूमि (मदद-ए-माश) का निरीक्षण सद्र करता था।

➣ सम्राट् के घरेलू विभागों का प्रधान **मीर समा** कहलाता था।

➣ सूचना व गुप्तचर विभाग का प्रधान **दरोगा-ए-डाक चौकी** कहलाता था।

➣ शरीयत के प्रतिकूल कार्य करनेवालों को रोकना, आम जनता के दुश्चरित्रता से बचाने का कार्य **मुहतसिव** नामक अधिकारी करता था।

➣ प्रशासन की दृष्टि से मुगल साम्राज्य का बँटवारा **सूबों** में, सूबों का **सरकार** में, सरकार का **परगना या महाल** में, महाल का **जिला या दस्तूर** में और दस्तूर **ग्राम** में बँटे थे। प्रशासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम थी, जिसे **मावदा या दीह** कहते थे। मावदा के अन्तर्गत छोटी-छोटी बस्तियों को **नागला** कहा जाता था।

#### मुगल काल के प्रमुख अधिकारी एवं कार्य

| पद | कार्य |

|---|---|

| सूबेदार | प्रांतों में शान्ति स्थापित करना (प्रांत कार्यकारिणी का प्रधान) |

| दीवान | प्रांतीय राजस्व का प्रधान (सीधे शाही दीवान के प्रति जवाबदेह) |

| बख्शी | प्रांतीय सैन्य प्रधान |

| फौजदार | जिले का प्रधान फौजी अधिकारी |

| आमिल या अमलगुजार | जिले का प्रमुख राजस्व अधिकारी |

| कोतवाल | नगर प्रधान |

| शिकदार | परगने का प्रमुख अधिकारी |

| आमिल | ग्राम के कृषकों से प्रत्यक्ष संबंध बनाना एवं लगान निर्धारित करना |

➣ शाहजहाँ के शासनकाल में सरकार एवं परगना के मध्य **चकला** नाम की एक नई इकाई की स्थापना की गयी थी।

➣ भूमिकर के विभाजन के आधार पर मुगल साम्राज्य की समस्त भूमि 3 वर्गों में विभाजित थी—

 1. **खालसा भूमि :** प्रत्यक्ष रूप से बादशाह के नियंत्रण में।

 2. **जागीर भूमि :** तनख्वाह के बदले दी जाने वाली भूमि।

 3. **सयूरगल या मदद-ए-माश :** अनुदान में दी गई लगानहीन भूमि। इसे मिल्क भी कहा जाता था।

➣ शेरशाह द्वारा भू-राजस्व हेतु अपनायी जानेवाली पद्धति राई का उपयोग अकबर ने भी किया था।

➣ अकबर के द्वारा **करोड़ी** नामक अधिकारी की नियुक्ति 1573 ई. में की गयी थी। इसे अपने क्षेत्र से एक करोड़ दाम वसूल करना होता था।

➣ 1580 ई. में अकबर ने दहसाला नाम की नवीन कर प्रणाली प्रारंभ की। इस व्यवस्था को **'टोडरमल बन्दोबस्त'** भी कहा जाता है। इस व्यवस्था के अन्तर्गत भूमि को चार भागों में विभाजित किया गया—

 1. **पोलज :** नियमित रूप से खेती (वर्ष में दो बार फसल)

 2. **परती :** एक या दो वर्ष के अन्तराल पर खेती

 3. **चाचर :** तीन से चार वर्ष के अन्तराल पर खेती

 4. **बंजर :** खेती योग्य भूमि नहीं, इस पर लगान नहीं वसूला जाता था

➣ 1570-71 ई. में टोडरमल ने खालसा भूमि पर भू-राजस्व की नवीन प्रणाली **जब्ती** प्रारंभ की। इसमें कर-निर्धारण की दो श्रेणी थी, एक को तखशीस एवं दूसरे को तहसील कहते थे।

➣ औरंगजेब ने अपने शासनकाल में **नस्क** प्रणाली को अपनाया और भू-राजस्व की राशि को उपज का आधा कर दिया।

➣ मुगल काल में कृषक तीन वर्गों में विभाजित थे—

 1. **खुदकाश्त :** ये किसान उसी गाँव की भूमि पर खेती करते थे, जहाँ के वे निवासी थे।

 2. **पाही काश्त :** ये दूसरे गाँव जाकर कृषि-कार्य करते थे।

 3. **मुजारियन :** खुदकाश्त कृषकों से भूमि किराये पर लेकर कृषि-कार्य करते थे।

➣ मुगल काल में नील उत्पादन के प्रसिद्ध केन्द्र **आगरा, भरतपुर के बयाना तथा गुजरात में सरखेज** थे। सबसे उत्तम प्रकार का नील बयाना क्षेत्र एवं सरखेज में पैदा होता था।

➣ अफीम मुख्यतः **मालवा एवं बिहार** में होता था।

➣ शोरा उत्पादन का प्रमुख केन्द्र **बिहार** था।

➣ कपड़ा उद्योग के अंतर्गत **ददनी प्रथा** का 

प्रचलन था। इसका तात्पर्य कारीगरों को अग्रिम भुगतान से था।



➣ उत्तम श्रेणी का ऊनी वस्त्र और शाल कश्मीर तथा लाहौर में तैयार होता था।

➣ **मुगल काल में रुपये की सर्वाधिक ढलाई औरंगजेब के समय में हुई।**

➣ **आना सिक्के का प्रचलन शाहजहाँ ने करवाया।**

➣ **जहाँगीर ने अपने समय में सिक्कों पर अपनी आकृति बनवायी, साथ ही उस पर अपना एवं नूरजहाँ का नाम अंकित करवाया।**

#### मुगलकालीन लगान वसूल करने की व्यवस्थाएँ

| प्रणाली | विवरण |

|---|---|

| **गल्ला बख्शी** | इसमें फसल का कुछ भाग सरकार द्वारा ले लिया जाता था। |

| **नसक** | इसमें खड़ी फसल के आधार पर लगान का अनुमान लगाकर फसल कटने पर उसे ले लिया जाता था। यह व्यवस्था बंगाल में थी। |

| **जब्ती** | इसमें बोयी गयी फसल के आधार पर लगान का निश्चय किया जाता था, जो नकद लिया जाता था। |

➣ **सबसे बड़ा सिक्का शंसब सोना का था। स्वर्ण का सबसे प्रचलित सिक्का इलाही था।**

#### मुगलकालीन सिक्के

| सिक्का | विवरण |

|---|---|

| **मुहर** | यह मुगल काल का सर्वाधिक प्रचलित सोने का सिक्का था। |

| **शंसब** | अकबर द्वारा चलाया गया सबसे बड़ा सोने का सिक्का था। यह 101 तोले का था। |

| **इलाही** | यह सोने का गोल आकार का सिक्का था। |

| **रहस** | यह गोल एवं चौकोर दोनों तरह का सोने का सिक्का था। यह साढ़े पाँच तोले का था। |

| **अत्माह** | 25 तोले के सोने का सिक्का। |

| **बिनसात** | 20 तोले के सोने का सिक्का। |

| **रुपया** | चाँदी का सिक्का। |

| **जलाली** | चाँदी का सिक्का। |

★ **दरब, चरण, चंदन, छह, कल व सुकी सभी चाँदी के सिक्के थे।**

➣ **मुगलकालीन अर्थव्यवस्था का आधार चाँदी का रुपया था।**

➣ **दस्तक व्यवसाय परमिट था।**

➣ दैनिक लेन-देन के लिए ताँबे के दाम का प्रयोग होता था। **एक रुपया में 40 दाम होते थे।**

➣ मुगल सेना चार भागों में विभक्त थी—

 1. पैदल सेना, 2. घुड़सवार सेना, 3. तोपखाना और 4. हाथी सेना।

   ➣ मुगलकालीन सैन्य व्यवस्था पूर्णतः मनसबदारी प्रथा पर आधारित थी। इसे अकबर ने प्रारंभ किया था।

   ➣ 10 से 500 तक मनसब प्राप्त करनेवाले मनसबदार, 500 से 2500 तक मनसब प्राप्त करनेवाले उमरा एवं 2500 से ऊपर तक मनसब प्राप्त करनेवाले **अमीर-ए-आजम** कहलाते थे।

   ➣ जात से व्यक्ति के वेतन एवं प्रतिष्ठा का ज्ञान होता था, सवार पद से घुड़सवार दस्तों की संख्या का ज्ञान होता था।

**नोट : अकबर के शासनकाल में 29 ऐसे मनसबदार थे जो 5000 जात की पदवी के थे। औरंगजेब के शासनकाल तक ऐसे मनसबदारों की संख्या 79 थी।**

➣ **जहाँगीर ने सवार पद में दो-अस्पा एवं सिंह-अस्पा की व्यवस्था की।** सर्वप्रथम यह पद महाबत खाँ को दिया गया।

➣ मनसबदारों के अलावा कुछ मुगल शहंशाह भी फुटकर घुड़सवार रखते थे जिन्हें **अहदी** कहा जाता था। अहदियों को भद्र घुड़सवार कहा गया है और उनके वेतन दूसरे घुड़सवारों से काफी ज्यादा होते थे। ये बहुत ही विश्वस्त सैन्य-दल के सदस्य होते थे। उनकी भर्ती स्वयं शहंशाह किया करते थे और उनकी हाजिरी लेने के लिए अलग अधिकारी होते थे। अहदी पाँच-पाँच घोड़े भी रखते थे, लेकिन कुछ ऐसे अहदी भी थे जिनमें से दो एक ही घोड़े में हिस्सेदारी करते थे। अहदियों के कर्तव्य बहुमुखी होते थे। शाही कार्यालय के अधिकतर मुंशी, दरबार के चित्रकार और शाही कारखानों के फोरमैन इसी सैन्य दल से चुने जाते थे।

### 38. मराठों का उत्कर्ष

➣ मराठा साम्राज्य का संस्थापक **शिवाजी** थे। शिवाजी का जन्म **6 अप्रैल, 1627 में शिवनेर दुर्ग (जुन्नार के समीप)** में हुआ था*\1।

➣ शिवाजी के पिता का नाम **शाहजी भोंसले** एवं माता का नाम **जीजाबाई** था।

➣ शाहजी भोंसले की दूसरी पत्नी का नाम **तुकाबाई मोहिते** था।

➣ छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु **कोंडदेव** थे।

➣ आध्यात्मिक क्षेत्र में शिवाजी के आचरण पर **गुरु रामदास** का काफी प्रभाव था।

➣ शिवाजी का विवाह **सायबाई निम्बालकर** से 1640 ई. में हुआ।

➣ शाहजी ने शिवाजी को पूना की जागीर प्रदान कर स्वयं बीजापुर रियासत में नौकरी कर ली।

➣ अपने सैन्य अभियान के अन्तर्गत 1644 ई. में शिवाजी ने सर्वप्रथम बीजापुर के **तोरण** नामक पहाड़ी किले पर अधिकार किया।

➣ **1656 ई. में शिवाजी ने रायगढ़ को अपनी राजधानी बनाया।**

➣ शिवाजी को राजा की उपाधि **औरंगजेब** ने दी थी।

➣ बीजापुर के सुल्तान ने अपने योग्य सेनापति **अफजल खाँ** को सितम्बर, 1659 ई. में शिवाजी को पराजित करने के लिए भेजा। शिवाजी ने 10 नवम्बर, 1659 को अफजल खाँ की हत्या कर दी।

➣ **शिवाजी ने सूरत को 1664 ई. एवं 1670 ई. में लूटा।**

➣ **पुरन्दर की संधि 1665 ई. में महाराजा जयसिंह एवं शिवाजी के मध्य सम्पन्न हुई।** उस समय मनुची भी वहाँ उपस्थित था।

➣ शिवाजी को औरंगजेब ने मई, 1666 ई. में जयपुर भवन में कैद कर लिया, जहाँ से वे 16 अगस्त, 1666 ई. में भाग निकले।

➣ 1672 ई. में शिवाजी ने पन्हाला दुर्ग को बीजापुर से छीना।

➣ **5 जून, 1674 ई. को शिवाजी ने रायगढ़ में वाराणसी (काशी) के प्रसिद्ध विद्वान श्री गंगाभट्ट द्वारा अपना राज्याभिषेक करवाया।** मूल रूप से गंगाभट्ट महाराष्ट्र का एक सम्मानित ब्राह्मण था, जो लंबे समय से वाराणसी में रह रहा था।

➣ **कर्नाटक अभियान (1676-78) शिवाजी का अंतिम अभियान था।** इन्होंने 1678 में जिंजी का किला विजियत किया जो उनकी अंतिम विजय थी।

➣ मात्र 53 वर्ष की आयु में **3 अप्रैल, 1680 को शिवाजी की मृत्यु हो गयी।** इनका अंतिम संस्कार राजाराम (दूसरी पत्नी सोयराबाई का पुत्र) ने संपन्न किया। इनकी मृत्यु के समय सम्भाजी पन्हाला के किले में कैद थे।

➣ शिवाजी के मंत्रिमंडल को **अष्टप्रधान** कहा जाता था। अष्टप्रधान में **पेशवा** का पद सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं सम्मान का होता था।

➣ शिवाजी ने दरबार में **मराठी** को भाषा के रूप में प्रयोग किया।

➣ शिवाजी की सेना तीन महत्वपूर्ण भागों में विभक्त थी— 1. **पागा सेना :** नियमित घुड़सवार सैनिक, 2. **सिलहदार :** अस्थायी घुड़सवार सैनिक, 3. **पैदल :** पैदल सेना।

➣ शिवाजी को तोपें अंग्रेजों ने प्रदान की थीं।

➣ मराठा राज्य के अंतर्गत दो प्रकार के क्षेत्र होते थे— 1. **स्वराज :** जो क्षेत्र प्रत्यक्षतः मराठों के नियंत्रण में थे, उन्हें स्वराज क्षेत्र कहा जाता था। 2. **मुघतई (मुलुक-ए-कदीम) :** यह वह क्षेत्र था जिसमें वे चौथ एवं सरदेशमुखी वसूल करते थे।

**नोट : चौथ एवं सरदेशमुखी स्वराज से नहीं लिए जाते थे बल्कि उन जगहों से लिए जाते थे जहाँ पूर्व मुगल या दक्कनी राजाओं का शासन था। चौथ भूराजस्व का एक चौथाई था जो मराठों के उस क्षेत्र पर आक्रमण नहीं करने के लिए दिया जाता था। सरदेशमुखी 10% का अतिरिक्त अधिभार था जो उस क्षेत्र से लिया जाता था जो मुगलों के अधीन था पर मराठा उस पर दावा करते थे।**

*\1 द गजटियर ऑफ इंडिया (V-II) P. 334, 335, कुछ अन्य

 स्रोतों में शिवाजी का जन्म 19 फरवरी, 1630 में बताया गया है।



### महाराष्ट्र के प्रमुख संत

 1. **ज्ञानदेव या ज्ञानेश्वर (1275-1296 ई.) :** महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन के जनक, मराठी भाषा और साहित्य के संस्थापक, भगवद्गीता पर 'भावार्थ दीपिका' नामक वृहत टीका लिखी, जिसे सामान्य रूप से **ज्ञानेश्वरी** के नाम से जाना जाता है। वारकरी संप्रदाय के प्रवर्तक।

 2. **नामदेव (1270-1350 ई.) :** इनके आराध्य देव पंढरपुर के विठोबा या विट्ठल थे। वारकरी संप्रदाय के विकास में इनकी प्रमुख भूमिका थी। इन्होंने अनेक भक्तिपरक मराठी गीतों की रचना की जो 'अभंग' के रूप में प्रचलित है। मराठी के अलावा इन्होंने ब्रजभाषा और खड़ी बोली में गीतों की रचना की। नामदेव को सगुण एवं निर्गुण संतों के बीच की कड़ी माना जाता है। इनमें कुछ पद गुरुग्रन्थ साहिब में संकलित हैं। **मुखवानी** नामक पुस्तक में इनकी रचनाएँ संगृहीत हैं।

 3. **एकनाथ (1533-1599 ई.) :** इन्होंने रामायण पर **भावार्थ रामायण** नामक टीका लिखी।

 4. **तुकाराम (1598-1650 ई.) :** इन्होंने भक्तिपरक कविताएँ लिखीं जिन्हें अभंग कहा जाता है। ये अभंग भक्तिपरक काव्य के ज्योतिपुंज हैं।

 5. **रामदास (1608-1681 ई.) :** महाराष्ट्र के अंतिम महान संत कवि। **दशबोध** उनकी रचनाओं और उपदेशों का संकलन है। इसमें उन्होंने कर्मदर्शन का उपदेश दिया। इन्होंने महाराष्ट्र में भगवान राम की पूजा को लोकप्रिय बनाया। आनंदवन भुवन नामक अपने पुस्तक में रामदास जी ने जातिगत भेद-भाव से मुक्ति, स्त्रियों की दशा में सुधार आदि विषयों पर अपने सदविचार व्यक्त किये हैं।

**नोट : महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन मुख्यतः दो संप्रदायों में विभक्त था।**

 1. **वारकरी संप्रदाय (अर्थात् विठोबा पंथ) :** कृष्ण को मानने वालों का पंथ— ज्ञानदेव, नामदेव, तुकाराम

 2. **धरकरी संप्रदाय (अर्थात् राम पंथ) :** रामदास

➣ **सरंजामी प्रथा का संबंध मराठा भूराजस्व व्यवस्था से है।**

### अष्टप्रधान

| पद | कार्य |

|---|---|

| **पेशवा (प्रधानमंत्री)** | राज्य का प्रशासन एवं अर्थव्यवस्था की देख-रेख |

| **सर-ए-नौबत (सेनापति)** | सैन्य प्रधान |

| **अमात्य (राजस्व मंत्री)** | आय-व्यय का लेखा-जोखा |

| **वाकियानवीश** | सूचना, गुप्तचर एवं संधि-विग्रह के विभागों का अध्यक्ष |

| **चिटनिस** | राजकीय पत्रों को पढ़कर उसकी भाषा-शैली को देखना |

| **सुमन्त** | विदेश मंत्री |

| **पंडितराव** | धार्मिक कार्यों के लिए तिथि का निर्धारण |

| **न्यायाधीश** | न्याय विभाग का प्रधान |

➣ **शिवाजी की कर-व्यवस्था मलिक अम्बर की कर-व्यवस्था पर आधारित थी।** शिवाजी ने रस्सी द्वारा माप की व्यवस्था के स्थान पर **काठी एवं मानक छड़ी** के प्रयोग को आरंभ किया। शिवाजी ने 1679 में अन्नाजी दत्तो द्वारा व्यापक भूमि सर्वेक्षण करवाया।

➣ शिवाजी के समय कुल उपज का 33% भाग राजस्व के रूप में वसूला जाता था, जो बढ़ कर 40% हो गया था।

➣ शिवाजी ने मुगल व्यापारिक केन्द्र सूरत को दो बार (1664 एवं 1670 ई.) में लूटा।

### शिवाजी के उत्तराधिकारी

➣ शिवाजी का उत्तराधिकारी **सम्भाजी** थे। सम्भाजी ने उज्जैन के हिन्दी एवं संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान **कवि कलश** को अपना सलाहकार नियुक्त किया।

➣ मार्च, 1689 ई. को मुगल सेनापति **मुर्कर्रब खाँ** ने संगमेश्वर में छिपे हुए सम्भाजी एवं कवि कलश को गिरफ्तार कर लिया और उसकी हत्या कर दी।

➣ सम्भाजी के बाद 1689 ई. में **राजाराम** को नए छत्रपति के रूप में राज्याभिषेक किया गया।

➣ **राजाराम ने अपनी दूसरी राजधानी सतारा को बनाया।**

#### शिवाजी के किले की सुरक्षा के लिए नियुक्त अधिकारी

 * **हवलदार :** किले की आंतरिक व्यवस्था की देख-रेख।

 * **सरैनौबत :** किले की सेना का नेतृत्व।

 * **सबनिस :** किले की अर्थव्यवस्था, पत्र-व्यवहार एवं भंडार की देख-रेख।

➣ राजाराम मुगलों से संघर्ष करता हुआ 2 मार्च, 1700 में मारा गया।

➣ राजाराम की मृत्यु के बाद उसकी विधवा पत्नी **ताराबाई** अपने 4 वर्षीय पुत्र शिवाजी-II का राज्याभिषेक करवाकर मराठा साम्राज्य की वास्तविक संरक्षिका बन गई।

➣ 1707 ई. में औरंगजेब की मृत्यु के बाद सम्भाजी के पुत्र **साहू** (जो औरंगजेब के कब्जे में था) भोपाल के निकट के मुगल शिविर से वापस महाराष्ट्र आया।

➣ **साहू एवं ताराबाई के बीच 1707 ई. में खेड़ा का युद्ध हुआ**, जिसमें साहू विजयी हुआ। साहू ने 22 जनवरी, 1708 ई. को सतारा में अपना राज्याभिषेक करवाया।

➣ साहू के नेतृत्व में नवीन मराठा साम्राज्यवाद के प्रवर्तक पेशवा लोग थे, जो साहू के पैतृक प्रधानमंत्री थे। पेशवा पद पहले पेशवा के साथ ही वंशानुगत हो गया था। पेशवा पुणे में रहता था।

➣ **1713 ई. में साहू ने बालाजी विश्वनाथ को पेशवा बनाया।** इनकी मृत्यु 1720 ई. में हुई। इसके बाद पेशवा बाजीराव प्रथम हुए।

➣ पेशवा बाजीराव प्रथम ने मुगल साम्राज्य की कमजोर हो रही स्थिति का फायदा उठाने के लिए साहू को उत्साहित करते हुए कहा कि *"आओ, हम इस पुराने वृक्ष के खोखले तने पर प्रहार करें, शाखाएँ तो स्वयं गिर जायेंगी, हमारे प्रयत्नों से मराठा पताका कृष्णा नदी से अटक तक फहराने लगेगी। उत्तर में साहू केला—निश्चित रूप से ही आप इसे हिमालय के पार गाड़ देंगे, निःसंदेह आप योग्य पिता के योग्य पुत्र हैं।'*

➣ **पालखेड़ा का युद्ध 7 मार्च, 1728 ई. बाजीराव प्रथम एवं निजामुल मुल्क के बीच हुआ** जिसमें निजाम की हार हुई। निजाम के साथ मुंगी शिवागांव की संधि हुई।

➣ दिल्ली पर आक्रमण करने वाला प्रथम पेशवा **बाजीराव प्रथम** था, जिसने 29 मार्च, 1737 को दिल्ली पर धावा बोला था। उस समय मुगल बादशाह मुहम्मदशाह दिल्ली छोड़ने के लिए तैयार हो गया था।

➣ बाजीराव प्रथम मस्तानी नामक महिला से संबंध होने के कारण चर्चित रहा था।

➣ 1740 ई. में बाजीराव प्रथम की मृत्यु हो गयी।

➣ बाजीराव प्रथम की मृत्यु के बाद **बालाजी बाजीराव** 1740 ई. में पेशवा बना।

➣ वारना की संधि में यह व्यवस्था की गयी कि सम्भाजी II (राजाराम की दूसरी पत्नी से उत्पन्न पुत्र) मराठा राज्य के दक्षिणी भाग पर जिसकी राजधानी कोल्हापुर थी, शासन करे तथा उत्तरी भाग, जिसकी राजधानी सतारा थी, साहू शासन करें।

➣ **संगोला का संधि बालाजी बाजीराव और राजाराम II के बीच हुई।** इसके अनुसार, मराठा संगठन का वास्तविक नेता पेशवा बन गया।

#### अंग्रेज-मराठा संघर्ष के अन्तर्गत होनेवाली प्रमुख संधियाँ

| संधियाँ | वर्ष |

|---|---|

| वारना की संधि | 1731 |

| संगोला की संधि | 1750 |

| सूरत की संधि | 1775 |

| पुरन्दर की संधि | 1776 |

| बड़गाँव की संधि | 1779 |

| सालाबाई की संधि | 1782 |

| वसीन की संधि | 1802 |

| देवगाँव की संधि | 1803 |

| सुरजी अर्जुनगाँव की संधि | 1803 |

| राजापुर घाट की संधि | 1804 |

| नागपुर की संधि | 1816 |

| ग्वालियर की

 संधि | 1817 |

| पूना की संधि | 1817 |

| मंदसौर की संधि | 1818 |



➣ सूरत की संधि के अनुसार अंग्रेजों ने रघुनाथ राव को सैनिक सहायता देना स्वीकार किया तथा युद्ध में विजय के उपरांत उसे पेशवा बनाने का भी वचन दिया।

**नोट : बालाजी बाजीराव को नाना साहब के नाम से भी जाना जाता था।**

➣ झलकी की संधि हैदराबाद के निजाम एवं बालाजी बाजीराव के मध्य हुई।

➣ बालाजी बाजीराव के समय में ही पानीपत का तृतीय युद्ध (**14 जनवरी, 1761**) हुआ, जिसमें मराठों की हार हुई। इस हार को नहीं सह पाने के कारण बालाजी की मृत्यु 1761 ई. में हो गयी।

➣ माधवराव नारायण प्रथम 1761 ई. में पेशवा बना। इसने मराठों की खोयी हुई प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त करने का प्रयास किया।

➣ माधवराव ने ईस्ट इंडिया कंपनी की पेंशन पर रह रहे मुगल बादशाह शाह आलम-II को पुनः दिल्ली की गद्दी पर बैठाया। मुगल बादशाह अब मराठों का पेंशनभोगी बन गया।

➣ पेशवा नारायण राव (1772-73 ई.) की हत्या उसके चाचा रघुनाथ राव के द्वारा कर दी गई।

➣ पेशवा माधवराव नारायण-II की अल्पायु के कारण मराठा राज्य की देख-रेख **बारहभाई सभा** नाम की 12 सदस्यों की एक परिषद् करती थी। इस परिषद् के दो महत्वपूर्ण सदस्य थे—महादजी सिंधिया एवं नाना फड़नवीस। नाना फड़नवीस का मूल नाम बालाजी जनार्दन भानु था। अंग्रेज जेम्स ग्रांट डफ ने इन्हें मराठों का मैकियावेली कहा था।

➣ अंतिम पेशवा राघोबा का पुत्र बाजीराव-II था, जो अंग्रेजों की सहायता से पेशवा बना था। मराठों के पतन में सर्वाधिक योगदान इसी का था। यह सहायक संधि स्वीकार करने वाला प्रथम मराठा सरदार था।

➣ 1776 ई. में पुरन्दर की संधि हुई। इसके तहत कंपनी ने रघुनाथ राव के समर्थन को वापस ले लिया।

➣ प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध : प्रथम युद्ध 1782 ई. में सालबाई संधि के साथ खत्म हुआ।

➣ द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध : 1803-05 ई. में हुआ। इसमें भोंसले एवं सिंधिया की पराजय हुई तथा अंग्रेजों से दो पृथक संधियाँ करनी पड़ीं।

 1. **देवगाँव की संधि :** यह संधि 17 दिसंबर, 1803 को रघुजी भोंसले और अंग्रेजों के बीच हुई थी। द्वितीय मराठा युद्ध के दौरान अरगाँव की लड़ाई (नवंबर, 1803) में अंग्रेजों ने रघुजी भोंसले को पराजित किया था उसी के फलस्वरूप यह संधि हुई थी। इस संधि के अनुसार भोंसले ने अंग्रेजों को बालासोर सहित कटक का प्रांत तथा वर्धा नदी के पश्चिम का अपना सारा राज्य सौंप दिया।

 2. **सुर्जी-अर्जुनगाँव की संधि :** यह संधि 30 दिसंबर, 1803 को दौलतराव सिंधिया एवं अंग्रेजों के बीच हुआ। इसके अनुसार उसने अंग्रेजों को गंगा और यमुना के बीच का अपना सारा राज्य तथा जयपुर, जोधपुर एवं गोहद के राजपूत राज्यों के उत्तर के अपने किले और राज्य दे दिए। पश्चिम में उसने अंग्रेजों को अहमद नगर, भड़ौच तथा अजिंठा की पहाड़ियों के पश्चिम का अपना सारा राज्य सौंप दिया।

   ➣ **मंदसौर की संधि :** 6 जनवरी 1818 को होल्कर एवं अंग्रेजों के बीच मंदसौर की संधि हुई। इसके अनुसार उसने राजपूत राज्यों पर सभी दावे छोड़ दिए, नर्मदा के दक्षिण के सभी जिले अंग्रेजों को सौंप दिए।

   ➣ **तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध : 1817-19 ई.** में हुआ। इस युद्ध के बाद मराठा शक्ति और पेशवा के वंशानुगत पद को समाप्त कर दिया गया।

   ➣ पेशवा बाजीराव-II ने **कोरेगाँव एवं आष्टी** के युद्ध में हारने के बाद मेलकम के सम्मुख आत्मसमर्पण कर दिया। परिणामस्वरूप दोनों के बीच पूना की संधि (13 जून, 1817) हो गयी। अंग्रेजों ने पेशवा के पद को समाप्त कर बाजीराव-II को पुणे से हटाकर कानपुर के निकट **बिठूर** में पेंशन पर जीने के लिए भेज दिया, जहाँ 1853 ई. में इसकी मृत्यु हो गयी।

### मराठा प्रशासन

➣ पूना में स्थित पेशवा का सचिवालय मराठा प्रशासन का केन्द्र था, जिसे **हजूर दफ्तर** कहते थे।

➣ मराठा राज्य में सूबे को प्रांत, तरफ अथवा परगने को महल कहते थे।

➣ बड़े प्रांत सर सूबेदार के अधीन होते थे। इसके अधीनस्थ मामलेदार होते थे जो सीधे केन्द्रीय दफ्तर को ब्योरा देते थे।

➣ **देशमुख तथा देशपांडे** अन्य जिला अधिकारी थे जो मामलेदार पर नियंत्रण के रूप में कार्य करते थे।

➣ **कारकून** नामक जिले का अधिकारी विशेष घटनाओं की सूचना सीधे केन्द्र को देता था।

➣ महल का मुख्य कार्यकर्ता **हवलदार** होता था तथा **मजमुदार** और **फड़नवीश** उसकी सहायता करते थे।

➣ ग्राम का मुख्य अधिकारी **पटेल** होता था जो कर संबंधी, न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्य करता था। पटेल के नीचे **कुलकर्णी** होता था जो ग्राम की भूमि का लेखा रखता था। कुलकर्णी के नीचे **चौगुले** होता था जो पटेल की सहायता करता था तथा कुलकर्णी के लेखे की देखभाल करता था। **पोतदार** सिक्कों के निर्धारित भार तथा धातु की शुद्धता की जाँच करता था। इसके अतिरिक्त ग्राम **12 बलुटे (शिल्पी)** तथा **12 अलुटे (सेवक)** होते थे।

➣ **कोतवाल** नगर का मुख्य प्रशासक था।

➣ गाँव में **चौकीदार (जागला)** अपराधियों के पता लगाने का काम करता था।

➣ स्थायी भूस्वामित्व प्राप्त लोग **मिरासदार** कहलाते थे।

➣ बटाईदार भूस्वामी **उपरिस** कहलाते थे।

| घराना | स्थान |

|---|---|

| **सिंधिया** | ग्वालियर |

| **होल्कर** | इंदौर |

| **गायकवाड़** | बड़ौदा |

| **भोंसले** | नागपुर |

| **पेशवा** | पूना |

**नोट : पेशे से लुटेरे पिंडारी पाल पट्टी नामक कर वसूल करने के बदले में मराठा सेना के प्रत्येक अभियान में उनके साथ जाते थे। अपने लूट के माल में से वे सरकार को 25% हिस्सा देते थे।**

➣ **मराठा साम्राज्य के अंतिम छत्रपति शाहजी अप्पासाहेब थे।**


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